अधिकांश वाहन चालकों ने 100 से 120 किमी प्रति घंटे की रफ्तार पर गाड़ी दौड़ाई। उनका ध्यान कैमरों की ओर नहीं था कि वे उन पर नजर रख रहे हैं। पिछले एक माह में दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने 7.22 लाख से ज्यादा चालान किए हैं। इनमें 70 फीसदी से अधिक चालान ओवरस्पीड के हैं।
राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के लॉकडाउन को बहुत से वाहन चालक अपने लिए फायदेमंद मान रहे हैं। वे सोचते हैं कि रास्ते में न ट्रैफिक पुलिस मिलेगी और न कोई दूसरी एजेंसी। गाड़ी के एक्सीलेटर को जितना मर्जी दबाओ, कोई रोकने वाला नहीं है।
अधिकांश वाहन चालकों ने 100 से 120 किमी प्रति घंटे की रफ्तार पर गाड़ी दौड़ाई। उनका ध्यान कैमरों की ओर नहीं था कि वे उन पर नजर रख रहे हैं। पिछले एक माह में दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने 7.22 लाख से ज्यादा चालान किए हैं। इनमें 70 फीसदी से अधिक चालान ओवरस्पीड के हैं। बाकी चालान लालबत्ती उल्लंघन, गलत दिशा में ड्राइविंग, बिना सीट बेल्ट, बिना हेलमेट, ड्राइविंग के दौरान मोबाइल फोन का इस्तेमाल व स्टॉप लाइन क्रॉसिंग आदि के हैं।
दिल्ली में 25 मार्च से लेकर अब तक जो भी ट्रैफिक चालान हुए हैं, उनमें से अधिकतर उल्लंघनकर्ताओं को ट्रैफिक पुलिस के कैमरों ने पकड़ा है। ये कैमरे विभिन्न मार्गों पर लगाए गए हैं। इनमें नाइट विजन कैमरे भी शामिल हैं। जो रात में ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहनों की रिकॉर्डिंग कर लेते हैं।
दिन के समय अधिकांश मार्गों पर ट्रैफिक पुलिस तैनात रहती है, उन्होंने भी उल्लंघनकर्ताओं को पकड़ने में कोई कसर बाकी नहीं छोड़ी। नतीजा, लॉकडाउन के दौरान करीब 24 हजार वाहन चालक रोजाना ट्रैफिक नियम तोड़ते हुए पकड़े गए। वहीं सड़क हादसों में 18 लोगों की जान चली गई।
ट्रैफिक पुलिस के ज्वाइंट सीपी नरेंद्र सिंह बुंदेला के अनुसार, दिल्ली में लॉकडाउन के दौरान सरकारी ड्यूटी या जरूरी वस्तुओं की सप्लाई के काम में लगी अनेक टीमों को पास जारी किए गए थे। सड़कें तो पहले से ही खाली थी। वाहन चालकों ने इसका फायदा उठाते हुए ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन करना शुरू कर दिया।
दूसरी ओर ट्रैफिक पुलिस पहले से कहीं ज्यादा सजग थी। हमें यह मालूम था कि कुछ वाहन चालक खाली सड़कों का गलत फायदा उठा सकते हैं। वे करते रहे और हम पकड़ते रहे। ट्रैफिक पुलिस के कैमरे 24 घंटे काम कर रहे थे। मैनुअल इंटरसेप्टर एवं स्पीड डिटेक्ट गन जैसे उपकरण भी लगाए गए थे।
