बालोद जिले के शहरी से लेकर ग्रामीण क्षेत्र में वर्तमान में हो रही बाल क्रीड़ा प्रतियोगिता चर्चा का विषय बनी हुई है। दरअसल शासन व शिक्षा विभाग के फरमान के बाद यह आयोजन तो हो रहा है, लेकिन फंड नहीं है। लिहाजा शिक्षकों को जनसहयोग से राशि का जुगाड़ करने की नौबत आ रही है। जनसहयोग के बाद भी प्रतियोगिता कराने आर्थिक तंगी आ रही है, तो शिक्षकों को आपस में चंदा कर वेतन का पैसा लगाना पड़ रहा है।
शिक्षा विभाग की ओर से संकुल से लेकर जिला स्तरीय प्रतियोगिता के लिए प्राथमिक स्कूल के लिए 200 रुपए और माध्यमिक स्कूल के लिए 300 रुपए शुल्क तय किया गया है, यानी प्रधानपाठक को तय राशि जमा करनी पड़ेगी। संकुल अंतर्गत 5 से 6 स्कूल आते हैं। स्कूल प्रबंधन से मिली राशि को भी तीन भागों में विभाजन किया गया है। 50% राशि को संकुल स्तर पर खर्च करना है। जबकि 25% राशि को ब्लॉक व 25% राशि को जिला स्तरीय प्रतियोगिता के लिए खर्च करना है। इसके बावजूद राशि कम पड़ रही है।
वजह यह है कि स्कूलों से जितनी राशि मिल रही है, उससे 10 गुना ज्यादा प्रतियोगिता कराने में खर्च हो रहा है। नौकरी का सवाल है इसलिए शिक्षक ज्यादा कुछ कह नहीं पा रहे हैं। आप बघमरा संकुल अंतर्गत दो माध्यमिक शाला बघमरा व खरथुली और प्राथमिक शाला मेड़की, बघमरा, पर्रेगुड़ा, ओरमा, खरथुली, भोथली में संचालित हो रहा है। तय शुल्क अनुसार दो माध्यमिक स्कूल से 300 रुपए के हिसाब से 600 रुपए और 6 प्राथमिक शाला से 200 रुपए के हिसाब से 1200 रुपए प्राप्त हुए। कुल 8 स्कूल के माध्यम से 1800 रुपए मिले।
इसमें 50% राशि यानी 900 रुपए संकुल स्तर पर और 450 रुपए ब्लॉक और 450 रुपए जिला स्तर पर खर्च करना है। जबकि संकुल स्तर पर ही 25 हजार रुपए खर्च हो गए। खेल में प्रथम व दूसरा स्थान प्राप्त करने वाले बच्चों को इनाम देने में 12 हजार रुपए, टेंट(पंडाल) व माइक का 6 हजार रुपए किराया, चूना, स्टेशनरी सामान में 5 हजार रुपए, नाश्ता में 1200 रुपए व फूल माला सहित अन्य खर्च 800 रुपए हुए। अब बाकि पैसा कहां से लाएं इसलिए जनसहयोग से करना पड़ रहा है। छात्र-छात्राओं के लिए इन दिनों शालेय बाल क्रीड़ा प्रतियाेगिता कराई जा रही है। सीधी बात मुकुल केपी साव, डीईओ
हर बच्चे को इनाम देने की नौबत क्यांेकि संकुल स्तर पर आयोजित प्रतियोगिता में दो से तीन माध्यमिक शाला के बच्चे प्रतिभागी बनकर शामिल होते हैं। ऐसे में दो टीम होने से पहला व दूसरा स्थान प्राप्त करने पर इनाम देना ही पड़ता है। इनाम स्वरुप थाली, गिलास, चम्मच देते हैं। कबड्डी, खो-खो, रिले-रेस, फुगड़ी, रस्सी खींच में ज्यादा प्रतिभागी शामिल होते हैं, तो इसी हिसाब से इनाम की व्यवस्था करनी पड़ती है। शिक्षा विभाग के अनुसार 9 प्रतिभागी कबड्डी, 12 प्रतिभागी खो-खो, 4 प्रतिभागी रिले-रेस, 9 प्रतिभागी रस्सा-खींच में शामिल हो सकेंगे।
{ प्रतियोगिता कराने फरमान तो जारी हुआ लेकिन फंड नहीं है, ऐसा क्यों? – स्कूल स्तर से मिलने वाली राशि व जनसहयोग से स्पर्धा कराने कहा गया है, इसके लिए शासन व विभाग से फंड जारी नहीं होता। { स्कूल स्तर से जितनी राशि मिल रही, उससे 10 गुना ज्यादा पंडाल, माइक, इनाम देने में खर्च हो रहा है? – खर्च कम हो इसके लिए संकुल के बजाय सीधे जोन स्तर पर स्पर्धा कराने की प्लानिंग थी। { अगर जनसहयोग नहीं मिला तो क्या प्रतियोगिता नहीं हो पाएगी? – संकुल समन्वयक, शिक्षक अपने हिसाब से कैसे भी करके प्रतियोगिता करवा लेंगे।
संकुल समन्वयक लोमस साहू ने बताया कि मेड़की के मैदान में तीन दिन तक प्रतियोगिता कराने में 20 हजार रुपए से ज्यादा खर्च हुए। ग्राम समिति, ग्राम पंचायत, स्कूल व जनसहयोग से आयोजन हो पाया। सहायक शिक्षक फेडरेशन के जिलाध्यक्ष देवेंद्र हरमुख ने बताया कि शासन व विभागीय स्तर से फंड नहीं मिलता, ऐसे में जनसहयोग के बिना संकुल स्तर प्रतियोगिता कराना मुश्किल है। कई ग्राम पंचायत वाले सहयोग करने से इंकार कर देते हैं, ऐसे में शिक्षकों को अपने वेतन का पैसा लगाना पड़ रहा है।
