दुर्ग। जिले में कोरोना के आंकड़ों को लेकर स्वास्थ्य विभाग की भूमिका शुरू से ही संदिग्ध रही है। पहले मौत के आंकड़ों की सही जानकारी नहीं जा रही थी। वर्तमान में कोरोना के सक्रिय केस के आंकड़ों को लेकर राज्य ने जिला स्वास्थ्य विभाग से जवाब मांगा है।
स्वास्थ्य विभाग अब आंकड़ों को दुरुस्त करने में लगा हुआ है।लेकिन 3600 सक्रिय केस का समायोजन कैसे किया जाना है इस संबंध में जिले के अधिकारियों ने राज्य के अफसरों से मार्गदर्शन भी मांगा है।
अप्रैल महीने में जिले में कोरोना संक्रमण का मामला निरंतर बढ़ते क्रम में रहा। किसी दिन 24 सौ तो किसी दिन 22 सौ तक नए संक्रमित मरीज मिलने लगे। संक्रमित मरीजों की संख्या बढ़ने के साथ ही जिला प्रशासन के अधिकारी दबाव में आने लगे और यहीं से आंकड़ों को छुपाने का खेल शुरू हुआ।
जिसकी वजह से जिले में कोरोना के सक्रिय केस की संख्या अचानक बढ़ हई। स्वास्थ्य विभाग द्वारा दो मई को जारी आंकड़ों के मुताबिक जिले में कोरोना के सक्रिय मरीजों की संख्या करीब चार हजार के आसपास थी। लेकिन तीन मई को यह आंकड़ा बढ़कर 11227 तक पहुंच गया। एक ही दिन में कोरोना के सक्रिय केस की संख्या सात हजार से अधिक बढ़ गई।
पहले तो सीएमएचओ इसे तकनीकी त्रुटि बताकर इसमें सुधार कर लेने की बात कहते रहे। लेकिन यह तकनीकी त्रुटि नहीं एक तरह से आंकड़ों को छुपाने के प्रयास का मामला है।
जिले के एनआइसी और स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों में सक्रिय केस की संख्या में अंतर पाए जाने पर राज्य ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए दुर्ग सीएमएचओ से जवाब मांगा है। अब जिला स्वास्थ्य विभाग का अमला आंकड़ों का समायोजन करने में लगा हुआ है।
इन कारणों से हुई गड़बड़ी प्राइवेट लैब नहीं देते समय पर रिपोर्ट-जिला स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि प्राइवेट लैब में भी कोरोना की जांच कराई जा रही है। लैब वाले पाजीटिव रिपोर्ट की जानकारी तत्काल टेस्ट कराने वाले व्यक्ति को दे दे रहे हैं लेकिन आइसीएमआर में इसकी इंट्री आठ से दिन बाद कर रहे हैं।
इस कारण पाजिटिव रिपोर्ट का डेटा स्वास्थ्य विभाग को समय पर नहीं मिल रहा है वहीं आइसीएमआर में अपलोड होने के बाद एनआइसी ऐसे डेटा को शो करता है।
पुरानी रिपोर्ट को जोड़ने से करते हैं मना-स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि आठ दस दिन पुरानी सैंपल की रिपोर्ट पाजिटिव आने पर जिला प्रशासन के अधिकारी पुरानी रिपोर्ट होना बताकर जोड़ने से मना करते हैं। लेकिन पाजिटिव रिपोर्ट को आज नहीं तो कल जोड़ना ही पड़ेगा। इसका असर भी आंकड़ों पर पड़ रहा है।
प्राइवेट अस्पताल नहीं देते आनलाइन जानकारी-स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि प्राइवेट अस्पताल वहां से छुट्टी होने वाले कोविड मरीजों की आनलाइन जानकारी भी समय पर नहीं दे रहे हैं। जबकि अस्पताल से छुट्टी होने के बाद लोग होमआइसोलेशन पर चले जा रहे हैं।
होम आइसोलेशन पर जाने वालों का भी आफलाइन पंजीयन किया जाता है। इस वजह से आंकड़ें गड़बड़ हो रहे हैं।
आंकड़ों को सुधार रहे ‘जिले में कोरोना के सक्रिय मरीजों की संख्या से संबंधित आंकड़ों में जो गड़बड़ी हुई है उसमें सुधार किया जा रहा है। किन कारणों से आंकड़े नहीं जुड़ पाए थे इसकी जानकारी राज्य को भेजी जाएगी।’
-डा.गंभीर सिंह ठाकुर सीएमएचओ दुर्ग।
