राजनांदगांव। विधायक दलेश्वर साहू की शिकायत एवं लगातार सोशल मिडिया और अखबारों में प्रकाशित समाचार के बाद प्रशासन की टीम ने बीते गुरुवार को सुंदरा मल्टीस्पेशिलिटी हास्पिटल में जांच करने पहुंची थी । जांच में कई गंभीर गलतियां पकड़ में आई हैं। इस अस्पताल प्रबंधन ने न सिर्फ रेमडेसिवीर इंजेक्शन के मामले में शासन द्वारा दिए गए निर्देशों की अवहेलना की बल्कि कोरोना संक्रमितों के लिए निर्धारित राशि से ज्यादा वसूली की है। अब स्वास्थ्य अधिकारी द्वारा इस अस्पताल को नोटिस जारी कर 24 घंटे मे जवाब मागा गया था।
निजी अस्पतालों में कोरोना मरीजों के इलाज में लापरवाही और तमाम तरह की गड़बडि़यों की शिकायत के बाद बुधवार को एसडीएम मुकेश रावटे के नेतृत्व में प्रशासनिक टीम ने सुंदरा मल्टीस्पेशिलिटी हास्पिटल का औचक निरीक्षण किया था। प्रशासनिक टीम ने गुरुवार को कलेक्टर के सामने अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की है। इस रिपोर्ट में अस्पताल के दस्तावेजों की जांच के आधार पर कई गंभीर गड़बडि़यों का जिक्र थ। एसडीएम और उनके साथ गए डीएचओ डा एमके भुआर्य, सीएसपी लोकेश देवांगन, डीडी संजय झाडे़कर, एफआई प्रवीण चौबे और डीपीसी एशवर्य साव की रिपोर्ट के बाद कलेक्टर ने अस्पताल प्रबंधन पर कडी़ कार्रवाई करते हुये आज उक्त अस्पताल का लायसेन्स एक माह के लिये निलम्बित कर दिया है।
कोरोना मरीजों के इलाज के लिए अधिकृत निजी अस्पतालों में अव्यवस्था को लेकर लगातार समाचार प्रकाशित हो रहे थे । इन खबरों एवं विधायक की शिकायत के बाद प्रशासनिक टीम ने सुंदरा के मल्टीस्पेशिलिटी अस्पताल का औचक निरीक्षण किया और अस्पताल के दस्तावेजों की पड़ताल की।
ये गलतियां पकड़ में आईं
0 अस्पताल प्रबंधन ने रेमडेसिवीर इंजेक्शन को लेकर शासन के निर्देशों की अवहेलना की है। अस्पताल ने कंपनी से सीधे इंजेक्शन लिया और इसका कोई रिकार्ड भी संधारित कर नहीं रखा। टीम की जांच में अस्पताल ने रेमडेसिवीर का स्टाक निल बताया जबकि उनके पास इंजेक्शन मिले। इसके साथ ही यह गड़बड़ी भी मिली कि अस्पताल के पास इंजेक्शन जिस तिथि को आई, उस तिथि के पहले ही मरीज को लगाए जाने का रिकार्ड बनाकर रखा था।
सुंदरा अस्पताल ने 60 बेड के कोविड अस्पताल की अनुमति प्रशासन से ली थी लेकिन यहां 100 मरीजों को रखकर इलाज किया जा रहा था। जांच टीम के सवालों पर इसे लेकर अस्पताल प्रबंधन कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे पाया।
0 सरकारी गाईड लाईन से वसूल रहे ज्यादा रकम
राज्य सरकार ने कोविड मरीजों से आईसीयू, सामान्य और वेंटिलेटर बेड के लिए ली जाने वाली राशि तय किया है और इस राशि में कुछ दवाओं और भोजन का मूल्य भी शामिल किया गया है लेकिन इस अस्पताल में इससे ज्यादा राशि ली गई है।
24 घंटे में मांगा गया।
जांच टीम के प्रतिवेदन के बाद गुरुवार शाम कलेक्टर टोपेश्वर वर्मा और सीएमएचओ डा मिथलेश चौधरी की मौजूदगी में अफसरों ने चर्चा की। चर्चा के बाद अस्पताल प्रबंधन को नोटिस देकर 24 घंटे में जवाब मांगने का फैसला लिया गया था । उनके जवाब के बाद अस्पताल पर आज कार्ई का निर्णय लिया गया।
पूर्व में मान्यता को लेकर जो शिकायत हुई थी
उसमे भी csp कार्यालय में अनेकों के ब्यान हो गये है। जल्द ही उस मे भी कार्यवाही होने के संकेत मिल रहे है।
अनुविभागीय दण्डाधिकारी राजनांदगाव की अध्यक्षता में जांच कर संयुक्त जांच कमेटी द्वारा निरीक्षण प्रतिवेदन प्रस्तुत किया गया तत् पश्चात् इस कार्यालय के पत्र क्रमांक / एन.एच.ए. / 2021 / 1750 राजनांदगांव दिनांक 30.04.2021 के माध्यम से संचालक , सुंदरा मल्टीस्पेशलिटि हॉस्पिटल ग्राम सुंदरा जिला राजनांदगांव को नोटिस जारी किया गया उक्त नोटिस के जवाब में सुंदरा मल्टीस्पेशिलिटी हास्पिटल राजनांदगांव पत्र क्रमांक / एस.एम.एच . / मई / 01 / 01 दिनांक 01.05.2021 द्वारा जवाब प्रस्तुत किया गया , प्रस्तुत जवाब सह स्पष्टीकरण के अवलोकन पश्चात , जांच कमेटी के द्वारा अभिमत प्रस्तुत किया गया जिसमें निम्नलिखित अनियमितता पाई गयी है : 01. कार्यालय मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी राजनांदगांव का पत्र क्रमांक / 2033 , दिनांक 05.04 . 2021 प्राप्त नहीं हुआ का उल्लेख है । जबकि दिनांक 05.04.2021 को पत्र ई – मेल के माध्यम से संप्रेषित किया जा चुका था । जिसकी प्रति संलग्न है । स्पष्टीकरण जवाब में उल्लेख है । कि सी.एम. एच.ओ. कार्यालय के पत्र क्रमांक / 862 दिनांक 19.09.2020 के अनुसार 100 बेड की अनुमति प्रदान की गई थी जिसमें हास्पिटल प्रबंधन के अनुसार 60 बेड कोविड मरीज एवं 40 बेड अन्य मरीजों के लियें है , परंतु दिनांक 28.04.2021 को भर्ती सभी 75 मरीजो का उपचार कोविड से संबंधित वार्ड में किया जाना पाया गया । इस संबंध में जांच दल के समक्ष कोविङ -19 व संदेहास्पद मरीजों की सूची पृथक – पृथक प्रस्तुत नहीं की गई , जिससे स्पष्ट होता है कि उक्त आदेश का हॉस्पिटल प्रबंधन के द्वारा पालन नहीं किया जा रहा है । साथ ही हॉस्पिटल संचालन के संबंध में नवीन आदेश दिनांक 05.04.2021 को जारी होने के पश्चात् पूर्व आदेश दिनांक 19.09.2020 स्वतः कालातीत हो जाता है । अतः प्रस्तुत स्पष्टीकरण सह जवाब संतोषप्रद नहीं है । 02. निरीक्षण के दौरान 8 मरीजो का केस सीट और फायनल बिलिंग में पैथालाजी व हिमेटोलॉजी एक्स – रे , यू.एस.जी. एवं सीरोलॉजी का जांच का शुल्क शासन के द्वारा प्रदत्त पैकेज दर में निर्धारित किया गया है । परंतु आपके द्वारा शुल्क मरीज से वसूल की गई है । जिसका आपके द्वारा प्रदत्त स्पष्टीकरण में स्पष्ट रूप से उल्लेख नहीं किया गया है और न ही भोजन व्यवस्था के चार्ज के बारे में स्पष्टीकरण दिया गया है । हॉस्पिटल प्रबंधन द्वारा प्रस्तुत जवाब में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के पत्र क / एफ – 10-62 / 2020 / 17 – दो दिनांक 05.09.2020 के आधार पर ईलाज किए जाने का उल्लेख है । अतः कथन किया गया है कि उक्त पत्र में केवल निर्धारित दल दर्शायी गई थी । जिसमें कहीं भी दवाई या टेस्टिंग के रेट ईत्यादि का उल्लेख नहीं है । जबकि स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के पत्र क्रमांक / एफ – 10-62 / 2020 / 17 – दो दिनांक 11.04.2021 एवं संचालनालय स्वास्थ्य सेवायें छ . ग . के पत्र क्रमांक / स्टेनो / 2021 / 102 अटल नगर नवा रायपुर दिनांक 27.03.2021 के अनुसार कोविड मरीजो के ईलाज के संबंध में स्पष्ट आदेश जारी किया गया है । जिसके अनुसार ही आपके हॉस्पिटल के द्वारा बिल चार्ज किया गया है । जो कि आपके हॉस्पिटल में भर्ती मरीज कुसुम लता शर्मा , ओ.पी.डी. नंबर 1462 विल क्रमांक -692 के बिल व्हाउचर से स्पष्ट होता है कि आपके द्वारा उपरोक्त नवीन शासनादेश के तहत् आईसीयू , वेंटीलेटर का चार्ज लिया गया है । जिसमें साथ ही अन्य छूट से संबंधित का भी बिल जोडा गया है । इस प्रकार आपके द्वारा यह कहना कि आपको टेस्ट व गेडिसीन के बारे में जानकारी नहीं दी गई पूर्णतः गलत है । अतः आपके द्वारा प्रस्तुत स्पष्टीकरण संतोषजनक नहीं होने के कारण अमान्य किया जाता है । ( 03. आपके द्वारा पूर्व में प्रस्तुत औषधि रेमडेसिविर इंजेक्शन से संबंधित विक्रय दस्तावेज तथा स्पष्टीकरण में प्रस्तुत विक्रय दस्तावेज में कुछ औषधियों के बैच नंबर में अंतर पाया गया है । इससे प्रतीत होता है कि आपके द्वारा विक्रय दस्तावेजों में छेडछाड की गई है तथा आपके द्वारा प्रस्तुत स्पष्टीकरण तर्क संगत नहीं है । अतः आपके द्वारा प्रस्तुत स्पष्टीकरण अमान्य किया जाता है । 04. आपके द्वारा स्पष्टीकरण के जवाब में रेमडेसिविर इंजेक्शन का क्रय – विक्रय दस्तावेज प्रस्तुत किया गया है । जिसके अवलोकन पश्चात् यह बिन्दू स्पष्ट होता है कि पूर्व में हॉस्पिटल प्रबंधन के द्वारा जांच दल को दी गई रेमडेसिविर इंजेक्शन की विक्रय सूची एवं स्पष्टीकरण जवाब के साथ प्रस्तुत विक्रय सूची में बहुत अधिक अंतर है । दिनांक 1 अप्रैल 2021 से दोनो विक्रय सूची के मिलान से इंजेक्शन के बैच नंबर में फेरबदल स्पष्ट प्रतीत होता है , पूर्व सूची में बिल नंबर 94 के मरीज को बैच क्रमांक – 016 – ए कोविफोर -100 एमजी . का इंजेक्शन दिया गया था परंतु वर्तमान में विक्रय सूची में 004 – ए , बैच नंबर इंद्राज है । इसी प्रकार बिल क्रमांक -93 , 85 , 140 , 106 , 383 , 664 , 745 , 746 , 681 , 682 , 697 , 1225 इत्यादि एवं अन्य और भिन्नताएं पाई गई है । जांच दल के द्वारा कंवर लाल चौरडिया के मेडिकल सेल रिपोर्ट अनुसार 11 अप्रैल 2021 को बैच नंबर 002 – ए , कोविफोर -100 एम.जी. का रेमडिसिविर इंजेक्शन लगाया गया है । परंतु प्रबंधक द्वारा स्पष्टीकरण जवाब के साथ प्रस्तुत विक्रय सूची के अनुसार बैच नंबर 1009 , कोविफोर -100 एम . जी . इंजेक्शन लगाया गया है । इसी प्रकार विक्रय सूची अनुसार कृष्णा एजेंसी को दिनांक 19.04.2021 को 20 नगर बैच नंबर 016 – ए का कोविफोर -100 एम.जी. इंजेक्शन विक्रय किया जाना दर्शित हैं किन्तु उक्त एजेंसी के द्वारा क्रय किए गए इंजेक्शन के संबंध में किसी भी प्रकार की क्रय विक्रय संबंधी दस्तावेजी जानकारी प्रस्तुत नहीं किया गया है । इस प्रकार हास्पिटल प्रबंधन के द्वारा स्पष्टीकरण के जवाब में यह कहना कि सिर्फ साफ्टवेयर की तकनीकी खामी की वजह से अनियमितता नजर आ रही थी एवं साफ्टवेयर की उस त्रुटि को सुधार लिया गया है । व रिकार्ड दुरूस्त है . पूर्णतः गलत है । स्पष्टीकरण जवाब तथ्यों से परे होने व प्रस्तुत दस्तावेजो से भी स्पष्ट नहीं होने के कारण हॉस्पिटल प्रबंधन का स्पष्टीकरण अस्वीकार्य है । जांच कमेटी द्वारा हास्पिटल प्रबंधन के द्वारा दस्तावेजी साक्ष्यों में फेरबदल करना , साथ ही अपनी गलती स्वीकार नहीं करते हुयें पृथक – पृथक विक्रय सूची प्रस्तुत कर गुमराह करने का प्रयास किया गया है ।
अतः नर्सिग होम एक्ट एवं दिये गये निर्देशों का पालन नहीं किये जाने के कारण आपके चिकित्सालय का पंजीयन आगामी 01 माह के लिये निलंबित किया जाता है । साथ ही आपकों यह निर्देशित किया जाता है कि आप अपने संस्था अंतर्गत किसी भी नये मरीज की भर्ती आदेश प्रसारित दिनांक से नहीं लेंगे ।
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी राजनांदगांव ( छ.ग. )



