राजनांदगांव, दिग्विजय कॉलेज के रसायन शास्त्री सहायक प्राध्यापक शामिल डॉ. डाकेश्वर वर्मा की संपादित पुस्तक लंदन में प्रकाशित हुई।
सुपर केपेसीटर की मूल बातें, उन्नत और भविष्य के तकनीकी प्रयोग का रॉयल सोसाइटी ऑफ केमिस्ट्री लंदन में प्रकाशन हुआ। पुस्तक सुपर केपेसीटर तकनीक की मूल अवधारणाओं उसके उन्नत और भविष्य में होने वाले प्रयोगों का व्यापक विवरण है। उन्होंने 73 शोध पत्र, समीक्षा लेख 38 पुस्तकें लिखी, अब 7 लिखने की तैयारी में है।
पुस्तक में सुपर केपेसीटर की संरचना, कार्य सिद्धांत, इलेक्ट्रोड एवं इलेक्ट्रो लाइट सामग्री, रासायनिक गुणों का वैज्ञानिक विश्लेषण है। इलेक्ट्रिक डबल लेयर कैपेसिटेंस, प्सूडो कैपेसिटेंस जैसे सिद्धांतों को सरल रूप में समझाया है। पारंपरिक बैटरी की सीमा की तुलना में सुपर केपेसीटर की उच्च शक्ति घनत्व, तीव्र चार्जिंग क्षमता, दीर्घ आयु जैसे गुणों का वर्णन है। विश्व के शीर्ष 2 प्रतिशत वैज्ञानिकों की सूची में शामिल होने पर उनका लंदन के कॉलेज और यूनिवर्सिटी के विद्यार्थियों से संपर्क हुआ।
ऊर्जा प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में अनुसंधान को प्रेरणा पुस्तक में नए शोध प्रवृत्तियों, उन्नत नैनो सामग्री ग्रेफीन, कार्बन नैनो ट्यूब्स और मेटल ऑक्साइड पर आधारित केपेसीटर डिजाइनों का विवेचन है। यह पुस्तक न केवल वैज्ञानिक जगत के लिए एक संदर्भ ग्रंथ है, बल्कि यह सतत ऊर्जा विकास की दिशा में भारत के योगदान को नई दृष्टि प्रदान करती है। इस पुस्तक के प्रकाशन से ऊर्जा प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में अनुसंधान एवं नवाचार करने वालों को नई प्रेरणा मिलेगी। इस उपलब्धि के लिए प्राचार्य डॉ. सुचित्रा गुप्ता ने हौसला बढ़ाया।
सहूलियत के लिए तीन सेक्शन में बांटा गया है पाठकों के लिए किताब को 3 सेक्शन में बांटा गया। पार्ट ए में सुपर केपेसीटर का इंट्रोडक्शन, सिंथेसिस, कैरेक्टराइश एवं इंटरफेस मुख्य टॉपिक है। पार्ट बी में सुपर केपेसीटर के लिए इलेक्ट्रोड मटीरियल पर ज़ोर दिया। पार्ट सी में केस स्टडीज़, कमर्शियल एवं सुपर केपेसीटर के एडवांस एप्लीकेशन पर फोकस है। यह किताब केमिस्ट्री, फिजिक्स, केमिकल इंजीनियरिंग एवं और मटेरियल साइंस में रिसर्ज करने के लिए प्रकाशित की गई है।
