उत्तर प्रदेश के मेरठ जनपद में ऑक्सीजन संकट का बढ़ता ही जा रहा है। वहीं ऑक्सीजन की कमी से जूझ रहे केएमसी अस्पताल में पिछले 24 घंटे में नौ लोगों की मौत हो चुकी हैं। जिला प्रशासन का दावा है कि पर्याप्त ऑक्सीजन सिलिंडर थे।
ऑक्सीजन की किल्लत से कोरोना का इलाज कर रहे अस्पताल ही ‘वेंटिलेटर’ पर आ गए हैं। अस्पतालों में लगातार ऑक्सीजन खत्म हो रही है। अलग-अलग अस्पतालों में पिछले 24 घंटे में 30 लोगों की मौत हुई है। इनमें 22 मौत कोरोना से हुई हैं, जबकि आठ मौतें कोरोना संदिग्धों की हैं। ऑक्सीजन के संकट से जूझ रहे केएमसी अस्पताल में पिछले 24 घंटे में नौ लोगों की मौत हुई है।
सोमवार को काल के गाल में समाने वाले संक्रमितों में मेरठ के अलावा आसपास के जिलों की भी रहने वाले थे। 13 मौत मेडिकल कॉलेज और नौ मौतें केएमसी में हुई हैं। इनके अलावा आनंद, न्यूटिमा, आर्यवर्त और अपस्नोवा आदि अस्पतालों में भी आठ लोगों की मौत हुई है। उधर, ऑक्सीजन की कमी के कारण घरों में रहने वाले ज्यादातर मरीज तड़प रहे हैं।
इस बीच सोमवार को ऑक्सीजन की कमी के कारण कई निजी अस्पतालों ने नए मरीजों को भर्ती करने तक से हाथ खड़े कर दिए। इनके प्रबंधन का कहना है कि उन्हें मांग के अनुरूप ऑक्सीजन नहीं मिल रही है। पहले से भर्ती मरीजों को ही ऑक्सीजन नहीं दे पा रहे हैं। केएमसी अस्पताल के चेयरमैन डॉ. सुनील गुप्ता का कहना है कि मरीजों की जरूरत के मुकाबले ऑक्सीजन बहुत कम है। कमी के बावजूद मरीजों को ऑक्सीजन दी जा रही है। न्यूटिमा के एक संचालक डॉ. संदीप गर्ग का कहना है कि ऑक्सीजन की आपूर्ति सुनिश्चित कराने के बजाय स्वास्थ्य विभाग मरीजों को एक से दूसरे अस्पताल शिफ्ट करा रहा है।
