सार
उपचुनाव में दिखाया तीनों दलों का आइना, रणनीतिक स्तर पर रखनी पड़ेगी चुस्ती, तभी मिलेगी एमसडी की सत्ता
आप को बढ़त बनाए रखने की चुनौती, भाजपा को नए सिरे से करनी होगी तैयारी, कांग्रेस की डगर भी नहीं आसान
विस्तार
बेशक दिल्ली के 272 वार्ड में से सिर्फ पांच वार्ड में उपचुनाव हुए हैं, लेकिन एमसीडी आम चुनाव के करीब एक साल पहले आए नतीजों ने दिल्ली की सियासत में हलचल पैदा की है। इसे दिल्ली की जनता का मूड माना जा रहा है। इस मामले में बढ़त पर आम आदमी पार्टी है जबकि कांंग्रेस भी एक सीट जीतकर वापसी की उम्मीद कर रही है। दूसरी तरफ आने वाला एक साल सबसे बड़ी चुनौती भाजपा के लिए लेकर आया है। तीनों दलों के लिए उपचुनाव के अपने संदेश हैं।
आप को बढ़त, बनाए रखनी होगी ऊर्जा
उपचुनाव में आप ने कांग्रेस व भाजपा पर बढ़त हासिल की है। अगले साल होने वाले एमसीडी के आम चुनाव के लिए अगर इसे सियासी संकेत माना जाए तो सिविक सेंटर की तरफ जाने वाला आप का रास्ता अब ज्यादा चौड़ा हो गया है। आप रणनीतिकारों को उम्मीद है कि दिल्ली सरकार के काम के भरोसे निगम की सत्ता हासिल की जा सकती है।
भाजपा के गढ़ माने जाने वाले शालीमार बाग के कब्जे में आने का आप नेता अपनी कामयाबी के तौर पर देख रहे हैं। इसे भाजपा के कैडर वोट में सेंध माना जा रहा है। हालांकि, चौहान बांगड़ में कांग्रेस का उभार आप की चिंता भी बढ़ा रहा है। पार्टी के रणनीतिकार मानते हैं कि अगले एक साल तक बेहद संजीदगी से काम करना पड़ेगा। खासतौर से शीर्ष नेतृत्व को पार्टी पदाधिकारी व कार्यकर्र्ताओं को जमीन पर एक साल तक एक्टिव रखना पड़ेगा।
उपचुनाव में जिन पांच सीटों पर चुनाव हुए उसमें से एमसीडी 2017 आम चुनाव में आप को तीन सीटें मिली थी। बाद में रोहिणी सी के बीएसपी से पार्षद जयभगवान आप में शामिल हो गए थे। इस लिहाज से आप के पास चार और भाजपा के पास एक सीट थी। उपचुनाव में आप अपने चार के आंकड़े को बनाए रखने में कामयाब रही है। इसमें से एक सीट शालीमार बाग की भी है, जहां भाजपा को कोर वोटर ज्यादा है। दूसरी तरफ मुसलिम बहुल चौहान बांगड़ सीट को आप ने गवां दिया है। आप रणनीतिकार उपचुनाव की कामयाबी का जश्न मनाने के साथ चौहान बांगड़ सीट हारने की वजह भी तलाश रहे हैं।
एक वरिष्ठ पदाधिकारी ने बताया कि पार्टी उपचुनाव को सेमीफाइलन मान रही है। इस लिहाज से चौहान बांगड़ के प्रदर्शन में जो भी खामियां मिलेंगी, उसकी भरपाई करने की तत्काल कोशिश होगी। पार्टी की कोशिश होगी कि किसी भी स्तर पर 2022 का मुकाबला त्रिकोणीय न होने पाए। इसकी जगह पर टक्कर आमने-सामने की रहे। इसके लिए आप को भाजपा के कोर वोटर में पैठ बढ़ाने की दिशा में काम करना पड़ेगा।
