राजनांदगांव. शहर के बने मातृ एवं शिशु अस्पताल में आज फिर एक बच्चे की मौत पर परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन पर लापरवाही का आरोप लगाया है।
आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लोगों के लिए सरकारी अस्पताल ही उनका जीवन रक्षक होता है लेकिन सरकारी अस्पताल में भी जब इलाज का अभाव महसूस हो तो आखिर मूफलीसी के मारे लोग कहां जाएं। बीते कुछ समय से राजनांदगांव शहर में बने मातृ एवं शिशु अस्पताल में लापरवाही का मामला सामने आ रहा है। बीते दिनों यहां एक गर्भवती माता और बच्चे की मौत के बाद परिजनों ने अस्पताल स्टाफ की लापरवाही को उजागर किया था, वहीं अब पानाबरस क्षेत्र से आए एक परिवार ने अपने बच्चे की मौत पर एक बार फिर से अस्पताल प्रबंधन की लापरवाही को सामने ला कर रखा है। पानाबरस निवासी अजीत कुमार व अनुपमा कचलाम का कहना है कि बच्चे को सांस लेने में दिक्कत हो रही थी जिसे उन्होंने कई बार वहां मौजूद नर्स और डॉक्टर से भी बताया लेकिन उन्हें वार्ड से निकाल दिया गया और बच्चे को ऑक्सीजन भी नहीं लगाया। बच्चे के परिजनों का कहना है कि आक्सीजन नहीं लगाने के चलते बच्चे की मौत हो गई है। समय पर उचित इलाज मिलता तो शायद वह बच गया होता।
राजनांदगांव शहर में बने हैं मातृ एवं शिशु अस्पताल में आए दिन वहां की व्यवस्था को लेकर सवाल उठते हैं। अस्पताल स्टाफ का रुखा व्यवहार व इलाज के प्रति ध्यान नहीं देने का भी मामला कई बार सामने आया है। अक्सर परिजनों ने इस अस्पताल की खराब व्यवस्था को लेकर आवाज बुलंद की है, लेकिन शासन प्रशासन के द्वारा अब तक इस और ध्यान ना देना व संबंधितों के खिलाफ कार्यवाही नहीं होने के चलते इस तरह के मामले अब आम होने लगे हैं।
