खैरागढ़ । कोरोना महामारी ने शहर में बीते सालभर में 47 लोगों की जान ले ली हैं। वहीं इसी माह बीते केवल 24 दिनों में 35 लोगों ने संक्रमण से अपनी जान गंवाई हैं। यह आंकड़े बेहद दुखदायी है। रोजाना हो रही मौत की खबरों ने लोगों को विचलित किया हैं, पर बीते दो दिनों से अंचल में थोड़ी राहत मिली पर इन विषम स्थितियों में जब हम कोरोना के डर से अपने घरों से भी नहीं निकल रहे कुछ लोगों ने इस वैश्विक लड़ाई में एक मिसाल कायम की हैं। ऐसे ही मिसाल और दाद देने का काम पालिका कुछ सफाई कर्मचारी भी कर रहे हैं। जिन्हें हम भले ही न जानते हो और प्रोत्साहित न कर पाए, लेकिन कोरोना में अपनों की जान गंवाने वाले परिजन पालिका के इन पांच कर्मचारियों को कभी नहीं भूल पाएंगे। जिन्होंने वास्तव में कोरोना वारियर्स की समाज में भूमिका अदा की हैं और कर रहे हैं।
नगर में कोरोना से अकाल मृत परिजनों की मदद के लिए पालिका के पांच कर्मचारी निस्वार्थ भाव से परिवार के ही किसी सदस्य की तरह अपनी जान जोखिम में डालकर निरंतर सेवा दे रहे हैं। कोरोना संक्रमितों की मौत के बाद अंतिम संस्कार के लिए पालिका में पदस्थ प्रभारी सुपरवाइजर पंचलाल डग्गर के साथ सफाई कर्मी मुकेश सोनटक्के, दुर्गेश कुलदीप, आकाश शेन्द्रे व सोनू डग्गर अपनी अविस्मरणीय सेवाएं दे रहे हैं। इनमें मुकेश को छोड़कर शेष कर्मचारी परमानेंट भी नहीं और प्लेसमेंट में काम करने के बाद भी मिसाल पेश कर रहे हैं।
अब 47 लोगों का अंतिम संस्कार अब तक इन्होंने नगर में 47 लोगों का अंतिम संस्कार किया हैं। वहीं कोरोना की दूसरी लहर में एक अप्रैल से लेकर 24 अप्रैल तक इन्होंने 35 संक्रमित लाशों को परिवार के सदस्य की तरह ही मुक्तिधाम तक पहुंचाया है। मुखाग्नि देने से लेकर मृतकों के परिजनों को पूरी तरह सुरक्षित सैनिटाइज कर घर वापस भेजा हैं। यह वह समय हैं जब हम कोरोना से मृत अपने परिवार के सदस्यों का चेहरा तक नहीं देख पा रहे और कांधा भी नहीं दे पा रहे। लेकिन समाज में कहीं उपेक्षित रहे इन सफाई कर्मियों ने इस वैश्विक महामारी के विपरी व गंभीर समय में अपनी बड़ी भूमिका का निर्वहन किया हैं, जिन्हें समाज को सलाम करना चाहिए।
संक्रमितों के अंतिम संस्कार के लिए सामने आया मुस्लिम जमात कोरोना महामारी की दूसरी लहर ने खैरागढ़ में बीते महीनेभर से तबाही मचा रखी हैं। और कोरोना के प्रकोप से अब तक लगभग सभी वर्ग समुदाय के लोग चपेट में आए हैं। अकेले नगर में ही इस वैश्विक आपदा की चपेट में लगभग सौ से अधिक लोगों की मौत हो गई हैं। बेहद खतरनाक हो चुकी कोरोना की दूसरी लहर में मुस्लिम समाज को भी बड़ी हानि हुई हैं। बीते पांच दिन में अकेले नगर से ही चार सम्मानित नागरिकों की मौत हुई। जिनमें दो प्रतिभावान युवा और दो सम्मानित बुजुर्ग शामिल हैं। कोरोना से मौत होने के बाद संक्रमण से बचने शासकीय नियमों के तहत सभी मरहूम लोगों का कोरोना प्रोटोकाल के तहत सुपुर्द-ए-खाक किया जाता हैं, कब्र खोदने से लेकर सुपुर्द-ए-खाक की रस्म अदायगी में लगभग 10 से 12 लोग शामिल होते हैं और मरहूम को जन्नात अता फरमाने की नेक दुआओं के साथ अंतिम संस्कार किया जाता हैं।
