वो नारी है…
पैदा होते ही जिम्मेदारियों का बोझ उठा ले
होश सम्भालते ही भाई बहनों की मां बन जाये
बड़े होते ही परिवार और समाज का सम्मान बचाये
वो नारी है…
बरसो से जिस घर मे खेले कूदे चहचहाये
एक पल में उस घर से हो जाये पराये
नये घर को पुराने घर से ज्यादा अधिक सँवारे
वो नारी है…
जन्म देने वाले मां-बाप को छोड़कर
सौंपे गए नये मां-बाप का सम्मान करें
भाई बहन को भूलकर ननद देवर का ख्याल रखे
वो नारी है…
जो पति के रूप में अपने पापा की परछाई ढूंढे
अपनी हर एक खुशी अरमान पति में ढूंढे
सबकी खुशियों का ध्यान रखकर खुद एक खुशी को तरसे
वो नारी है…
दुनिया व अपनो की डांट फटकार सुने
उनका अपना कोई एक बात ना सुने
इतना दर्द सहकर भी आँख ना भरे
वो नारी है…
सुबह से उठ कर सबके पसंद का ख्याल रखे
सबको ताजा गर्म खाना खिलाये
और खुद बासी ठंठा खाना खाये
वो नारी है…
नौ महीनों तक अपने कोख का ध्यान रखे
दर्द सहकर पल पल उस जींव को सींचे
अपना जीवन दाँव लगाकर उस बच्चे को जीवन दे
वो नारी है…
अतिश (दक्ष)
संस्कारधानी, राजनांदगांव
