राजनांदगाँव… कोविड-19 के द्वितीय चरण में प्रदेश स्तर पर जहां कोरोना संक्रमितों की संख्या में बेतहासा वृद्धि हुई है, वही संक्रमण से मरने वालों की संख्या भी ख़ौफ़ज़दा है।
वैसे तो मरने वालों के शासकीय आंकड़े देखे तो थोड़ी राहत मिलती है, लेकिन जमीनी स्तर पर यह आंकड़े भयावह हो जाते है, शासन- प्रशासन उन्ही आंकड़ों की बात करता है, जिसमे शासकीय कोविड हॉस्पिटल में संक्रमितों की मौत हुई रहती है।
इसके अलावा यदि देखे तो अकेले नगर निगम क्षेत्र में रोजाना 10 से 15 लाशों का दाह संस्कार गोकुल नगर में किया जा रहा है।
मार्च से आज दिनांक तक कुल 297 शवों का अंतिम संस्कार गोकुल नगर में किया जा चूका है। यह संख्या केवल नगर निगम क्षेत्र के रहवासियों की है।
जिनकी मौत कोरोना संक्रमण में इलाज के दौरान हुई है।
निजी नर्सिंग होम, निजी हॉस्पिटल के अलावा जो लोग होम आइसोलेट होकर मृत हो रहे हैं उनकी गिनती प्रशासन शासकीय आकड़ो में नही ले रहे है।
जिले की बात करे तो कोरोना संक्रमितों की मौत ब्लॉक स्तर पर भी 2 से 3 लोगों की मौत हो रही है जिनका दाह संस्कार प्रोटोकॉल के अंतर्गत ग्राम स्तर पर किया जा रहा है, ये आंकड़े भी शासकीय आकड़ो में शामिल नहीं किये जा रहे है।
कुल मिलाकर पूरे जिले की बात करे तो 30 से 35 लोगों की मौत रोजाना कोरोना संक्रमित होकर इलाज के दौरान हो रही है।
शहर के गोकुल नगर में दाह संस्कार का जिम्मा नगर निगम के हाथों है, जो प्रोटोकॉल का पालन करते हुए निःशुल्क दाह संस्कार कर रहे है।
निगम द्वारा गोकुल नगर में निगम के समाज एवम परिवार कल्याण विभाग के भूपेंद्र वाडेकर, राज कुमार सिन्हा,नारायण सिन्हा के आलवा निगम द्वारा प्लेसमेंट में 15 युवाओं की टीम है, जो लगातार दिन- रात शवों का अंतिम संस्कार परिजनों के साथ मिलकर कर रहे है।
इसी कड़ी में से स्वास्थ्य विभाग के ग्रामीण स्वास्थ्य कार्यकर्ता प्रितेश सोनी लगातार प्रोटोकॉल का पालन करते हुए शवों को गोकुल नगर तक पहुँचाने का काम कर रहें । और लगातार मांनिटरिंग करते रहते है, की कोविड से मृत व्यक्ति का अंतिम संस्कार प्रोटोकॉल के अन्तर्गत हो रहा है कि नही।
कोरोना संक्रमित लोगों के शवों के दाह संस्कार के लिए क्षेत्रवासियों का लगातार विरोध भी देखने मिल रहा है, बावजूद क्षेत्र के पार्षद गगन आईच वार्डवासियों की बातों को नजर अंदाज करते हुए, इस नेक कार्य मे अपना पूरा योगदान दे रहे है, साथ ही वहां मौजूद निगम कर्मचारियों के अलावा शवों का दाह संस्कार करने वालों के जल- पान का पूरा ध्यान रख रहे है।
