रायपुर। छत्तीसगढ़ राज्य ओपन स्कूल की किताबें को लेकर गुरुवार को ओपन स्कूल दफ्तर में किताबों पर विश्लेषण कार्यशाला रखी गई। प्रदेशभर में जहां स्कूली शिक्षा के स्तर को बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है, वहीं छत्तीसगढ़ राज्य ओपन स्कूल के परिणाम से अफसर चिंतित हो उठे हैं। ओपन स्कूल ने 2016-17 से नया सिलेबस लागू कर दिया है। नया सिलेबस काफी कठिन है। नतीजतन पिछले तीन साल से ओपन स्कूल से दसवीं-बारहवीं में महज 40-50 फीसद परीक्षार्थी ही पास हो रहे हैं।इसे देखते हुए ओपन स्कूल के अफसर अब विशेषज्ञों से राय ले रहे हैं कि सिलेबस में किन-किन चीजों को हटाया जा सकता है और किन-किन चीजों को जोड़ा जा सकता है। ओपन स्कूल के गिरते परिणाम को देखकर विशेषज्ञों ने सुझाव दिया है कि ओपन स्कूल में संपर्क कक्षाएं तीन बार होनी चाहिए। इनमें पहली संपर्क कक्षाएं तीन दिन, फिर पांच दिन और तीसरी संपर्क कक्षा भी पांच दिन का होना चाहिए। संपर्क कक्षाओं के लिए शिक्षकों का मानदेय भी बढ़ाने का सुझाव दिया गया है। शिक्षाविदों ने बताया कि ओपन स्कूल में नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ ओपन स्कूलिंग (एनआइओएस) का सिलेबस लागू किया गया। पिछले तीन साल से इसी सिलेबस से परीक्षा हुई। दसवीं-बारहवीं दोनों की परीक्षा एनआईओएस की किताबों पर आधारित रहीं और परिणाम भी बेहद खराब रहा है। पिछले सालों में राज्य ओपन स्कूल से परीक्षा देने वाले छात्रों का क्रेज बढ़ा है। इसकी वजह अब यहां से उत्तीर्ण होने वाले परीक्षार्थियों को इंजीनियरिंग और मेडिकल के विभिन्न संस्थानों में दाखिले के लिए पात्रता मिल चुकी है। यहां से उत्तीर्ण होने वाले परीक्षार्थी एग्रीकल्चर संस्थानों में भी दाखिला ले रहे हैं। बता दें कि ओपन स्कूल में साल 2009 में शुरुआत के बाद पहले साल 10वीं, 12वीं में राज्य से 42 हजार 197 बच्चों ने परीक्षा दी थी। इसके बाद साल 2010 में 53 हजार 195, अगले साल 2011 में 77 हजार 732, फिर 2012 में 78 हजार 767, 2013 में एक लाख 23 हजार 992, 2014 में एक लाख 24 हजार 313, साल 2015 में एक लाख 93 हजार 99, साल 2016 में एक लाख 63 हजार 168, साल 2017 में एक लाख 80 हजार, साल 2018 में एक लाख 80 हजार 589, साल 2019 में एक लाख 54 हजार और 2020 में डेढ़ लाख परीक्षार्थी शामिल हुए थे।
