राजनांदगांव । एससीईआरटी द्वारा जिले में सरकारी स्कूलों के बच्चों को एजुसेट के माध्यम से आनलाइन पढ़ाने की योजना थी, लेकिन मेंटेनेंस के अभाव ने प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने का सपना तोड़ दिया। जिले में वर्ष 2002-03 में योजना की शुरुआत हुई थी, जो 2012 के बाद से बंद है। इसके माध्यम से पीएमटी, पीईटी, पीएटी सहित अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करवाई जा रही थी, लेकिन अब बंद होने से बच्चे अन्य जगह कोचिंग करने को मजबूर हो गए हैं।
पीएमटी, पीईटी, पीएटी सहित अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कराने के लएि जिले के छह स्कूलों में एजुसेट लगाया गया था। वर्तमान में सभी स्कूलों के एजुसेट खराब हो चुके हैं। बताया गया है कि एजुसेट की मरम्मत में लाखों रुपये खर्च होंगे, जिसके चलते एजुसेट को बंद कर दिया गया है। बता दें कि एजुसेट से विषय बच्चों को आनलाइन प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कराते थे। साथ ही उनके कंफ्यूजन को दूर करते थे। शहर के स्टेट हाई स्कूल, महारानी लक्ष्मी बाई स्कूल, बल्देव प्रसाद स्कूल, खैरागढ़, डोंगरगढ़, डोंगरगांव में एजुसेट लगाया गया था। एजुसेट का संचालन शिक्षा विभाग द्वारा किया जा रहा था। लेकिन बार-बार खराबी आने के कारण एजुसेट उसे बंद कर दिया गया। एक एजुसेट की कीमत करीब ढाई लाख रुपये है। इसे सुधरवाने में हर बार पांच से छह हजार रुपये खर्च हो रहे थे।
शुरुआत के दिनों में सभी स्कूलों में यह चला फिर एक डेढ़ साल में ही एजुसेट का सिस्टम खराब होने लगा। कई स्कूलों का प्रोजेक्टर फट गया, कैमरे के लेंस खराब हो गए। सेटेलाइट से कनेक्टिविटी के लिए लगाया गया डिश एंटीना टूट गया ऐसे तमाम कारण हैं जिससे योजना ने दम तोड़ दिया।
राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद एससीईआरटी की एजुसेट योजना में मिले प्रोजेक्टर का कलर उड़ गया है। सामान को कबाड़ की तरह रखा है। प्राचार्य ने सिस्टम के मेंटेनेंस करवाने कई बार कंप्लेन दर्ज करवाई, लेकिन किसी ने एक नहीं सुनी।
सरकारी स्कूलों में फिजिक्स केमिस्ट्री और मैथ्स के शिक्षकों की कमी के चलते में आठ साल पहले 2008 में सिस्टम को डेवलप किया गया था 282 स्कूलों के एक विशेष कमरे को हाईटेक कोचिंग रूप में तब्दील किया गया। वहां प्रोजेक्टर कंप्यूटर और इंटरनेट सुविधा दी गई। एजुसेट आपरेशन की जिम्मेदारी किसी एक शिक्षक को नहीं दी गई, बार-बार शिक्षक बदलते रहे थे, सिस्टम की बारीकियों के बारे में उन्हें पता नहीं रहा। समय रहते जिम्मेदारी देते तो यह हालात नहीं होते। सिस्टम जल्द खराब हो गए। बिना प्लानिंग शुरू की गई योजना के तहत शिक्षकों को सिर्फ ट्रेनिंग दी गई, उसके बाद उन्हें शेड्यूल तक नहीं बताया गया। एजुकेशन सिस्टम के लिए जो इक्विपमेंट्स लगाए गए थे उनकी क्वालिटी को लेकर सवाल उठाए गए। ज्यादातर स्कूलों के बच्चों ने सीधे डीपीआइ और एससीईआरटी से इसकी शिकायत की।
वर्जन
एजुसेट से पढ़ाई होती थी, परंतु बार बार खराबी होने के कारण इसे सुधारा नहीं जा सका। इनका सामान काफी महंगे होने के कारण रायपुर से बंद हो गए। एसआर सोम, जिला शिक्षा अधिकारी राजनांदगांव
