रायपुर. धमतरी की जमीन पर साल में दो बार मखाना की खेती की जा सकती है। अपार संभावनाओं से भरी जमीन पर खेती का प्रयोग सफल रहा है। प्रायोगिक तौर पर की गई खेती का नतीजा सकारात्मक आते ही विभाग सक्रिय हो गया है। कृषि विज्ञान केंद्र धमतरी में राष्ट्रीय उद्यानिकी बोर्ड की टीम ने क्षेत्र का निरीक्षण किया।टीम मेें सतीश कुमार शर्मा (डिप्टी डायरेक्टर राष्ट्रीय उद्यानिकी बोर्ड) एवं इंद्रमोहन वर्मा (रिटायर्ड प्रोफेसर एसकेआरएयू बीकानेर राजस्थान) शामिल हुए। टीम में शामिल अधिकारियों ने जलीय फसल मखाना एवं सिंघाड़ा की नर्सरी को देखा। कृषि विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक प्रमुख डाक्टर एसएस चंद्रवंशी ने केंद्र में लगे मखाना एवं सिघाड़ा की फसल को दिखाया।मखाना एवं सिंघाड़ा जलीय फसल है। जिस जगह पर जल भराव होता है। उन जगहों पर इसे साल में दो बार ले सकते है। 23 डबरी में मखाना की फसल लगी हुई है। 30 से 40 एकड़ के लिए नर्सरी तैयार है। इस नर्सरी को जिले के विभाग, कृषक एवं अन्य जिले के विभाग एवं कृषकों को उपलब्ध कराया जाएगा। मखाना के पौध रोपाई से लेकर बीज संग्रहण की विधि के बारे जानकारी दी गई। डाक्टर चंद्रवंशी ने बताया की सिंघाड़ा फसल एक हेक्टेयर में लगी हुई है। यह लाल सिंघाड़ा के रूप में जाना जाता है, जो खाने में स्वादिष्ट एवं मिठास युक्त होता है। बाजार में इसकी हमेशा मांग रहती है। टीम ने राष्ट्रीय बांस मिशन योजना अंतर्गत लगे बांस की प्रजाति, बकरी पालन इकाई, मुर्गी पालन इकाई, बतख इकाई एवं मछली पालन इकाई की प्रशंसा की।
