राजनांदगांव । भारतीय मजदूर संघ व आंगनबाड़ी कार्यकर्ता महासंघ ने सोमवार को सरकारी कर्मचारी घोषित करने की मांग को लेकर प्रदर्शन किया। पांच सूत्रीय मांगोठ को लेकर कलेक्टोरेट के सामने दिनभर धरने पर बैठे रहने के बाद मुख्यमंत्री के नाम कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा।कई वर्षों से आंगनबाड़ी केंद्रों की कार्यकर्ता व सहायिकाएं शासकीय कर्मचारियों की ही तरह सुविधाएं मांग रही हैं। इसे लेकर कई बार आंदोलन भी कर चुकीं हैं। सोमवार को भारतीय मजदूर संघ व अखिल भारतीय आंगबाड़ी कर्मचारी महासंघ ने राष्ट्रीय आह्वान पर फिर आंदोलन किया। उनका आरोप है कि सरकार के ढुलमुल रवैये के कारण उनकी मांग आज तक पूरी नहीं हो पाई है। उन्हें ऐसा लगता है कि वे अपने आप को ठगा महसूस कर रहे हैं। उनका कहना है कि इसके पहले भी अपनी मांगों को लेकर धरना दे चुके हैं, उसके बाद भी उनकी मांग पूरी नहीं हुई। इसलिए फिर धरना देना पडा।इन मांगों पर प्रदर्शन
महासंघ की पहली मांग यह है कि आंगनबाडी में कार्य करने वाली कार्यकर्ताओं को सरकारी कर्मचारी घोषित किया जाए। सामाजिक सुरक्षा देकर उन्हें भी उचित श्रेणी में शामिल किया जाए, ताकि वह भी अपने आप को सरकारी कर्मचारी महसूस करे। सरकार द्वारा जो निर्धारित न्यूनतम वेतन 18000 रुपये है उन्हें भी मिलना चाहिए ताकि वह भी अपना गुजर-बसर ठीक ढंग से कर सके। नई शिक्षा नीति के तहत आंगनबाडी केद्रों को प्राथमिक पाठशाला की मान्यता मिलनी चाहिए। स्कूलों में प्राथमिक शिक्षिका और पूर्व प्राथमिक स्कूलों की सहायक शिक्षिकों की ही तरह कार्यकर्ता और मिनी कार्यकर्ता को भी पदनाम दिये जाएं। आंगनबाड़ी में काम करने वाली सभी कर्मचारियों को भविष्य नीधि, पेंशन, चिकित्सा और ग्रेच्युटी की भी सुविधा मिलनी चाहिए। उन्हें भी सरकारी कर्मचारी की तरह अर्जित अवकाश, आकस्मिक अवकाश, चिकित्सा अवकाश और विभिन्ना त्यौहारों में सरकारी छुटटी मिलनी चाहिए। इन्हीं पांच मांगों को लेंकर धरना दिया गया। उन्होंने कहा है कि अगर राज्य सरकार उनकी मांगों को नहीं मानेगी तो सभी कार्यकर्ता सड़क पर उतककर उग्र प्रदर्शन करेंगी।
