बिलासपुर। रायपुर के बिरकोनी क्षेत्र में पायरोलिसिस प्लांट के कारण वायु प्रदूषण का खतरा बढ़ गया है। इस मामले में हाई कोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई है। प्रकरण की सुनवाई करते हुए युगलपीठ ने प्रदेश की सभी संबंधित निजी फैक्ट्री संचालकों को भी पक्षकार बनाने के बाद शीघ्र जवाब प्रस्तुत करने कहा गया है। मामले की सुनवाई 17 मार्च को होगी।रायपुर जिले के बिरकोनी क्षेत्र में बड़े पायरोलिसिस प्लांट में होने वाले वायु प्रदूषण से रिहायशी इलाके के लोग परेशान हैं। वहीं फैक्ट्री में काम करने वाले श्रमिक भी बीमार हो रहे हैं। इस प्लांट में टायर गलाकर आइल निकाला जाता है। इसका उपयोग सड़क निर्माण में किया जाता है। स्थानीय निवासी ईश्वर साहू ने वकील हर्षवर्धन परगनिहा के माध्यम से इस मामले में एक जनहित याचिका दायर की है। इसमें बताया है कि पायरोलिसिस प्लांट से वायु प्रदूषण का खतरा बढ़ गया है। जबकि नियमानुसार प्लांट शुरू करने के लिए पर्यावरण प्रदूषण मंडल के निरीक्षण के बाद लाइसेंस जारी किया जाता है। इसके साथ ही पर्यावरण प्रदूषित न हो इसके लिए संयंत्र भी लगाए जाते हैं। जबकि यहां प्लांट संचालित करने के लिए लाइसेंस तक नहीं ली गई है। इस मामले में पिछली सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस पीआर रामचंद्र मेनन व जस्टिस पीपी साहू की युगलपीठ ने इस तरह के प्रदेशभर में संचालित फैक्ट्री संचालकों को पक्षकार बनाने के निर्देश दिए थे। याचिका में शासन व पर्यावरण प्रदूषण मंडल के साथ ही निजी फैक्ट्री संचालकों को भी पक्षकार बनाया गया है। बुधवार को हुई सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने सभी निजी संचालकों को शीघ्र जवाब प्रस्तुत करने के लिए नोटिस जारी किया है। याचिका में स्पष्ट किया गया है कि फैक्ट्री में हाथ से काम किया जाता है, जिससे श्रमिकों को ज्यादा परेशानी होती है। इसका निवारण किया जाना चाहिए। इसी तरह शासन व पर्यावरण मंडल को इस तरह की फैक्ट्रियों के संबंध में गाइडलाइन जारी की जानी चाहिए।






