स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर कलेक्ट्रेट परिसर दुर्ग में गढ़कलेवा का शुभारंभ कृषि एवं जल संसाधन मंत्री श्री रविन्द्र चौबे ने किया। गढ़कलेवा में छत्तीसगढ़ के परंपरागत व्यंजन ठेठरी, खुरमी, बड़ी, बिजौरी आदि के साथ ही चीला-फरा का लोग लुत्फ उठा सकेंगे। गढ़कलेवा की शुरूआत छत्तीसगढ़ शासन की मंशा की अनुरूप जिला प्रशासन द्वारा गया है। गढ़कलेवा का संचालन एनयूएलएम के स्व-सहायता समूह द्वारा किया जाएगा। कलेक्ट्रेट परिसर में आने वाले नागरिकों को और कलेक्ट्रेट परिसर में काम कर रहे अधिकारी-कर्मचारियों को छत्तीसगढ़ी नाश्ता मिल सके, इस उद्देश्य से गढ़कलेवा आरंभ किया गया है। मंत्री रविन्द्र एवं अन्य अतिथियों ने गढ़कलेवा की संचालक स्व-सहायता समूह की महिलाओं के आग्रह पर छत्तीसगढ़ी व्यंजन का जायका लिया और उनके द्वारा तैयार व्यंजन के स्वाद की सराहना की।
उल्लेखनीय है कि कलेक्ट्रेट से भी अधिकारी-कर्मचारियों की इच्छा थी कि छत्तीसगढ़ी व्यंजनों को लेकर गढ़कलेवा इस परिसर में शुरू हो। कलेक्ट्रेट परिसर में बड़ी संख्या में जिले के विभिन्न अंचलों से लोग अपने काम के सिलसिले में आते है। गढ़कलेवा की शुरूआत हो जाने के कारण उन्हें सहजता से कलेक्ट्रेट परिसर में ही रियायती दर पर छत्तीसगढ़ी व्यंजन उपलब्ध हो सकेगा। लोगों को जलपान के लिए कलेक्टर परिसर से बाहर जाने की आवश्यकता नहीं होगी। गौरतलब है जिला प्रशासन दुर्ग द्वारा छत्तीसगढ़ी व्यंजनों को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से शासकीय आयोजनों में नाश्ते में छत्तीसगढ़ी व्यंजन परोसे जा रहे हैं। बड़े आयोजनों में छत्तीसगढ़ी व्यंजनों के स्टॉल भी लगाए जा रहे हैं। इनके माध्यम से छत्तीसगढ़ी व्यंजनों को प्रचार-प्रसार तो मिलता ही है इन्हें बनाने वाली स्व-सहायता समूहों की महिलाओं की भी अच्छी खासी आय हो जाती है। कलेक्ट्रेट कार्यालय में गढ़कलेवा आरंभ होने से शहर के बिल्कुल मध्यस्थल में ही लोगों को छत्तीसगढ़ी व्यंजन उपलब्ध हो सकेंगे। गढ़कलेवा के संचालन के लिए आधारिक संरचना तैयार करने का काम प्रशासन ने किया है। इसका संचालन स्व-सहायता समूहों द्वारा किया जाएगा। नागरिकों को स्वादिष्ट नाश्ता तो मिलेगा ही, लोगों को भी इसके माध्यम से रोजगार मिल सकेगा।
