राजनांदगांव:- आयुक्त का दुर्व्यवहार और गठुला मुक्तिधाम निर्माण विवाद शांत होने का नाम नही ले रहा। विवाद अधिकारियो की तानाशाही रवैय्ये के कारण और बढ़ते दिख रहा है। आज SDM कार्यालय में प्रतिनिधि मंडल का बैठक बुलाया गया था जिसमे जिला पंचायत सभापति अशोक देवांगन, भाजपा नेता रविन्द्र सिंह जी, सरपंच संघ अध्यक्ष नोमेश वर्मा जी, सरपंच संघ के सचिव योगेश्वर निर्मलकर,जनपद सदस्य ललिता साहू,सरपंच गौरव बोरकर,ग्राम विकाश समिति के अध्यक्ष टिकेश्वर साहू बैठक में रहे जहां पर शमशान शेड निर्माण पर चर्चा हुई जिसमें प्रशासन से एस.डी.एम मुकेश रावटे, तहसीलदार व चिखली थाना प्रभारी मौजूद थे। जहाँ प्रतिनिधि मंडल को शेड निर्माण में आपत्ति क्यों है पर बात कर रहे थे तभी सरपंच ने कहा कि गांव वर्तमान चिखली मुक्तिधाम में दाहसंस्कार का बदबू जाता है और दूसरी बात पशु चराने हेतु उस जगह को सुरक्षित किया गया है यदि शेड बनेगा तो पशु चराने की समस्या उत्पन्न होगी। वही पयरव साँसाद प्रतिनिधि रविन्द्र सिंह ने पूछा कि पुराने मुक्तिधाम में जब 1 से 2 एकड़ की जगह है तो नए स्थल का चयन क्यों और वह भी भूमि तो गठुला का ही है जिस पर किसी भी अधिकारी ने जवाब नही दे सके। ग्रामीणों के तर्क का जवाब नही होने पर तहसीलदार द्वारा जबरदस्ती लाठी व बल प्रयोग की बात कही जिसपर सभापति अशोक देवांगन ने कहा कि यदि ऐसा हुआ तो ग्रामीणों द्वारा आंदोलन उग्र व हिंसक हो जाएगा ऐसी भूल ना करे प्रशासन अन्यथा बहुत भयानक दुष्परिणाम होगा
जिसके जिम्मेदार प्रशासन की होगी। वही सरपंच संघ के अध्यक्ष ने कहा कि आखिर प्रशासन गठुला में ही मुक्तिधाम बनाने की जिद क्यों है जबकि पुराने मुक्तिधाम के पास पर्याप्त जगह उपलब्ध है जहा पर दाहसंस्कार में रुकावट नही है जबकि वह जमीन भी गठुला का ही है। प्रशासन की मनमानी व जिद्दी स्वभाव समझ से परे है आखिर क्यों विरोध के बावजूद मुक्तिधाम निर्माण पर दबाव डालने का प्रयास कर रही है। जबकि निर्माण से एक दिन पूर्व चिखली के लोगों ने कोविड 19 मृतको को जलाने पर आपत्ति दर्ज किया था उसके दूसरे दिन ही गठुला में बिना किसी के जानकारी में ही नया मुक्तिधाम बनाना शुरू कर दिए जहाँ आयुक्त भी मौजूद थे।
आयुक्त की मौजूदगी से यह स्पष्ठ होता है कि चिखली के लोगों के विरोध के कारण ही नया मुक्तिधाम बनाया जाना सत्ता पक्ष के किसी बड़े नेता के इशारे पर होना प्रतीत होता है। कुल मिलाकर देखा जाए तो आयुक्त के दुर्व्यहार के कारण ही इतना विरोध प्रशासन को झेलना पड़ रहा है। जिसका आक्रोश सरपंच संघ में भी दिख रहा है। कुल मिलाकर देखा जाए तो ग्रामीण किसी भी स्थिति में मुक्तिधाम निर्माण नही होने देने की बात कर रहे है भले ही उनको धरना प्रदर्शन कर जेल ही जाना क्यों न पड़े। वही सरपंच संघ ने भी आयुक्त के दुर्व्यहार पर कार्यवाही की मांग कलेक्टर से किये है। कार्यवाही नही हिने पर आंदोलन की चेतावनी भी दिया गया है। एक अधिकारी के कारण आज पूरा प्रशासन को विरोध झेलना पड़ रहा है। अब जांच के बाद आयुक्त पर क्या कार्यवाही होगा यह देखना है।
