तत्पश्चात खेतों में पानी लगभग 24 घंटे तक रोककर रखें। पोटाश की शेष 25 प्रतिशत मात्रा रोपाई के 25-30 दिनों के बाद छिड़काव करें। धान में शीथ ब्लाइट रोग के लक्षण दिखाई दे, तो हेक्साकोनाजोल नामक कवकनाशी 1 ग्राम प्रति लीटर के हिसाब से छिड़काव करें।
जिन स्थानों पर सोयाबीन की फसल में गर्डल बीटल (चक्र भृग) का प्रकोप शुरू हो गया हो, वहां पर थाइक्लोपीड 21.7 एससी 750 मिली प्रति हेक्टेयर की दर से छिड़काव करें। सोयाबीन की फसल में पत्ती खाने वाली इल्लियों तथा सफेद मक्खी के नियंत्रण हेतु पूर्व मिश्रित कीटनाशक बीटासायफ्लुथ्रीन इमिडाक्लोपीड 350 मिली प्रति हेक्टेयर अथवा थायमिथाक्सम-लेम्बडा सायहेलोथ्रीन 125 मिली प्रति हेक्टेयर की दर से छिड़काव करें। इस उपाय से तना मक्खी का भी नियंत्रण होगा। अरहर की फसल में तना अंगमारी (स्टेम ब्लाइट) रोग प्रकोप की प्रारंभिक अवस्था में ताम्रयुक्त कवकनाशी (2.5 ग्राम प्रति लीटर पानी) या मेटालेक्सिल एमजेड (1.5 ग्राम प्रति लीटर पानी) का छिड़काव 10-12 दिन के अंतर में, दो-तीन बार उपयोग करने से रोग की रोकथाम की जा सकती है। मूंग व उड़द की फसल में भभूतिया रोग (पाउडरी मिल्ड्यू) के लक्षण दिखाई देने पर घुलनशील गंधक (सल्फेट एवं अन्य सामान उत्पाद) 3 ग्राम प्रति लीटर पानी की दर से घोल बनाकर छिड़काव करें। पौधों को सफेद मक्खी के आक्रमण से बचाने के लिए इमिडाक्लोप्रीड (कोंफीडोर एवं अन्य सामान उत्पाद) 0.5 मिली प्रति लीटर कीटनाशक का छिड़काव करें। मौसम पुर्वानुमान के अनुसार आने वाले दिनों में मध्यम वर्षा होने की संभावना है। किसान को मूंग व उड़द फसल में अतिरिक्त जल निकासी की व्यवस्था करने की सलाह दी गई है।
