राजनांदगांव 12 जुलाई 2009…। मदनवाड़ा-कोरकोट्टी। नक्सलियों का बड़ा एंबुश। एसपी व्हीके चौबे और 29 जवान शहीद। इसके बाद क्षेत्र में नक्सल दहशत और तांडव चरम पर हो गया। नक्सलियों ने इस हमले के बाद मानपुर-मोहला क्षेत्र में अपनी मजबूत पैठ साबित की। लेकिन 15 साल बाद इस हिस्से में शांति बहाल हो गई है।
नक्सलवाद नाम मात्र रह गया है। जो नक्सली इलाके में सक्रिय हैं। वे भी छिप-छिपकर जान बचा रहें। 12 जुलाई को मदनवाड़ा हमले की 15वी बरसी है। लेकिन इस 15 साल में मदनवाड़ा सहित आसपास का पूरा क्षेत्र नक्सलियों के चंगुल से बाहर निकल चुका है। नक्सलियों के दहशत के बीच जीवन-यापन करने वाले ग्रामीण अब बेखौफ होकर जीवन जी रहें। युवा शिक्षा, कॅरियर और स्पोर्ट्स सहित पुलिस और आर्मी की भर्तियों की तैयारी में जुटे हैं। मदनवाड़ा हमले के बाद पुलिस ने भी इलाके में ऑपरेशन तेज किया। कई कैंप खोल गए। अति नक्सल प्रभावित गांवों में फोर्स ने दखल बढ़ाई। इसी का नतीजा है कि अब इन हिस्सों में नक्सलवाद अपनी अंतिम सांसें गिर रहा है। रिकार्ड में तो एक या दो नक्सल संगठन अब भी मौजूद है। लेकिन इसके सदस्य अब क्षेत्र से पलायन कर चुके हैं।
तैनाती बढ़ी, 89 मुठभेड़ हुईं बड़े दलम का हुआ सफाया मदनवाड़ा हमले के बाद फोर्स की बड़ी तैनाती मोहला मानपुर इलाके में होने लगी। 2009 के बाद से अब तक इन हिस्सों में 89 मुठभेड़ हो चुकी है। जिसमें 33 हार्डकोर नक्सलियों का एनकाउंटर किया गया है। पुलिस ने इलाके के में सक्रिय रहे पल्लेमाड़ी एरिया कमेटी, मोहला एरिया कमेटी, केकेडी एरिया कमेटी और कंपनी नंबर 4 का पूरी तरह सफाया कर दिया है। चार संगठन रिकार्ड में खत्म हो गए हैं। वहीं इन दलों में सक्रिय रहे 47 नक्सलियों ने भी इन 15 साल में सरेंडर किया है। अब क्षेत्र में अमन शांति बढ़ रही है।
कॉरिडोर में बनते गए कैंप लोगों को किया जागरुक फोर्स ने मानपुर-मोहला इलाके में उन हिस्सों में भी कैंप बनाए, जो कभी नक्सलियों कॉिरडोर हुआ करता था। माड़ से लेकर मानपुर तक इन कारीडोर से नक्सली सुरक्षित ढंग से आवाजाही करते। इन्हीं कारीडोर के भरोसे वारदात कर लौट जाते थे। लेकिन फोर्स ने इन हिस्सों में 15 साल में 12 से अधिक छोटे-बड़े बेस कैंप बनाए। जिसके बाद अति संवदेनशील हिस्सों में ऑपरेशन शुरु किया गया। इसके अलावा ग्रामीणों और युवाओं को जागरुक कर नक्सल विचारधारा से दूर किया गया। साथ ही लोगों को जोड़ा गया।
