Home छत्तीसगढ़ राजनांदगांव : वन-वृक्ष हमारी सभ्यता-संस्कृति के परम रक्षक – द्विवेदी

राजनांदगांव : वन-वृक्ष हमारी सभ्यता-संस्कृति के परम रक्षक – द्विवेदी

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राजनांदगांव | शासकीय कमला देवी राठी महिला स्नातकोत्तम महाविद्यालय राजनंादगांव में संस्था प्राचार्य डॉ. आलोक मिश्रा के प्रमुख निर्देशन में भूगोल एवं विज्ञान संकाय के संयुक्त संयोजन में विश्व वानिकी दिवस के महत्तम परिप्रेक्ष्य में जनजागरण विचार-विमर्श आयोजित किया गया। प्रमुख वक्ता के रूप में डॉ. कृष्ण कुमार द्विवेदी पर्याविज्ञ ने छात्राओं को बताया कि संपूर्ण विश्व जगत में प्रकृति एवं मानव के परस्पर संतुलन के मूल आधार स्तंभ प्राकृतिक वन ही है। वनों से ही पारिस्थितिक तंत्र का एक अत्यंत आवश्यक भाग पूर्ण हो पाता है। मानव की समग्र जीवनचर्या में वन-वृक्षों का विशेष महत्व रहता है। प्राकृतिक वनों से ही एक साथ मनुष्य को विभिन्न प्रकार के फल-फूल, वनस्पत्तियां, औषधियां एवं जड़ी-बूटियां प्राप्त होती है। सबसे महत्वपूर्ण प्राण-वायु आक्सीजन की आपूर्ति पेड़-पौधों से ही होती है। सनातन काल से हमारी हिन्दू संस्कृति में वृक्षों को देव तुल्य मानते हुए इनके पूजन-वंदन-अराधन की गौरवशाली परंपरा रही है। वास्तविकता में प्राकृतिक अरण्य-वन-वृक्ष ही मानव सभ्यता-संस्कृति के परम रक्षक हैं। जिनका वर्तमान गहराते पर्यावरणीय संकट के निदान में इनका संरक्षण ही प्राथमिक आवश्यकता है। हर हाल में प्रत्येक जन-जन एवं युवा-किशोर-प्रौढ़ पीढ़ी को वन-वृक्ष संरक्षण के लिए आगे आकर पूर्ण मन-प्राण से संकल्पित होना होगा और विशेष पहल करनी होगी। इस अवसर पर विचार-विमर्श में समस्त सहभागी छात्राओं एवं प्राध्यापकाओं ने वन-वृक्षों के संरक्षण की शपथ ली और वन संपदा संरक्षण संबंधी प्रेरक नारे भी लगाये।

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