राजनांदगांव. अंतर्राष्ट्रीय पृथ्वी दिवस के अति महत्तम परिप्रेक्ष्य में नगर के पर्यावरण विज्ञ प्राध्यापक कृष्ण कुमार द्विवेदी ने विशेष आह्वान चिंतन टीप में बताया कि अखिल ब्रम्हाण्ड में जीवंत गृह पृथ्वी का संरक्षण सामयिक प्रायगिक आवश्यकता है। वर्तमान समय में पृथ्वी पर जीवन के आधार समग्र पर्या तत्व जल, मिट्टी, वायु, जीव जंतु, पेड़-पौधे आदि सभी गहन रूप से प्रदूषित है असंतुलित है। पृथ्वी के प्रमुख उच्चावच पर्वत, पठार, मैदान एवं नदियाँ, झीले, सागर आदि सभी मूल प्रकृति स्वरूप से पूर्णत: विकृत होकर बुरी तरह दूषित हो चुके है जिसके कारण यह अनुपम अद्भूत जीवंत ग्रह पृथ्वी पर भूमण्डलीय तापन जलवायु परिवर्तन एवं महामारी बिमारी जैसे महासंकट फैले हुये। पृथ्वी की प्राकृतिक संपदा खनिज, वन, जीव जंतु आदि सभी समाप्ति अथवा विलुप्तता के कगार पर आ खड़े हुए है। चतुर्दिक वातावरण – पर्यावरण प्रतिकूल है, समग्र प्रकृति पृथ्वी संरक्षण – संवर्धन की सनातनी परम्परा में समाप्त हो चुकी है। उल्लेखनीय है कि इन सबके मूल में मानव की अति लालची प्रवृत्ति, भौतिकवादी जीवन शैली, घोर व्यवसायिक प्रतिस्पर्धाए तथा चतुर्दिक बढ़ता बाजारवाद है। समसामयिक परिस्थितियाँ चेतावनी दे रही है कि देश-धरती के प्रत्येक जन-जन को अब आगे आना ही होगा। तभी हम अपनी पृथ्वी को बचा सकेेंगे। आगे प्राध्यापक द्विवेदी ने विशेष रूप से युवा-किशोर प्रबुद्ध एवं नेतृत्वकर्ता पीढ़ी को संकल्प हेतु आह्वान्वित किया कि हम सर्वदा अपनी जीवनचर्या में पृथ्वी और प्रकृति प्रदतत समस्त संसाधनों का संरक्षण और संवर्धन करेंगे। जल, मिट्टी, वायु, आकाश को दूषित नहीं करेंगे तथा पर्यावरण संवर्धन हेतु नित्य जल बचायेंगे और समय – समय पर वृक्षारोपण – पौधारोपण द्वारा हरियाली बढ़ायेंगे। यही पृथ्वी दिवस पर जन-जन, सर्वजन के लिए श्रेष्ठ सद्संकल्प होगा।
