बिलासपुर। छह साल पहले पेंडारी में हुए नसबंदी कांड की बुधवार को एक बार फिर विधानसभा में मामला उठा। शहर विधायक शैलेष पांडेय ने यह मामला उठाया। उनके सवालों का स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव ने जवाब दिया। विधायक ने पूछा कि इस मामले में कितनी महिलाओं की मौत हुई थी और उनकी मौत का कारण क्या था। वहीं सरकार द्वारा क्या कार्रवाई की गई और जांच में क्या तथ्य सामने आए हैं।
स्वास्थ्य मंत्री ने सवालों का जवाब देते हुए कहा कि जिले के ग्राम पेंडारी में नसबंदी शिविर आठ नवंबर 2014 को लगाया गया था। उक्त शिविर में नसबंदी के बाद 12 महिलाओं की मृत्यु हो गई थी। प्रकरण न्यायालय बिलासपुर में विचाराधीन है। कारण स्पष्ट किया जाना संभव नहीं है।
वर्तमान में प्रकरण न्यायालय में विचाराधीन है। शिविर में लापरवाही बरतने के आरोप में तत्कालीन मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी बिलासपुर डा. आरके भांगे, एलटीटी सर्जन डा. आरके गुप्ता, जिला चिकित्सालय बिलासपुर को सेवा से बर्खास्त किया गया था।
खंड चिकित्सा अधिकारी डा. प्रमोद कुमार तिवारी, राज्य कार्यक्रम अधिकारी परिवार कल्याण डा. केसी उरांव को निलंबित किया गया था। खाद्य एवं औषधि प्रशासन द्वारा औषधि निर्माता मेसर्स महावर फार्मा खम्हारडीह रायपुर की औषधि अनुज्ञप्ति को निरस्त किया गया था।
इसके अलावा फर्म मेसर्स महावर फार्मा प्राइवेट लिमिटेड खम्हारडीह रायपुर के संचालक रमेश महावर व सुमीत महावर के विरुद्ध थाना पंडरी रायपुर में उपरोक्त घटना के संबंध में प्रथम सूचना दी गई। वहीं महावर फार्मा प्राइवेट लिमिटेड के डायरेक्टर रमेश महावर, मेसर्स कविता लैबोटरीज तिफरा बिलासपुर के भागीदार राकेश खरे व राजेश खरे के विरुद्ध औषधि निरीक्षक बिलासपुर द्वारा प्रकरण जिला एवं सत्र न्यायालय बिलासपुर में औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम की धाराओं के तहत परिवाद प्रस्तुत किया गया है।
