राजनांदगांव शहर में बिजली आपूर्ति की खराब स्थिति से लोग परेशान हैं। उस पर किसी मेजर तकनीकी खराबी में भी लोगों को घंटों इंतजार करना पड़ रहा है। इससे परेशानी दोगुनी हो रही। मरम्मत के लिए 4-4 घंटे का इंतजार करना पड़ रहा है। इसकी बड़ी वजह कंपनी में मेंटेनेंस कर्मचारियों की कमी है। राजनांदगांव डिविजन को दो जोन में बांटा गया है। इसमें कुल 60 हजार बिजली कनेक्शन है लेकिन दोनों जोन में मेंटेनेंस के लिए महज 12 ही नियमित कर्मचारी हैं। इस लिहाज से एक जोन में 6 कर्मचारियों के भरोसे ही मरम्मत कार्य हो रहा। गंभीर बात यह है कि अंधड़ बारिश की स्थिति में दोनों जोन के सब स्टेशन में औसत 150 शिकायतें पहुंचती हैं। जिसमें ज्यादातर मेजर फाल्ट के होती हैं। ऐसी स्थिति में शिकायतों के सुधार के लिए 3 से 4 घंटे तक का समय लग रहा है। कंपनी के पास करीब 18 अतिरिक्त कर्मचारी भी हैं, जो ठेका कर्मचारी हैं। लेकिन इनसे केवल सामान्य शिकायतों पर सुधार कराया जाता है।
केबल टूटने, ट्रांसफॉर्मर या हैवी लाइन में फाल्ट जैसी स्थिति में सुधार केवल नियमित कर्मचारी करते हैं। स्टाफ की कमी की वजह से हालात ऐसे हैं कि केवल परक्ची में शिकायतें लिखी जा रही है। ^दोनों जोन में मेंटेनेंस स्टाफ की कमी है। इसकी वजह से सुधार कार्य में देर हो जाती है। अभी दोनों जोन में 12 ही नियमित कर्मचारी हैं। हालांकि ठेका कंपनी के कर्मचारियों से भी काम लिया जाता है। बारिश में शिकायतों की संख्या बढ़ जाती है। जिसकी वजह से सुधार में देर होती है। तीसरा जोन बनने के बाद स्थिति सुधर जाएगी। -आरके गोस्वामी, ईई, राजनांदगांव डिविजन
दोनों जोन में जो नियमित मेंटेनेंस कर्मचारी हैं। उनके तीन शिफ्ट में ड्यूटी ली जाती है। ऐसे में हर शिफ्ट में महज 2 कर्मचारी ही मौजूद रहें हैं। जिन पर मेजर फाल्ट सुधारने का जिम्मा रहता है। उस पर किसी कर्मचारी के अवकाश पर चले जाने से यह संख्या और कम हो जाती है। ऐसे में कई शिकायतों के सुधार तक रिस्पांस का समय 3 से 4 घंटे हो जाता है। इसी वजह से भी बिजली काफी देर तक गुल रहती है।
इधर शहर में बिजली आपूर्ति को लेकर आ रही शिकायतों के बीच महापौर मधुसूदन यादव ने भी कंपनी अफसरों की बैठक ली। जिसमें शहरी क्षेत्र में आपूर्ति बेहतर करने से लेकर जरूरी सुधार कार्य बारिश से पहले करने कहा। आयुक्त्त ने जर्जर हो चुके बिजली पोल की जानकारी दी। जिसे बारिश के पूर्व ही बदलने की बात कही गई। वहीं शिकायतों पर क्विक रिस्पांस को लेकर भी चर्चा हुई। जिसमें अफसरों ने कर्मचारियों की कमी को ही बड़ी वजह बताई ।
शहर में बिजली आपूर्ति और मेंटेनेंस बेहतर करने के लिए तीसरा जोन तैयार किया जा रहा है। बिजली के तीसरे जोन की स्वीकृति भी शासन स्तर से मिल चुकी है। इस जोन में 15 हजार कनेक्शन को शिफ्ट किया जाएगा। वहीं अलग जोन बनने से मेंटेनेंस कर्मचारियों के रूप में 10 की टीम तैनात होगी। इससे आने वाले समय में ऐसी समस्याओं में कमी आने की संभावना बिजली कंपनी के अफसरों ने जताई है। हालांकि तीसरे जोन के गठन में अभी कुछ समय और लग सकता है। ऐसे में इस बारिश में यह समस्याएं जारी रहेंगी।
कुछ साल पहले तक एक-एक जोन में 15-15 मेंटेनेंस कर्मियों का दल था। इनमें लाइन मैन, सहायक लाइन मैन, हेल्पर शामिल रहते थे। इनके साथ ठेका कर्मचारियों को शामिल कर काम लिया जाता था। लेकिन बीते कुछ साल में कर्मचारी रिटायर्ड होते गए हैं। उनकी जगह पर नियमित कर्मचारियों की भर्ती नहीं हो सकी है। जिससे कर्मचारियों की संख्या घटकर दोनों जोन में आधी रह गई है।
