राजनांदगांव। भारतीय सनातन संस्कृति के अनुपम एंव अद्वितीय वंसत पंचमी पर्व के महत्तम अवसर पर नगर के विचार प्रज्ञ प्राध्यापक कृष्ण कुमार द्विवेदी ने समसामपिक चिन्तन आह्वान टीप में बताया कि मूलत: वंसत पंचमी माँ सरस्वती पूजन के साथ-साथ प्रकृति-संस्कृति के संरक्षण एंव सवर्धन का उत्सव पर्व है।
सहज सरल ज्ञान सरस सम्मोहक संगीत की वीणा वादिनी, ज्ञान दापिनी, हंस वाहनी माँ सरस्वती के वंदन-नमन के शुभ अवसर के साथ-साथ सर्व ज्ञन को प्रकृति अनुकूलित जीवन शैली अपनाने मनोरम प्राकृतिक पर्यावरण को अधिकाधिक फल -फूलो से पेड़ – पौधो बेल लताओ से आच्छादित रखने तथा गौरवशाली गीत – संगीत की परंपराओ को जीवंत बनाने की भी अद्भुत प्रेरणा भी देता है। आगे प्राध्यापक द्विवेदी ने विशेष जोर देकर स्पष्ट किया कि नित्य जीवन क्रम हर्ष उल्लास क लिये वंसत पर्व के मूल संदेश नव उमंग के साथ ठेठ रचनात्मक सात्विक प्रवृत्तियों को धारण कर, पीतवसन, केशर भात खाये और खिलायें और आनंद संगीत मय जीवन जीने की परम पावन प्रेरणा ले। आइये सर्व मंगल की कामना का पर्व वंसत पंचमी को सत्य सनातन परम्परानुसार मन-प्राण से मनाये, देश-धरती के हर घर-आंगन में वंसत के श्रेष्ठ प्रतीक फल-फूल वृक्षों को लहरायें। श्रेष्ठ पढ़े-सर्वश्रेष्ठ लेखन-वाचन-गायन करने हेतु सतसंकल्पित हों।
