राजनांदगांव शहर में 230 करोड़ रुपए का अमृत प्रोजेक्ट कागजों में पूरा हो गया है। नगर निगम के अफसरों का दावा है कि प्रोजेक्ट का 90 फीसदी काम पूरा कर लिया गया है। लेकिन धरातल में स्थिति कुछ और ही है। कई ऐसी खामियां हैं, जिन्हें दूर करने का प्रयास भी नहीं किया जा रहा है।
प्रोजेक्ट के तहत शहर के हर हिस्से में पाइप लाइन का विस्तार किया गया। इन्हें नई बनी ओवरहेड टंकियों से इंटरकनेक्ट किया गया। लेकिन इसके बाद फोर्स की दिक्कत और बढ़ गई है। नलों में पहले जितना भी फोर्स नहीं आ रहा है। यह स्थिति ठंड के दिनों में हैं। गर्मी में इसकी समस्या और बढ़ने वाली है। इसकी शिकायत भी पार्षदों ने निगम प्रशासन से की है। लेकिन अब तक इसमें सुधार को लेकर कुछ नहीं किया गया है। सबसे अधिक समस्या ममता नगर, तुसीलपुर, कन्हापुरी, चिखली और लखोली के इलाकों में हैं। लोगों की शिकायत है कि पुरानी पाइप लाइन से इस हिस्से में जैसा पानी आ रहा था, वह नया पाइप बिछने के बाद और कम हो गया है।
पाइप लाइन को इंटरकनेक्ट करने के दौरान ऐसी गड़बड़ी हुई हैं। उल्टे प्रोजेक्ट का काम पूरा होने का दावा किया जा रहा है। प्रोजेक्ट के पूर्णता को लेकर प्रक्रिया भी शुरू हो गई है। ईई यूके रामटेके ने बताया कि अमृत प्रोजेक्ट का काम पूरा होने की स्थिति में हैं, जिस हिस्से में शिकायतें हैं, उन्हें दूर किया जा रहा है। शेष काम भी तेजी से पूरा किया जा रहा है।
जिन स्थानो ंपर समस्या वहां पर टैंकरों का लिया सहारा पाइप लाइन बिछाने और इससे सप्लाई का काम गर्मी से पहले ही पूरा कर लिया गया था। लेकिन जिन हिस्सों में यह काम पूरा करने का दावा किया गया, वहां गर्मी में टैंकरों से पानी भेजना पड़ा था। इसकी वजह फोर्स की कमी और जररुत के मुताबिक पानी नहीं आना था। निगम के अफसरों ने इसके लिए अमृत प्रोजेक्ट की कंपनी को सुधार की बात कही थी, लेकिन पूरी गर्मी में पाइप लाइन की बजाए टैंकरों से भी पानी की आपूर्ति होती रही। शिकायतें थी कि नई पाइप लाइन के बाद दिक्कत और बढ़ गई है।
हर घर लगना है मीटर, 50 फीसदी भी नहीं हो सका अमृत प्रोजेक्ट के तहत हर घर में मीटर भी लगना है। इसी मीटर से पानी की खपत आंकी जाएगी, जिसके तहत शुल्क लिया जाना है। हर कनेक्शन में मीटर लगाने की जिम्मेदारी प्रोजेक्ट के तहत ही है। लेकिन अब तक 50 फीसदी घरों में भी मीटर नहीं लग पाया है। इसके अलावा कुछ और नई कालोनियां ऐसी भी हैं, जहां अब तक पाइप लाइन नहीं पहुंची हैं। जिसके लिए खुदाई की गई है, लेकिन यह काम भी धीमी गति से चल रहा है।
खरखरा जलाशय से पानी का मामला केंद्र तक पहुंचा इधर अमृत प्रोजेक्ट के तहत बालोद के खरखरा जलाशय से पानी लेने का मामला केंद्र तक पहुंच गया है।
खरखरा से पानी लाने के लिए पाइप बिछ चुकी है। लेकिन विरोध के बाद जलाशय से पानी देने पर बालोद प्रशासन ने रोक लगा दी। जलाशय की ऊंचाई बढ़ाने के बाद ही पानी देने की सहमति बनी है। जिसके लिए करीब 80 करोड़ खर्च होना है। निगम ने इसके लिए केंद्र को पत्र लिखकर मदद मांगी है। केंद्र से सहमति और बांध की ऊंचाई बढ़ने तक यह पाइप भी बेकार ही साबित होगी।
