सार
-आर्थिक सर्वे से मिली जानकारी, पांच साल में पहली बार वृद्धि दर में इजाफा
-31 मार्च 2020 तक दिल्ली में वाहनों की संख्या 118.95 लाख है
विस्तार
वाहनों से निकलने वाला धुंआ दिल्ली की आबोहवा का खराब कर रहा है, लेकिन दिल्ली निजी वाहनों की हब बनी हुई है। निजी वाहनों की संख्या दिल्ली में चलने वाले कुल वाहनों का करीब 94.78 फीसदी बैठती है। इसका जिक्र आर्थिक सर्वेक्षण 2019-20 में है। उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने सोमवार को इसे दिल्ली विधान सभा में पेश किया।
आर्थिक सर्वेक्षण से पता चलता है कि 2015-16 के बाद पहली बार 2019-20 में वाहनों की वृद्धि दर में इजाफा हुआ है। बीते पंद्रह सालों में 2015-16 में वाहनों की वृद्धि दर सबसे ज्यादा 9.94 दर्ज की गई थी। इसके बाद इसमें लगातार गिरावट आई। 2018-19 में आंकड़ा 3.69 फीसदी पहुंच गया था, लेकिन अगले साल यह फिर से बढ़कर 4.40 फीसदी पहुंच गया है।
दूसरी तरफ प्रति एक हजार की आबादी पर दिल्ली में करीब 643 वाहन हैं। एक साल पहले यह आंकड़ा 616 का था। बीते पंद्रह सालों में यह संख्या दो गुनी हो गई है। 2005-06 में प्रति हजार की आबादी पर 317 थी।
आंकड़े बताते हैं कि 31 मार्च 2020 तक दिल्ली में वाहनों की संख्या 118.95 लाख है। इसमें 66.93 फीसदी दोपहिया और 27.85 फीसदी कार व जीप है। निजी वाहनों का आंकड़ा 95 फीसदी के करीब पहुंच गया है। हालांकि, पिछले साल की तुलना में इस साल कार व जीप की कुल खरीद में बढ़ोत्तरी होने के बावजूद कुल वाहनों में इसका प्रतिशत कम हुआ है। आर्थिक सर्वे में भी जिक्र है कि दिल्ली निजी वाहनों के लिए हब बनी हुई है।
रिपोर्ट के मुताबिक, दिल्ली में रजिस्टर्ड वाहन व दिल्ली की सड़कों वाले वाहनों की संख्या में फर्क है। वजह यह कि बड़ी संख्या में दिल्ली में रजिस्ट्रर्ड वाहन एनसीआर में चलते हैं। जबकि एनसीआर के शहरों के रजिस्ट्रर्ड वाहन दिल्ली में चलते हैं। परिवहन विभाग इस दिशा में काम कर रहा है। इसके बाद दिल्ली की सड़कों पर चलने वाले वाहनों की वास्तिवक संख्या पता चल सकेगी। इससे योजना तैयार करने में मदद मिलेगी।
