दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे पर एक अप्रैल से वाहन फर्राटा भर सकेंगे। एक्सप्रेसवे पर लूप, अंडरपास और मुख्य सड़क पर डिवाइडर बनाने का काम तेजी से चल रहा है। मुख्य निर्माण कार्य अंतिम दौर में पहुंचने के बाद अब नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एनएचएआई) ने एक्सप्रेसवे को यातायात के लिए खोले की मंजूरी के लिए फाइल सड़क एवं परिवहन मंत्रालय को बढ़ा दी है। अथॉरिटी ने विधिवत रूप से एक अप्रैल से एक्सप्रेसवे को खोलने का समय मांगा है।
एनएचएआई ने लिखा है कि अगर मंत्रालय चाहे तो 27 मार्च के बाद भी एक्सप्रेसवे को यातायात के लिए खोला जा सकता है। क्योंकि एक्सप्रेसवे से जुड़े सभी कार्य होली से पूर्व पूरे कर लिए जाएंगे। ऐसे में होली पर भी एक्सप्रेसवे खोले जाने की संभावना है। मौजूदा वक्त में एक्सप्रेसवे के दूसरे और चौथे चरण में निर्माण कार्य चल रहा है। दूसरे चरण में यूपी गेट से डासना के बीच एबीईएस अंडरपास और लालकुआं लूप की एक साइड बंद है। बाकी सभी अंडरपास खोल दिए गए हैं। महरौली गांव में सर्विस रोड बनाने का काम अंतिम दौर में है।
एबीईएस अंडरपास 27 मार्च तक खोलने का लक्ष्य है, जबकि लालकुआं लूप पर बुलंदशहर से दिल्ली की तरफ से चढ़ने वाली लेन भी 20 मार्च तक खोल दी जाएगी। बाकी इस चरण में एक्सप्रेसवे की छह लेन को रिजर्व करने के (डिवाइडर) लगाने के काम भी अगले दो दिन में पूरा हो जाएगा। सर्विस रोड भी 25 मार्च तक अंतिम रूप से तैयार हो जाएगी।
डासना से मेरठ के बीच अंतिम ट्रायल शुरू
चौथे चरण में डासना से मेरठ के बीच 32 किमी का छह लेन एक्सप्रेसवे तैयार किया गया है। इसमें डासना से ईस्टर्न पेरिफेरल लूप के बीच रेलवे लाइन के ऊपर 700 मीटर की एलिवेटेड रोड पर लोड टेस्टिंग का काम शुरू हो गया है, जो अगले पांच से सात दिनों में पूरा हो जाएगा। इसके साथ ही ईस्टर्न पेरिफेरल पर बनाए गए लूप पर टोल बूथ बनाने का काम भी एक सप्ताह में पूरा करने का लक्ष्य है। उधर, मेरठ में परतापुर लूप पर भी एप्रोच रोड और टोल बूथ बनाने का काम अंतिम चरण में है।
चौथे चरण में नहीं होगी प्रकाश की व्यवस्था
एक्सप्रेसवे के चौथे चरण यानी डासना से मेरठ के बीच प्रकाश की व्यवस्था नहीं होगी। एनएचएआई का कहना है कि चौथा चरण ग्रीन एक्सप्रेसवे है, जिसके नियमों के हिसाब से स्ट्रीट लाइट नहीं लगाई जाती है। इसलिए टेंडर में भी स्ट्रीट लाइट को शामिल नहीं किया गया था। इस चरण में सिर्फ लूप और टोल बूथ के ऊपर ही प्रकाश की व्यवस्था होगी। हालांकि ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे भी ग्रीन एक्सप्रेसवे है और उसमें सभी जगहों पर सोलर एनर्जी के माध्यम से प्रकाश की व्यवस्था की गई है, लेकिन दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे के चौथे चरण में अंधेरी सड़कों पर चलना होगा।
एनएचएआई को टोल दरों का भी इंतजार
एक्सप्रेसवे पर टोल वसूले जाने को लेकर एनएचएआई पहले ही मंत्रालय को प्रस्ताव भेज चुकी है, जिसे मंजूरी मिलने का इंतजार है। उम्मीद जताई जा रही है कि 25 मार्च तक मंत्रालय टोल दरों को भी स्वीकृति दे सकता है। एनएचएआई ने दिल्ली से मेरठ के बीच 110 से 135 रुपये टोल रखे जाने का प्रस्ताव दिया था, जिसमें कुछ संशोधन के साथ मंजूरी मिलने की संभावना है। इसमें प्रति किमी डेढ़ रुपये से दो रुपये तक वसूले जाने का प्रस्ताव है।
अलीगढ़ रेल लाइन पर आरओबी बनने में लगेगा समय
एनएचएआई भले ही पूरा एक्सप्रेसवे खोल दे, लेकिन अभी दूसरे चरण में एबीईएस कट से लालकुआं के बीच करीब 700 मीटर का हिस्सा तैयार होने में वक्त लगेगा। इस हिस्से से अलीगढ़ रेल लाइन गुजरती है, जिसके ऊपर अभी दो-दो लेन के दो आरओबी (रेलवे ओवर ब्रिज) संचालित है, लेकिन 14 लेन का एक्सप्रेसवे बनाने के लिए पुराने दोनों आरओबी की दोनों तरफ पांच-पांच लेन के दो नए आरओबी बनाए जा रहे हैं। इसमें एबीईएस कॉलेज की तरफ पांच लेन का आरओबी जुलाई तक जाकर तैयार होगा। जबकि इंडस्ट्रियल एरिया की तरफ का फरवरी 2020 तक जाकर तैयार होगा।
एक्सप्रेसवे का काम अंतिम दौर में है। सभी लूप, अंडरपास अगले एक सप्ताह में तैयार कर खोल दिए जाएंगे। चौथे चरण में 700 मीटर की एलिवेटेड रोड भी 25 मार्च तक तैयार हो जाएगी। ऐसे में हमारी तैयारी एक अप्रैल से एक्सप्रेसवे को यातायात के लिए खोलने की है। इसी को लेकर मंत्रालय से समय भी मांगा गया है।
- मुदित गर्ग, परियोजना निदेशक, डीएमई
