छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल ने महात्मा गांधी के मंत्र पर सुराजी गांवों की कल्पना को जो मूर्त रूप दिए जाने की शुरुआत की, उसके नतीजे अब दिखने लगे हैं। दुर्ग जिले के ग्राम केसरा में 14 एकड़ में नरवा, गरुवा, घुरूवा, बाड़ी योजना से जो बाड़ी लगाई गई, वो लोगों के लिए बहुत उपयोगी साबित हुई। लॉकडाउन के दौरान 6 स्वसहायता समूह की महिलाओं ने बाड़ी में अनेक तरह की सब्जी लगाई है। लॉकडाउन के दौरान इस बाड़ी से ग्रामीणों को सहजता से सब्जी-भाजी उपलब्ध हुई है। लॉकडाउन के दौरान स्व-सहायता समूह से जुड़ी महिलाओं ने सपरिवार खुद भी विभिन्न प्रकार की सब्जी-भाजी खूब खाई और गांव के लोगों को भी ताजी सब्जी मिली। पाटन के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री मनीष साहू ने बताया कि हमारे किसान धान उगाते हैं लेकिन कोरोना जैसी आपदा से बचने प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने सब्जी भी चाहिए। बाड़ी के इस मॉडल ने यह विकल्प दे दिया है। लॉकडाउन या इस तरह की किसी भी परिस्थिति को झेलने आत्मनिर्भरता चाहिए। बाड़ी में सब्जी के बम्पर उत्पादन ने इस समस्या को दूर कर दिया। पशुचारे के लिए हमने नैपियर और मक्का भी लगाया है। इस प्रकार गौठान में गायों की देखरेख कर उनका नस्ल संवर्धन कर गांव में ही बेहतर आर्थिक अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में हम सफल हो रहे हैं। जय माँ दुर्गा महिला स्वसहायता समूह की सत्यभामा ने बताया कि 6 स्व-सहायता समूह की महिलाएं यहां काम कर रही हैं। सबसे ज्यादा उत्पादन भिंडी और भाजी का है। यह 10 क्विंटल हो रहा है। इस महीने स्वसहायता समूहों को 50 हजार रुपये की आय हुई। पाटन सीईओ ने बताया कि कलेक्टर श्री अंकित आनंद एवं जिला पंचायत सीईओ श्री कुंदन कुमार के मार्गदर्शन में केसरा में महिलाओं को बाड़ी के लिए प्रोत्साहित किया गया, इसके अच्छे नतीजे देखकर बहुत खुशी हो रही है। गांव के सरपंच श्री भागवत सिन्हा ने बताया कि पंचायत द्वारा स्वसहायता समूह की महिलाओं को निरंतर प्रोत्साहन दिया जा रहा है। लॉक डाउन के दौरान ग्रामीणों को किसी तरह की दिक्कत न हो, इसका भी ध्यान रखा गया है। समूह के लोग बहुत खुश हैं। जय माँ दंतेश्वरी समूह की अध्यक्ष श्रीमती रामबती ने बताया कि हम सब महिलाएं आर्थिक रूप से सशक्त हो रही हैं। संकट के इस समय में गांव सब्जी के मामले में आत्मनिर्भर रहा और सबने हम लोगों की सराहना की। यह सब सोचकर बहुत खुशी मिलती हैं।
