दुर्ग। जिला चिकित्सालय दुर्ग के मरच्यूरी का एक वीडियो बुधवार को वायरल हुआ। इस वीडियो में कोविड से जान गंवा चुके मृतकों के शव को दिखाया गया है। जो जिला अस्पताल के मरच्यूरी में बेतरतीब ढंग से रखे हुए हैं। वायरल वीडियो को जिला प्रशासन ने संज्ञान में लिया है।
प्रशासन ने आम नागरिकों से आग्रह किया है कि कोई भी वीडियो या फोटो सोशल मीडिया में साझा न करें, जिनसे लोगों में डर का वातावरण पैदा हो।
प्रशासन का कहना है कि जिला चिकित्सालय की मरच्यूरी में नजदीकी जिलों के मृतकों के शवों को भी लाये जा रहे हैं। इसकी वजह से शवों की संख्या हमेशा दुर्ग जिले में हो रही मौतों के अनुपात में अधिक होती है। हर दिन मृतकों के शवों को अंतिम संस्कार के लिए मुक्ति धाम में भेजा जाता है।
प्रशासन के मुताबिक इस तरह का वीडियो बनाने का उद्देश्य औचित्य से परे लगता है। इससे समाज मे भय का माहौल बनता है और इससे कोविड के विरुद्घ नागरिक समुदाय की लड़ाई कमजोर होती है। दुर्ग जिला कोविड संक्रमण की गंभीर स्थिति से गुजर रहा है। इस स्थिति का सामना करने संयम और संकल्प शक्ति की जरूरत है।
जिला प्रशासन नागरिकों से आग्रह करता है कि कोई भी तस्वीर या वीडियो पुष्टि के बगैर साझा न करें। ऐसे वीडिया,़ फोटो भी साझा न करें जिनसे लोगों में डर का वातावरण पैदा होता हो। संकट की इस घड़ी में सबको संबल बंधाने की जरूरत है। जिला प्रशासन द्वारा हर दिन अतिरिक्त आक्सीजन बेड की व्यवस्था की जा रही है। सामाजिक संगठनों द्वारा भी कोविड केयर सेंटर आरंभ किए गए हैं इनमें आक्सीजन बेड की सुविधा भी दी जा रही है।
पहले भी निर्मित हो चुकी है ऐसी स्थिति जिला अस्पताल के मरच्यूरी में बुधवार को करीब 25 से अधिक मृतकों का शव रखा हुआ था। दरअसल यहां आठ फ्रीजर हैं। लेकिन कोरोना से रोजाना जिले में ही औसत छह से सात मौत हो रही है। कोरोना से मृत लोगों का शव सुपुर्दनामा में नहीं दिया जाता लेकिन अंतिम संस्कार के लिए ले जाने की प्रक्रिया भी काफी जटिल है। इस कारण शवों का निराकरण रोजाना नहीं हो पा रहा है।
कोरोना से होने वाली मौत के मामलों में शवों को अंतिम संस्कार के लिए शासन की मुक्तांजलि वाहन में ही लेकर जाना है। जिले में वाहनों की संख्या कम है। मुक्तांजति वाहन कभी रामनगर तो कभी शिवनाथ मुक्तिधाम शवों को अंतिम संस्कार के लिए लेकर जाती है।
इस वजह से भी मरच्यूरी में रखे जाने वाले शवों की संख्या को अधिक होना बताया जा रहा है। जिला अस्पताल दुर्ग के सिविल सर्जन पी बालकिशोर ने बताया कि कोरोना से मृतकों के शवों का अंतिम संस्कार जल्द से जल्द कराया जा सके इस दिशा में प्रयास किया जा रहा है। लेकिन प्रक्रिया लंबी होने की वजह से इसमें समय लग रहा है। इसके कुछ दिनों पहले भी जिला अस्पताल के मरच्यूरी में शवों को रखने के लिए जगह नहीं थी।
