एंकर
– सभी श्रोताओं को नमस्कार, जय जोहार।
– लोकवाणी की पंद्रहवीं कड़ी में माननीय मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल जी और आप सभी श्रोताओं का हार्दिक स्वागत है।
माननीय मुख्यमंत्री जी का जवाब
– सब्बो झन ला मोर जय जोहार, नमस्कार, जय सियाराम।
– लोकवाणी मं आके मोला अब्बड़ खुसी लागथे, काबर कि हमन सरकार मं बइठके जउन निरनय लेथन, वो बात ल आप सब झन कइसे समझथव, अऊ योजना मन ल कइसे अपनाथव। ऐखर बारे मं मोला सब जानकारी लोकवाणी ले हो जाथे। आप मन ले गोठ-बात करके हमर आत्मविश्वास घलोक बाढ़थे, अऊ काम करेके नवा रद्दा घलोक मिलथे।
– तेखर बर जम्मो ‘लोकवाणी’ सुनइया मन ल, गाड़ा-गाड़ा सुभकामना अऊ धन्यवाद।
एंकर
– माननीय मुख्यमंत्री जी, आपने ‘गढ़बो नवा छत्तीसगढ़’ का नारा देते हुए प्रदेश में एक नई कार्य-संस्कृति की शुरुआत की थी और अब आपकी सरकार की सोच और कार्य बड़े पैमाने पर आकार ले चुके हैं। जन-जीवन में उनका असर दिखाई पड़ने लगा है।
– इस बार लोकवाणी इसी पर केन्द्रित है कि अधोसंरचना विकास को लेकर आपकी सोच क्या है और राज्य में अधोसंरचना के विकास की दिशा और दशा क्या है?
– इस बार लोकवाणी में ‘उपयोगी निर्माण-जनहितैषी अधोसंरचनाएं और आपकी अपेक्षाएं’ विषय पर विचार आमंत्रित किए गए थे। हमें यह कहते हुए खुशी है कि आपकी भावनाएं जनता तक बहुत अच्छी तरह से पहुंची हैं।
– गांव, वनांचल और आम जनता के लिए उपयोगी नई तरह की अधोसंरचनाएं दिखाई पड़ने लगी हैं, जिनके बारे में पहले कभी ध्यान ही नहीं गया कि ऐसा भी हो सकता है।
– आइए सुनते हैं, कुछ विचार।
1 भूपेन्द्र कुमार शर्मा, बेमता
नमस्कार, माननीय मुख्यमंत्री जी। मैं भूपेन्द्र कुमार शर्मा, बेमता से बोल रहा हंू। लोकवाणी के जरिए आपसे बात करने का अवसर मिला है। मैं खेती-किसानी के कार्य से जुड़ा हुआ हूं और इसी सिलसिले में आपसे बात कर रहा हंू। मैंने अनुभव किया है कि आपकी सरकार बनने के बाद किसानों को काफी राहत मिली। अधोसंरचना विकास के साथ सरकार ने अपनी सोच और सूझबूझ से किसानी को बेहतर बनाने की कोशिश की है। इसका सबसे बड़ा उदाहरण सिंचाई है, पिछले दो साल में किसानों को सिंचाई के लिए परेशान नहीं होना पड़ा है और न ही बिजली के लिए परेशान होना पड़ा है। सरकार की समझदारी और बेहतर प्रबंधन के कारण सिंचाई का रकबा भी बढ़ा है और आपका जो नरवा प्रोजेक्ट है न, उसमें भी किसानांे को सिंचाई से काफी लाभ हुआ है। सरकार की सोच और किसानों के प्रति आपकी चिंता के लिए मैं आपको धन्यवाद देता हंू।
2. रूक्मणी पाल, ग्राम पंचायत-बम्हनी, जिला-महासमुंद
रूक्मणी पाल, ग्राम पंचायत बम्हनी, जिला महासमुंद-मेरे समूह का नाम जय मां सरस्वती महिला स्व-सहायता समूह है। छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा ‘नरवा, गरवा, घुरवा, बारी-छत्तीसगढ़ के चार चिन्हारी’ योजना के अंतर्गत हमारा समूह गोबर खरीदते हुए गोबर से जैविक खाद निर्माण करता है, इस गोबर से 200 क्विंटल खाद बना चुके हैं। इससे हमारी आय 1 लाख 77 हजार रुपए हुई है, जिसके लिए छत्तीसगढ़ सरकार को धन्यवाद करती हूं, जिसने इस योजना को चालू किया है।
3. नंद कुमार-आरंग
– माननीय मुख्यमंत्री जी नमस्कार, मैं नंद कुमार, आरंग से बोल रहा हूं। छत्तीसगढ़ में आपके ड्रीम प्रोजेक्ट ‘नरवा, गरवा, घुरवा और बारी’ से अधोसंरचना विकास की एक दिशा दिखी है। खासतौर पर गौठानों के बनने से तरह-तरह की गतिविधियां संचालित हो रही हैं। वर्मी कम्पोस्ट से रोजगार के साधन मिले हैं। वहीं गोबर से गमले, दीये जैसे उत्पादों को बढ़ावा मिला है, जिससे पर्यावरण संरक्षित हो रहा है। इसके लिए मैं आपको धन्यवाद देता हूं। मुझे उम्मीद है कि आपकी इस सोच के माध्यम से हम उपयोगी निर्माण और जनहितैषी अधोसंरचना के संबंध में मिसाल पेश करेंगे। धन्यवाद।
माननीय मुख्यमंत्री जी का जवाब
– धन्यवाद। भूपेन्द्र शर्मा जी, रूक्मणी पाल जी, नंद कुमार जी।
– निश्चित तौर पर ‘नरवा, गरवा, घुरवा, बारी’ हमारा ड्रीम प्रोजेक्ट है और इसकी शुरुआत हमने छत्तीसगढ़ की चार चिन्हारी को बचाने के लिए किया था।
– इस दिशा में हम जैसे-जैसे आगे बढ़ते गए वैसे-वैसे इसके नए-नए आयाम सामने आते गए। जब हमने नरवा संरक्षण की बात की तो नाला, नहर-नाली और ऐसी ही अन्य संरचनाओं को लेकर चर्चा हुई। अलग-अलग विभाग, अलग-अलग योजनाओं के बीच समन्वय, अभिसरण आदि से कई रास्ते बनते गए।
– नरवा के काम में पंचायत और ग्रामीण विकास, जल संसाधन विकास विभाग, वन विभाग आदि की मदद ली जा रही है। इस तरह से लगभग 30 हजार नरवा चिन्हांकित किए गए हैं और लगभग 5 हजार नरवा विकास का काम काफी आगे बढ़ चुका है।
– गरवा को लोग सिर्फ गाय, दूध और पशुधन विकास तक ही समझते थे, हमने गरवा के माध्यम से गौठान की योजना बनाई। इस तरह लगभग 10 हजार गौठानों के निर्माण की मंजूरी दे चुके हैं, जिनमें से 5 हजार से ज्यादा गौठानों का निर्माण पूरा हो चुका है। अब गौठान की पहचान एक ऐसी अधोसंरचना के रूप में हो चुकी है, जो सिर्फ गायों को रोकने की जगह ही नहीं है बल्कि गोधन न्याय योजना के माध्यम से गोबर खरीदी केन्द्र, महिला स्व-सहायता समूह के माध्यम से वर्मी कम्पोस्ट बनाने और बेचने का केन्द्र, गोबर से अन्य कलात्मक वस्तुएं बनाने का केन्द्र भी विकसित हुआ है। एक तरह से गौठान बहुआयामी सांस्कृतिक, आर्थिक गतिविधियों के केन्द्र बन रहे हैं।
– घुरवा और बारी के माध्यम से जैविक खाद निर्माण की अधोसंरचना बनी और गांव-गांव में बाड़ी की पुरानी परंपरा को वापस लाया जा रहा है। मुझे यह देखकर खुशी होती है कि हमारे गांव-घर की बाड़ियों में उपजाई जाने वाली सब्जी-भाजी- फल कुपोषण मुक्ति का सहारा बन रहे हैं।
– मैं बताना चाहता हूं कि हमारी नरवा योजना प्रदेश में भू-जल की रिचार्जिंग का बहुत बड़ा साधन बन रही है। हमारे प्रयासों को भारत सरकार के जल शक्ति मंत्रालय द्वारा भी सराहा गया है। बिलासपुर और सूरजपुर जिले की परियोजनाओं को राष्ट्रीय पुरस्कार मिला है।
– हमने पुरानी जल संसाधन परियोजनाओं की कमियों को दूर किया ताकि वास्तविक सिंचाई का रकबा बढे़, इसके अलावा भी बड़ी-बड़ी नई योजनाएं हाथ में ली हैं।
– बोधघाट के अलावा शेखरपुर बांध, ढांडपानी बांध, रेहर अटेम जैसी 15 परियोजनाओं पर ध्यान दिया जा रहा था। हमारा लक्ष्य है कि आगामी 5 साल में प्रदेश में ऐसी जल अधोसंरचनाओं का विकास हो जाए, जिससे राज्य की सिंचाई क्षमता दोगुनी हो जाए।
– मैं यह खुशखबरी भी साझा करना चाहता हूं कि छत्तीसगढ़ की नई जल संसाधन विकास नीति तैयार करने का काम पूरा हो चुका है। जल्दी ही प्रदेश को नई जल संसाधन नीति के रूप में अधोसंरचना विकास की नई सौगात मिलेगी।
एंकर
– माननीय मुख्यमंत्री जी, ऐसी मान्यता रही है कि बड़ा पुल, बड़ी सड़क या बहुत बड़ी बिल्डिंग का निर्माण ही अधोसंरचना का विकास है। लेकिन आपके कार्यकाल में गांवों की जरूरतों की संरचनाओं का निर्माण हो रहा है, उससे लोगों को बहुत मदद मिल रही है। आइए सुनते हैं कुछ विचार और इसके बाद आप ऐसी अधोसंरचना के बारे में अपनी राय रखिएगा।
1. राजेश कुमार कनौजिया, ग्राम डबराखुर्द
मैं राजेश कुमार कनौजिया, ग्राम डबराखुर्द का निवासी हूं। ग्रामीण सेवा सहकारी समिति झाल खम्हरिया में मुख्यमंत्री महोदय द्वारा चबूतरा बनवाया गया है, उससे हम बहुत खुश हैं। चबूतरा से हमारा धान खराब नहीं होता है। इस कारण मुख्यमंत्री को धन्यवाद करता हूं।
2. सोम प्रकाश साहू, ग्राम कोसरंगी
मैं सोम प्रकाश साहू, ग्राम कोसरंगी का निवासी हंू। मुख्यमंत्री महोदय के द्वारा जो चबूतरा बनवाया गया है, उससे मैं खुश हंू। क्योंकि हम किसानों का धान खराब नहीं होता। मैं इसके लिए मुख्यमंत्री जी को धन्यवाद देना चाहता हूं। धन्यवाद!
माननीय मुख्यमंत्री जी का जवाब
– राजेश कुमार जी, सोम प्रकाश भाई।
– आप लोगों ने इस बदलाव को महसूस किया, उसके लिए बहुत-बहुत धन्यवाद।
– हम महात्मा गांधी नरेगा के साथ विभिन्न योजनाओं के अभिसरण से गांव-गांव में ऐसी अधोसंरचनाओं का विकास कर रहे हैं, जिसमें बहुत बड़े पैमाने पर लोगों को लाभ मिलता है। इस तरह एक ओर जहां हमने हजारों गौठानों के निर्माण की व्यवस्था की। वहीं गौठानों में लगभग 61 हजार वर्मी कम्पोस्ट टंकी बनवा चुके हैं। करीब 5 हजार चारागाह बनाए हैं। भवनविहीन आंगनवाड़ियों के लिए भवन बना रहे हैं। नवगठित ग्राम पंचायतों में पंचायत भवन बना रहे हैं। उसी प्रकार धान उपार्जन केन्द्रों में 8 हजार चबूतरे बनवाए गए हैं, जिसका जिक्र आप लोगों ने किया, इससे धान को सुरक्षित रखने में मदद मिल रही है।
– आप लोगों की खुशी और समर्थन को देखते हुए लगता है कि इस काम में और तेजी लाने की जरूरत है।
– गांवों में ऐसी अधोसंरचनाओं की बहुत जरूरत है, जिससे हमारे ग्रामीण भाई-बहन और बच्चे गांवों में एक नई तरह की व्यवस्था महसूस कर सकें। वे देख सकें कि सरकार का काम खाली शहरी अधोसंरचना का विकास ही नहीं है, गांव वालों की जरूरतें पूरी करने के लिए भी बहुत से काम करना जरुरी है।
– मुझे खुशी है कि हमने सही समय में गांव वालों की जरूरतों की पहचान कर ली है और उसके अनुरूप निर्माण के निर्णय ले
रहे हैं।
एंकर
– माननीय मुख्यमंत्री जी, हमें यह देख कर बहुत खुशी होती है कि प्रदेश का विद्यार्थी वर्ग भी यह देख रहा है कि आप शिक्षा को लेकर किस तरह अधोसंरचना विकसित करना चाहते हैं। आइए सुनते हैं एक श्रोता की बात।
1. कुश शर्मा, जिला-कोरबा
नमस्कार माननीय मुख्यमंत्री जी, मैं कुश शर्मा कोरबा से बोल रहा हूं। छत्तीसगढ़ सरकार ‘उपयोगी निर्माण और जनहितैषी अधोसंरचना’ के मामले में ऐसा विकास कर रही है, जो आम लोगों से सीधा जुड़ा है। कहीं भी नहीं लगता कि केवल दिखावे या शो-बाजी के लिए लाखों-करोड़ों रुपए फूंके जा रहे हैं। भूपेश सरकार ने इंग्लिश मीडियम स्कूल शुरू करने का फैसला लिया है। अधोसंरचना विकास की यह सोच काबिले-तारीफ है, क्योंकि इसमें जनता के पैसांे का सही उपयोग उनके लिए हो रहा है। आर्थिक रूप से कमजोर बच्चों और उनके पालकों ने कल्पना भी नहीं की थी कि उनके लिए शिक्षा इतनी सुलभ हो पाएगी, इसके लिए मुख्यमंत्री जी धन्यवाद के पात्र हैं, हमारा विश्वास है कि इस विकास की सोच के साथ, नया छत्तीसगढ़ गढ़ने में सफल होंगे।
माननीय मुख्यमंत्री जी का जवाब
– धन्यवाद कुश।
– मैं हमेशा कहता हूं कि महंगे और सजावटी विकास से किसी का भला नहीं होता, वास्तव में यह देखना चाहिए कि निर्माण की गुणवत्ता कैसी है और उससे सेवा की गुणवत्ता में कैसे सुधार होगा। ‘स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट अंग्रेजी माध्यम विद्यालय योजना’ का विचार ही इसलिए आया कि सरकारी स्कूलों को निजी स्कूलों के सामने सम्मान पूर्वक खड़ा किया जाए। ताकि सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले गरीब और मध्यमवर्गीय बच्चे उन सुविधाओं से वंचित न हों, जो उनके भविष्य निर्माण के लिए जरूरी हैं। इसलिए सरकारी क्षेत्र में हम इंग्लिश मीडियम स्कूल के माध्यम से वह सुविधाएं ला रहे हैं, जिनसे बच्चों के व्यक्तित्व का सम्पूर्ण विकास हो, जिससे वे आगे चलकर डॉक्टर, इंजीनियर ही नहीं बल्कि शोधकर्ता, खिलाड़ी, प्रबंधक या अपनी रुचि के अनुसार कोई भी कैरियर अपना सकें।
– हमने स्कूल शिक्षा में गुणवत्ता सुधार का एक रोडमैप बनाया है, जिसके अनुसार विभिन्न शालाओं में बहुत से कार्य किए जा रहे हैं।
एंकर
– माननीय मुख्यमंत्री जी, प्रदेश में उच्च शिक्षा को लेकर भी लगता है कि कोई ताजा हवा का झोंका आया है। नई सोच के साथ नए कदम उठाए जा रहे हैं, जिसकी बानगी समझने के लिए आइए सुनते हैं कुछ विचार। हमारा अनुरोध है कि इसके पश्चात आप समग्रता से अपनी बात रखिएगा।
1. प्रो. एस. के. पाटिल, कुलपति, इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, रायपुर
परम आदरणीय मुख्यमंत्री भूपेश बघेल जी नमस्कार। आपने छत्तीसगढ़ में कृषि तथा उद्यानिकी को जिस तरह का बढ़ावा दिया है एवं 31 महाविद्यालयों का वृहद नेटवर्क खड़ा किया है, इससे युवाओं में कृषि शिक्षा की ओर रुझान में अत्यधिक वृद्धि हुई है एवं छात्र इंजीनियरिंग जैसे विषयों को छोड़कर कृषि शिक्षा में प्रवेश ले रहे हैं। इस हेतु मैं प्रो. एस. के. पाटिल, कुलपति, इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, आपका धन्यवाद करता हूं। साथ ही अपने युवाओं में कौशल विकास हेतु विश्वविद्यालयों में उत्पादन केन्द्र तथा युवाओं की कंपनियां स्थापित करने का अभिनव विचार दिया है, जो आपके मन में हार्वर्ड विश्वविद्यालय की अपनी यात्रा के दौरान आया था। इस तरह के केन्द्रों की स्थापना आपके द्वारा कृषि विश्वविद्यालय में विगत दिनों की गई है एवं इसके माध्यम से युवा, कृषि को एक व्यवसाय के रूप में लेने आगे आ रहे हैं। महोदय, कृषि शिक्षा को बढ़ावा देकर, युवाआंे को रोजगार प्रदान करने के लिये किये गये आपके प्रयासांे हेतु मैं साधुवाद प्रकट करता हूं।
2. किरण मौर्य – जिला रायगढ़
माननीय मुख्यमंत्री जी, सादर नमस्कार। मैं किरण मौर्य, रायगढ़ जिले में अधोसंरचना विकास के तहत स्वर्गीय नन्दकुमार पटेल यूनिवर्सिटी शुभारंभ हुआ है। यूनिवर्सिटी के खुलने से हम छात्र-छात्राओं सहित सभी जिलेवासियों को बहुत लाभ होगा। हम लोगों को शिक्षा संबंधी कार्यों के लिये बहुत दूर बिलासपुर जाना पड़ता था, लेकिन रायगढ़ में यूनिवर्सिटी खुल जाने से हम लोग बहुत ही सरलतापूर्वक अपने कार्य कर पाएंगे। रायगढ़ जिले मे निर्माण कार्यांे के साथ-साथ यूनिवर्सिटी खोलने के लिये आपको सादर धन्यवाद।
माननीय मुख्यमंत्री जी का जवाब
– धन्यवाद प्रो. पाटिल जी।
– सही कहा आपने कि हार्वर्ड विश्वविद्यालय में भ्रमण के दौरान मेरे मन में यह बात आई थी कि विश्वविद्यालयों में उत्पादन केन्द्र तथा युवाओं मंे उद्यमिता विकास को लेकर कोई संरचनागत, संस्थागत काम होना चाहिए, जिसमें निरंतरता हो और युवाओं को कृषि से संबंधित रोजगार के नए अवसरों की जानकारी हो, उन्हें मार्गदर्शन व सहयोग मिले। छत्तीसगढ़ में यह शुरुआत एक सुखद संकेत है।
– मैं किसान परिवार से हूं। मैं किसान हूं, इसे गौरव का विषय मानता हूं। लेकिन एक लम्बे दौर में हमारे युवाओं के मन में यह बात बैठ गई है कि खेती-किसानी के बारे में चर्चा करना या उसमें अपना कैरियर ढूंढना कोई बहुत अच्छी बात नहीं है।
– खेती-किसानी को लेकर युवाओं के मन में सम्मान का भाव नहीं होने की एक बड़ी वजह थी कि खेती और उच्च शिक्षा के बीच की कड़ी ही मिसिंग थी। इसलिए हमने यह तय किया कि उतने ही इंजीनियरिंग कॉलेजों को महत्व मिले जितने में गुणवत्ता से शिक्षा दी जा सके और उसमें भी ऐसे पाठ्यक्रम होने चाहिए जो स्थानीय संसाधनों के वेल्यू एडीशन से उत्पादन का रास्ता बनाएं। यह तो विडम्बना ही थी कि हमारे कृषि प्रधान राज्य में इंजीनियरिंग कॉलेजों की भरमार हुई लेकिन कृषि शिक्षा के कॉलेज समुचित संख्या में नहीं खोले गए। इसलिए हमने एग्रीकल्चर के साथ उद्यानिकी-वानिकी, डेयरी टेक्नोलॉजी, फूड प्रोसेसिंग, मछली पालन जैसे विषयों के लिए विश्वविद्यालय, महाविद्यालय और पॉलीटेक्निक खोलने पर जोर दिया है।
– कोविड के दौरान हमने महसूस किया कि प्रदेश में और अधिक मेडिकल कॉलेजों की जरूरत है। दुर्ग जिलेे का चंदूलाल चन्द्राकर स्मृति चिकित्सा महाविद्यालय निजी क्षेत्र में चलना मुश्किल हो रहा था, उसे हमने अधिग्रहित करने का फैसला लिया ताकि सरकारी चिकित्सा शिक्षा अधोसंरचना को बढ़ाया जा सके। तीन जिलों कांकेर, महासमुन्द और कोरबा में हम नए मेडिकल कॉलेज खोल रहे हैं, इस तरह उच्च शिक्षा की अधोसंरचना में जो अभाव थे, उसे पूरा करने और प्रदेश के युवाओं को बेहतर भविष्य बनाने में मदद करने का हमारा प्रयास है।
– किरण मौर्य जी को रायगढ़ में विश्वविद्यालय खोलने का निर्णय पसंद आया तो उनके माध्यम से मैं स्वर्गीय नंदकुमार पटेल विश्वविद्यालय के सभी छात्र-छात्राओं को बधाई और शुभकामनाएं देता हूं। युवा साथियों, अच्छी पढ़ाई करके छत्तीसगढ़ को समझ के और छत्तीसगढ़ महतारी की सेवा करके आपको नवा छत्तीसगढ़ गढ़ना है।
एंकर
– माननीय मुख्यमंत्री जी, अधोसंरचना के विकास को लेकर आपकी नई सोच पर्यटन विकास के क्षेत्र में भी दिख रही है, जिसे दूर-दूर तक लोग देख और समझ रहे हैं कि इससे क्षेत्रीय असंतुलन भी दूर होगा और स्थानीय तौर पर रोजगार और समृद्धि के नए रास्ते भी खुलेंगे। आइए सुनते हैं कुछ विचार।
1. मदन तिर्की, जिला-जशपुर
माननीय मुख्यमंत्री जी, मेरा नाम मदन तिर्की है। जिला जशपुर का रहने वाला हूं। हम लोग छत्तीसगढ़ या देश के दूसरे हिस्सों में पर्यटन के बारे में सुनते थे तो हमें लगता था कि हमारा क्षेत्र भी तो इतना सुन्दर है, वहां पर यदि पर्यटन विकास का काम होगा तो यहां के लोगों को फायदा मिलेगा। ऐसा क्यों नहीं होता? लेकिन अभी भूपेश बघेल जी, आपकी सरकार आने के बाद सुनाई पड़ा कि जैसे बस्तर में देवगुड़ी, चित्रकोट का नाम सुनते थे। वैसे जशपुर से 5 किलोमीटर दूर बालाछापर सरना में एथनिक रिसॉर्ट बना है। ऐसा ही कवर्धा में सरोधा दादर के बारे में सुना। इससे हमको बहुत खुशी हुई कि अब आदिवासी पिछड़े अंचल में पर्यटन विकास के अवसर पैदा हो रहे हैं। धन्यवाद मुख्यमंत्री जी। इसको खूब अच्छे से आगे बढ़ाने के बारे में सोचिए और हमें भी मार्गदर्शन दीजिए।
2. प्रार्थना तिवारी-रायपुर
नमस्कार माननीय मुख्यमंत्री जी। मैं प्रार्थना तिवारी रायपुर से बोल रही हूं, छत्तीसगढ़ सरकार उपयोगी निर्माण और जनहितैषी अधोसंरचना के मामले में हमारी अपेक्षाओं पर खरे उतर रही है क्योंकि हमारा भी मानना है कि कोई निर्माण या इंफ्रास्ट्रक्चर ऐसा हो जो लोगों से जुड़ा हो, निर्माण कार्य केवल शो के लिए नही होना चाहिए। पिछले 2 सालोें में यह बदलाव देखने को मिल रहा है कि लोगों की भागीदारी एवं उनकी उपयोगिता को ध्यान दिया जा रहा है। ऐतिहासिक बूढ़ा गार्डन को ही देख लीजिए, अब हम परिवार के साथ वहां जा सकते हैं, वहां का नजारा और माहौल खूबसूरत हो गया है। मैं इसके लिए आपको धन्यवाद देना चाहती हूं और उम्मीद करती हूं कि विकास की सोच से हम नवा छत्तीसगढ़ गढ़ने में सफल होंगे। धन्यवाद।
माननीय मुख्यमंत्री जी का जवाब
– धन्यवाद मदन जी, प्रार्थना जी।
– प्रदेश में एक दौर ऐसा आया था, जब पर्यटन को कुछ प्रचलित केन्द्रों में ही समेटकर रखने और मॉल कल्चर में ढालने के प्रयास हो रहे थे।
– दुनिया में अपनी प्राचीन धरोहरों को सहेजने और प्राकृतिक सुन्दरता के स्थानों में अधोसंरचना के विकास के प्रयासों को सराहा जाता है। लेकिन छत्तीसगढ़ में ऐसा नहीं हो रहा था, इसलिए हमने पर्यटन विकास की संभावनाओं को बहुत बड़े फलक में आकार देने का प्रयास किया है। इस क्रम में जशपुर जिले के सरना-बालाछापर तथा कोइनार-कुनकुरी में, बिलासपुर जिले के कुरदर में, कोण्डागांव जिले के धनकुल में, कांकेर जिले के नथिया नवागांव में एथनिक रिसॉर्ट, सरगुजा जिले के महेशपुर में साइट एमेनिटी का विकास किया जा रहा है। सिरपुर को ऐतिहासिक बौद्ध पर्यटन स्थल के रूप में विश्व के मानचित्र में स्थान दिलाने का प्रयास किया जा रहा है। वाटर टूरिज्म तथा एडवंेचर टूरिज्म के लिए कोरबा जिले के सतरेंगा, धमतरी जिले के मेडम सिल्ली डेम जिसका नामकरण हमने बाबू छोटे लाल श्रीवास्तव के नाम पर किया है तथा रविशंकर डेम गंगरेल, गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही जिले के मलानिया जलाशय, कांकेर जिले के दुधावा जलाशय, महासमुन्द जिले के कोडार डेम, बिलासपुर जिले में संजय गांधी जलाशय खुंटाघाट-रतनपुर में अधोसंरचना का विकास किया जा रहा है।
– राम वनगमन पथ में आने वाले 75 स्थानों का चयन अधोसंरचना विकास के लिए किया गया है, जिसके प्रथम चरण में 9 स्थानों जैसे सीतामढ़ी हरचौका, रामगढ़, शिवरीनारायण, तुरतुरिया, चंदखुरी, राजिम, सिहावा सप्तऋषि आश्रम, जगदलपुर तथा रामाराम में समुचित अधोसंरचना के विकास का काम शुरू किया गया है। दामाखेड़ा में कबीर सागर के विकास का काम हाथ में लिया गया है। सूरजपुर की पहाड़ी में स्थित बागेश्वरी मंदिर और कुदरगढ़ में रोप वे सहित समुचित अधोसंरचना का विकास किया जा रहा है।
– रायपुर का बूढ़ातालाब एक ओर जहां आदिवासी समाज के पूज्य बूढ़ादेव की याद दिलाता है, वहीं स्वामी विवेकानंद के रायपुर प्रवास की स्मृति भी ताजा करता है। इस तरह हमने आम जनता के लिए किफायती और स्वस्थ मनोरंजन स्थलों के विकास को प्राथमिकता दी है, जो हमारे प्रदेश की सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक विशेषताओं से मेल खाते हैं।
– मुझे विश्वास है कि पर्यटन विकास को लेकर हमारी सोच का लाभ बड़े पैमाने पर मिलेगा, इससे स्थानीय विकास में बहुत गति मिलेगी तथा नए रोजगार के अवसर भी बनेंगे।
एंकर
– माननीय मुख्यमंत्री जी, दो वर्ष पहले आपने प्रदेश के मुखिया के रूप में छत्तीसगढ़ की बागडोर संभाली थी, तब आर्थिक तंगी का दौर था। विकास की प्राथमिकताओं को लेकर कई सवाल खड़े हुए थे, उसके बाद अचानक ही कोविड-19 का दौर शुरू हो गया, जिससे दुनिया के बड़े-बड़े देश हिल गए लेकिन आपके नेतृत्व ने छत्तीसगढ़ को काफी हद तक बचाए रखा। इस बीच छत्तीसगढ़ के अलग-अलग हिस्सों से अलग-अलग क्षेत्रों में नए-नए कीर्तिमान बनने की खबरें आती रहीं। इसके साथ ही अधोसंरचना विकास की नई सोच तथा नई दिशा भी आकार लेती चली गई। इस संबंध में आइए सुनते हैं। कुछ विचार और सवाल।
1. नवीन अग्रवाल- रायपुर
मुख्यमंत्री जी नमस्कार, मैं रायपुर से नवीन अग्रवाल बोल रहा हूं। ये सुनकर बहुत अच्छा लगता है कि बस्तर के दंतेवाड़ा जैसे सुदूर इलाके में सरकार के सहयोग से रेडीमेड कपड़ों की इंडस्ट्री खुली है और डेनेक्स ब्रांड लांच हुआ है। यह ब्रांड देश-विदेश में धूम मचाए, यही हमारी शुभकामनाएं हैं। वैसे भी हमारा प्रदेश कंज्यूमर स्टेट नहीं है, बल्कि उत्पादक राज्य है। मेरा ये मानना है कि किसी भी उत्पादक राज्य का इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे सड़क, बिजली और आवागमन के साधन इतने अच्छे होने चाहिए कि कच्चा माल भी जल्दी आ सके और रेडी प्रोडक्ट भी जल्दी जा सके। पिछले 20 साल में सड़कें तो बहुत बनी हैं, लेकिन कोई विकास का विजन नहीं दिखता है। आज हम उत्पादक राज्यों में देशभर में अंडर फाइव राज्य में भी नहीं आते हैं। आपका विजन गांव से जुड़ा है। आपका विजन नया है। मैं ये जानना चाहता हूं कि सड़क, बिजली और कनेक्टीविटी को लेकर आपका क्या विजन है और कब तक हम एक बड़े उत्पादक राज्य के रूप में जाने जाएंगे?
2. गीत तिवारी, गेवरा जिला-कोरबा
नमस्कार, मैं गीत तिवारी, गेवरा, जिला-कोरबा से बोल रही हूं। यह बहुत गौरव की बात है कि हमारे प्रदेश में बिजली उत्पादन उसके विस्तार और वितरण की बड़ी ही व्यापक व्यवस्था है। हम लोग तो बड़े गौरव से कहने लगे हैं कि छत्तीसगढ़ की ‘नवा चिन्हारी सस्ता बिजली जम्मो दुआरी’ मुख्यमंत्री जी, जिस प्रकार आप हम सबको देश में सबसे सस्ती बिजली, वह भी आधी कीमत पर उपलब्ध कराई है। और जो बिजली हमारी प्रगति का आधार है, उस बिजली की क्षेत्र में भविष्य में विकास को लेकर क्या दृष्टिकोण है।
माननीय मुख्यमंत्री जी का जवाब
– धन्यवाद नवीन अग्रवाल जी, गीत जी।
– मुझे यह सुनकर अच्छा लगा कि दंतेवाड़ा के ब्रांड डेनेक्स की धमक राजधानी रायपुर में ठीक ढंग से सुनी गई।
– मैं आपकी बात से सहमत हूं कि छत्तीसगढ़ कंज्यूमर नहीं बल्कि उत्पादक राज्य है।
– आपको याद होगा कि मैंने बिजली के बारे में कहा था कि हमें सिर्फ उत्पादक राज्य नहीं बने रहना है, बल्कि उपभोक्ता राज्य भी बनना है।
– मैं नहीं चाहता कि हमारे राज्य के बहुमूल्य संसाधनों का उपयोग करके देश और दुनिया के दूसरे हिस्से के लोग तो समृद्ध और खुशहाल हो जाएं लेकिन छत्तीसगढ़ के लोग हमेशा संघर्ष ही करते रहें।
– इसीलिए मैंने बहुत साफ विजन रखा है कि हमें उत्पादक भी बनना है और उपभोक्ता भी।
– मेरा मानना है कि बांध बनें तोे नहर-नालियों का निर्माण उसके साथ जुड़ा होना चाहिए। बिजली का उत्पादन ठीक से हो तो उसे कारखानों, अस्पतालों, घरों, दफ्तरों, खेतों में पहुंचाने के लिए पूरा नेटवर्क बनें। सड़कों का नेटवर्क पुल-पुलियों के बिना अधूरा है। लोगों से जुड़े सरकारी काम-काज के लिए भवन बनंे तो वहां पहुंचने के लिए सड़कें भी चाहिए। अगर ऐसा नहीं होता तो निर्माण पर लगी मोटी रकम बरबाद हो जाती है। दुर्भाग्य से पिछले डेढ़-दो दशक में छत्तीसगढ़ को ऐसी ही परिस्थितियों से दो-चार होना पड़ा था। इसलिए हम चंद महंगी और सजावटी सड़कों-भवनों की बात नहीं करना चाहते। बल्कि नेटवर्क कम्पलीट करने के बारे में बात करते हैं। अधोसंरचना विकास को लेकर मेरी यही सीधी और स्पष्ट सोच है। हमने ‘जवाहर सेतु योजना’ लाई जो सड़कों को पुल-पुलियों से जोड़ने की योजना है। दो साल में हमने लगभग 200 बड़े पुल-पुलिया बनाने का काम हाथ में लिया और उसे पूरा कर रहे हैं।
– हमने ‘मुख्यमंत्री सुगम सड़क योजना’ लाई, जिसके तहत लगभग 2200 ऐसी सड़कें बना रहे हैं, जो सरकारी दफ्तरों को जोड़ती हैं। बिजली में भी हमने ऐसा ही किया। जहां किसी प्राकृतिक आपदा या दुर्घटना से ब्लैक आउट हो जाता था, उन अंचलों में बिजली के ट्रांसमिशन और डिस्ट्रीब्यूशन का नेटवर्क पूरा किया, जिससे वहां दोहरी-तिहरी ओर से आपूर्ति की व्यवस्था हो जाए। बस्तर इसका एक बड़ा उदाहरण है। इसके साथ पूरे राज्य में बिजली उप केन्द्रों, पारेषण व वितरण लाइनों का जाल बिछा रहे हैं, जिसके कारण बसाहटों में विद्युतीकरण का नया कीर्तिमान बना है और बिजली बिल हाफ करने का वादा निभाना भी संभव हुआ है।
– इस तरह हमने राज्य की अधोसंरचना को संतुलित और विस्तृत करने पर जोर दिया ताकि यह विश्वसनीय बने। स्थानीय संसाधनों के वेल्यू एडीशन के आधार पर ही हमने नई उद्योग नीति बनाई। प्रदेश में राजस्व प्रशासन को सरल बनाया। हमारी इस कार्यप्रणाली और विश्वसनीयता के कारण खनिज, कृषि- उपज, वनोपज जैसे अन्य संसाधनों के बारे में निवेशकों की समझ बढ़ी। यही वजह है कि जब दुनिया में आर्थिक तंगी का शोर था तब हमारे छत्तीसगढ़ के बाजारों में जोर था। हमारी जमीनी सोच और वास्तविकता के धरातल पर रहकर, सही कदम उठाने की नीतियों से ही छत्तीसगढ़ दुनिया का पसंदीदा निवेश स्थल बन रहा है। मुझे विश्वास है कि इसी रास्ते पर चलते हुए अनेक नए ब्रांड छत्तीसगढ़ की धरती से ही उपजेंगे। गांव-गांव में महिला स्व-सहायता समूह तथा प्रतिभावान युवाओं के नवाचार से एक नया रास्ता बनना शुरू हो चुका है।
एंकर
– माननीय मुख्यमंत्री जी, बात ‘डेनेक्स’ से निकली है तो उसे दूर तक पहुंचाने के लिए भी कुछ श्रोता अपने विचार लेकर सामने आए हैं। आइए सुनते हैं। बस्तर की नई फिजा के बारे में उनकी राय।
1. मनीष मूल चन्दानी, जिला-बस्तर
मैं मनीष मूल चन्दानी। बस्तर जैसे दूरस्थ अंचल में वायुयान का होना बहुत सुखद लग रहा है। क्योंकि जगदलपुर से 300 किलोमीटर रायपुर और यहां से साढ़े पांच सौ किलोमीटर हैदराबाद का सफर चारपहिया वाहन में काफी समय लग जाता है। ऐसे में हवाई जहाज का यहां पर होना बेहद ही सुखद है क्योंकि आपातकाल में किसी घटनावश यह डेढ़ से दो घण्टे में उस जगह में पहुंचा देता है, जिसकी वजह से स्वास्थ्य लाभ होता है। यह हमारा बस्तर संभाग संवेदनशील क्षेत्र है। सभी जानते हैं। यहां पर स्वास्थ्य सेवाओं की काफी कमी है। तो इसके चलते हवाई जहाज की जो सेवा है, छत्तीसगढ़ के जगदलपुर में दी जा रही है, वो काफी सराहनीय है।
2. रेणुकांत जोशी-जिला बस्तर
सर नमस्कार, मैं बस्तर जिले के कुम्हड़ावन से रेणुकांत जोशी बोल रहा हंू। लोकवाणी कार्यक्रम में आपसे बात करके काफी अच्छा लग रहा है। मुख्यमंत्री जी, आपको बताना चाहता हूं कि आपके द्वारा जगदलपुर के सबसे पुराने अस्पताल महारानी अस्पताल में स्वास्थ्य सुविधाएं बेहतर की गई हैं। अस्पताल भवन भी अब काफी सुंदर बन गया है। और साफ-सफाई भी अब पहले से काफी बेहतर हो गई है। महारानी अस्पताल में पहले स्वास्थ्य सुविधाएं बहुत ही कम थीं और वहीं भवन परिसर भी खराब स्थिति में थे। अब महारानी अस्पताल को किसी सर्वसुविधायुक्त और निजी अस्पताल के जैसा बनाया गया है और यहां स्टॉफ का व्यवहार भी अब काफी अच्छा लग रहा है। संभाग के सबसे पुराने महारानी अस्पताल का गौरव वापस दिलाने के लिए आपका आभार है, मुख्यमंत्री जी।
माननीय मुख्यमंत्री जी का जवाब
– धन्यवाद मनीष जी, रेणुकांत जी, आपकी बातें सुनकर अच्छा लगा। बस्तर से ऐसी खबरें सुनने के लिए बरसों से हमारे कान तरस रहे थे।
– मेरा मानना है कि नीति आयोग देश के 115 आकांक्षी जिलों की डेल्टा रैंकिंग में बीजापुर को पहला स्थान देता है। अलग-अलग मापदण्डों में जब कोण्डागांव, नारायणपुर, सुकमा जैसे जिले, देश में अव्वल आते हैं तो इसके पीछे किसी अधोसंरचना का योगदान होता है। जब लॉकडाउन के दौरान बस्तर से देश की सर्वाधिक वनोपज खरीदी होती है या पूरे प्रदेश में समर्थन मूल्य पर धान खरीदी का नया कीर्तिमान बनता है तो भी एक अधोसंरचना ही काम करती है। हमने मानव विकास की जिस अधोसंरचना के निर्माण का सपना देखा है। उसकी चमक आपको सड़कों पर दिखे या न दिखे, हमारे प्रदेश के ग्रामीणों, अनुसूचित जनजाति, अनुसूचित जाति और पिछड़े वर्ग, कमजोर और मध्यम वर्ग, माताओं, बहनों, बच्चों, जवानों की आंखों में दिखने लगी है और इसी चमक के रास्ते से पूरा प्रदेश, एक नई तरह की जगमगाहट पैदा कर रहा है। यही है हमारा ‘गढ़बो नवा छत्तीसगढ़।’
धन्यवाद।
एंकर
– अब लोकवाणी का आगामी प्रसारण 14 मार्च, 2021 को होगा। जिसमें माननीय मुख्यमंत्री जी के साथ महिलाओं अर्थात नारी शक्ति की बातचीत का प्रसारण किया जाएगा। 24, 25 एवं 26 फरवरी, 2021 को फोन नम्बर 0771-2430501, 2430502, 2430503 पर अपरान्ह 3 से 4 बजे के बीच फोन करके आप अपने विचार, सुझाव, सवाल रिकार्ड करा सकते हैं।
