Aadhar Card New Update: यह आधार कार्ड आज के समय में तो भारत के हर नागरिक के लिए सबसे सबसे महत्वपूर्ण ही दस्तावेज बन गया है।जिसमे यह न सिर्फ एक पहचान पत्र है बल्कि यह सरकारी और निजी सेवाओं का लाभ उठाने के लिए एक अनिवार्य जरूरत भी बन गया है। जिसमे यह बैंकिंग सेवाओं से लेकर के यह मोबाइल कनेक्शन, सरकारी योजनाओं का लाभ और यह आयकर रिटर्न भरने और यह राशन वितरण और अन्य सभी सरकारी कार्यों के लिए आधार की जरूरत होती है. लेकिन इसमें यह महत्वपूर्ण दस्तावेज के साथ में भी कई लोग इसमें लापरवाही को बरतते हैं और इसमें भी गलत जानकारी को भरते हैं या इसका दुरुपयोग करते हैं।
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आधार में मिथ्या जानकारी देना कानूनी अपराध
यह भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण यूआईडीएआई के द्वारा जारी किये गये नियमों के अनुसार से यह आधार पंजीकरण के दौरान में झूठी या गलत जानकारी को प्रदान करना एक दंडनीय अपराध है। जो की यह जब कोई व्यक्ति जानबूझकर के यह अपना गलत नाम, पूरा पता, जन्म तिथि, संपर्क नंबर या अन्य व्यक्तिगत विवरण दर्ज कराता है तो यह कानून का उल्लंघन करता है।जिसमे उसके अतिरिक्त यदि कोई व्यक्ति दूसरे की पहचान का गलत उपयोग करके आधार बनवाने का प्रयास करता है या तो फिर यह नकली दस्तावेजों का सहारा लेता है तो यह और भी गंभीर मामला बन जाता है। जिसमे यह विशेष रूप से जब किसी का आधार नंबर या बायोमेट्रिक डेटा चुराकर के यह उसका दुरुपयोग किया जाता है तो यह साइबर अपराध की श्रेणी में आ जाता है। जिसमे फिर ऐसे सभी मामलों में यूआईडीएआई कड़ी कानूनी कार्रवाई करने का अधिकार रखता है।
आधार अधिनियम 2016 के तहत दंड प्रावधान
यह आधार अधिनियम में 2016 आधार के दुरुपयोग से संबंधित विभिन्न अपराधों के लिए स्पष्ट दंड का भी इसमें यह प्रावधान को किया गया है। जिसमे यह धारा 38 के अनुसार यदि कोई भी यह व्यक्ति जानबूझकर किसी और के यह आधार का दुरुपयोग को करता है या यह धोखाधड़ी की नीयत से भी उसकी गलत जानकारी को प्रदान करता है तो उसको यह10,000 रुपये से लेकर 1,00,000 रुपये तक का आर्थिक दंड और तीन वर्ष तक का कारावास भी हो सकता है। जिसमे यह धारा 39 के तहत यदि कोई भी व्यक्ति बिना किसी अनुमति के किसी की आधार संबंधी जानकारी एकत्रित करता है या तो उसे अन्य व्यक्तियों के साथ साझा करता है तो उसे भी तीन वर्ष की जेल और जुर्माने की सजा हो सकती है।
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