राजनांदगांव । शहर में चारों तरफ सड़कों पर डेरा जमाए बैठे बेसहारा मवेशियों को पकड़ने के नाम पर नगर निगम में बड़ा खेल चल रहा है। इसके चलते आर्थिक तंगी से जूझ रहे नगर निगम को 10 माह में करीब 18 लाख रुपये का झटका लगा है। दरअसल, शासन ने सफाई कमांडो के रूप में पहले से ही 20 लोगों को सेवा में रखने की अनुमति दे रखी है। इसके अतिरिक्त 20 ऐसे लोगों को अलग से कागजों पर ठेका श्रमिक के रूप में रख लिया गया है, जिन्हें मवेशी पकड़ने वाली टीम का हिस्सा बताकर हर माह करीब 1.80 लाख रुपये भुगतान किया जा रहा है।
बारिश के पहले से ही शहर में मवेशी पकड़ने वाला दैनिक अभियान अघोषित तौर पर बंद है। काम की अधिकता दिखाने के लिए सफाई कमांडो को पौधारोपण अभियान से भी जोड़ दिया गया। यानी काम 20 ही श्रमिक कर रहे हैं, लेकिन निगम से भुगतान हर माह 40 ठेका श्रमिकों के नाम से निकाला जा रहा है।
प्लेसमेंट एजेंसियों के माध्यम से नगर निगम 363 श्रमिकों की सेवां पहले से ही ले रहा है। श्रम न्यायालय से प्रकरण जीतकर 48 लोगों की सेवा में वापसी के बाद इतने ठेका श्रमिक कम करने थे। वो तो नहीं किया, उल्टा शासन से 20 सफाई कमांडो के विरुद्ध 40 श्रमिक और रख लिए गए। शासन की अनुमति के बगैर 20 अतिरिक्त ठेका श्रमिक जून 2020 से कागजों पर काम कर रहे हैं। एक श्रमिक को औसतन नौ हजार रुपये मासिक भुगतान किया जा रहा है। ठेका श्रमिक एजेंसी को सक्षम अधिकारियों के संरक्षण में हर माह नियमित भुगतान कर दिया जा रहा है, जबकि निगम के नियमित कर्मचारियों दो माह से वेतन के लिए इंतजार करना पड़ रहा है। ।
एक नाम से कई को भुगतान
बताया गया है कि अतिरिक्त कर्मचारियों को सफाई कमांडो, मवेशी पकड़ो अभियान, पौधारोपण जैसे कामों में लगाना बताकर भुगतान लिया जा रहा है। एक नाम से कई को भुगतान किया जा रहा है। इस बीच शहर की सड़कों में बेसहारा मवेशियों का जमावड़ा तब भी उतना ही था, जितना इन श्रमिकों को रखे जाने के पहले था।
वर्जन
मैं अभी-अभी आया हूं। इस कारण इस तरह की कोई जानकारी फिलहाल मुझे नहीं है। वस्तुस्थिति का पता लगवाता हूं। गलत किया जा रहा तो उसे न केवल रोका जाएगा, बल्कि संबंधित के खिलाफ कार्रवाई भी की जाएगी। – आशुतोष चतुर्वेदीनगर निगम आयुक्त
