रायपुर। नगर पंचायतों को फिर से ग्राम पंचायत बनाने के मामले में एक बार फिर राज्य सरकार और राजभवन के बीच टकराव बढ़ने के आसार नजर आ रहे हैं। राज्यपाल अनुसुइया उइके ने अधिसूचित क्षेत्रों में नगर पंचायत गठन को लेकर किए गए कार्यों की जानकारी मांगी है। राज्यपाल राज्य सरकार के अधिकारियों के जवाब से संतुष्ट नहीं हुई और 1 सप्ताह के भीतर सरकार के अधिकारियों से रिपोर्ट मांगी है।
अनुसुइया उइके ने चार नगर पंचायतों को दोबारा ग्राम पंचायत बनाने के अफसरों को निर्देश दिए हैं। इस मामले में राज्य सरकार और राजभवन के बीच टकराव बढ़ने के आसार हैं। राज्यपाल ने अंकारडौंडी, प्रेमनगर, नरहरपुर और बड़े बचेली को दोबारा ग्राम पंचायत बनाने के निर्देश दिए हैं।चारों नगर पंचायतों के लोगों ने ग्राम पंचायत को नगर पंचायत बनाने का विरोध किया था। स्थानीय लोगों के आवेदन के आधार पर राज्यपाल ने दोबारा ग्राम पंचायत घोषित करने के लिए कहा है।
छत्तीसगढ़ में यह पहला मौका नहीं है जब राजभवन और सरकार के बीच टकराव के आसर नजर आ रहे हैं। पिछले डेढ़ साल में कई मुद्दों पर सरकार और राजभवन आमने-सामने हो चुके हैं। राज्यपाल अनुसुईया उइके ने पदभार संभालने के बाद गरियाबंद के सुपेबेड़ा में किडनी की बीमारी से हो रही मौत को लेकर सुपेबेड़ा के दौरे पर जाने का फैसला किया। उस समय राज्यपाल को सरकार हेलीकाप्टर नहीं मिल रहा था, जिसके बाद राज्यपाल ने सड़क मार्ग से जाने की घोषणा की। हालांकि बाद में सरकार ने हेलीकाप्टर उपलब्ध कराया और स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव उनके साथ सुपेबेड़ा गए। वहां पानी की गुणवत्ता को सुधारने और सरकार अस्पताल को मजबूत करने का निर्णय लिया गया। इसके बाद प्रदेश में कुलपति के चयन और अधिकार को लेकर राज्यपाल ने आपत्ति दर्ज कराई। इससे संबंधित आठ विधेयक अब भी राजभवन में लंबित हैं।भाजपा सरकार में भी आदिवासी क्षेत्रों में बनी थी नगर पंचायतआदिवासी क्षेत्रों में भाजपा सरकार में भी नगर पंचायत और नगर पालिका का गठन किया गया था। राज्यपाल ने उन सभी नगर पंचायतों को लेकर भी आपत्ति दर्ज कराई थी और कानूनी विशेषज्ञों की राय ली थी। दरअसल, राज्यपाल से सर्व आदिवासी समाज के प्रतिनिधिमंडल ने शिकायत की थी कि अनुसूचित क्षेत्रों में नगर पंचायत बनाने के आदिवासियों के हितों का संरक्षण नहीं हो पा रहा है।
