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राजनांदगांव : युद्धभूमि पर दिया गया गीता का उपदेश संसार का श्रेष्ठतम ज्ञान माना जाता है : गीताघासी साहू

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चिरचारी कला मे श्री कृष्ण जन्मोत्सव मे शामिल

राजनांदगांव खुज्जी विधानसभा के अंतर्गत आने वाले ग्राम चिरचारी कला में कृष्ण जन्मोत्सव बड़े ही हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। इस अवसर पर कार्यक्रम में खुज्जी विधानसभा क्षेत्र की अधिकृत भाजपा प्रत्याशी गीताघासी साहू के मुख्य अतिथि में हुआ।वरिष्ठ भाजपा नेता एम.डी. ठाकुर गोंडवाना महासभा प्रदेश अध्यक्ष, ललिता कंवर जिला पंचायत सदस्य, कंसुराम यादव अध्यक्ष यादव समाज जिला राजनांदगांव, पप्पू महाराज वरिष्ठ भाजपा नेता ,नरेंद्र दयोले  चिंताराम यादव,सराधु यादव, हिदय राम सिंहा, रेखचंद यादव, जिवधन साहू ,उमठी यादव, चेतन सिंहा,  कमलेश्वरी यादव, रिखी साहू, चिंता ठाकुर, सोनसाय यादव, सराधु यादव ,गोविंद यादव की आतिथ्य  में हुआ।

कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि भाजपा अधिकृत प्रत्याशी गीताघासी साहू ने भगवान श्री कृष्ण के प्रतिमा के समक्ष आरती उतारकर  पुजा अर्चना किया तत्पश्चा आयोजक समिति एवं ग्रामीणों ने  अतिथियों का स्वागत सम्मान बैच एवं गमछा भेटकर किया गया।खुज्जी विधानसभा क्षेत्र के भाजपा अधिकृत प्रत्याशी श्रीमती गीताघासी साहू ने समस्त क्षेत्रवासियों ,जिलेवासियों को कृष्ण जन्म उत्सव की बहुत-बहुत हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं देते हुए संबोधित करते हुए कहा की भगवान कृष्ण का जन्म भाद्र मास में कृष्ण पक्ष में अष्टमी तिथि को रात्रि में 12 बजे हुआ था। श्री कृष्ण का जन्म मथुरा के कारागार में हुआ था उनके माता देवकी और पिता वासुदेव की आठवीं संतान थे।एक दिन कंस ने आकाशवाणी सुना की देवकी का आठवां पुत्र द्वारा वह मर जाएगा इससे बचने के लिए कंस ने देवकी और वासुदेव को मथुरा के कारागार में डाल दिया था। भगवान श्री कृष्ण का बचपन वीरता और साहस  का प्रतीक है उन्होंने अनेको राक्षसों का वध करते हुए अपने मामा  कंस का वध किया और मथुरावासियों को उसके आतंक से मुक्त कर दिया। श्रीमती गीताघासी साहू ने आगे कहा कि कृष्ण का जीवन कहता है कि आप कोई भी हो संसार में आए हैं तो संघर्ष हमेशा रहेगा ।मानव जीवन में आकर परमात्मा भी सांसारिक चुनौतियों से बच नहीं सका है श्री कृष्ण ने कभी किसी बात का शिकायत नहीं की हर परिस्थितियों को जिया और जीता। युद्ध भूमि पर दिया गया गीता का उपदेश संसार का श्रेष्ठतम  ज्ञान माना जाता है। 

 इस अवसर पर चिंताराम यादव, गोविंद यादव ,भागवत यादव, हुमन यादव ,रामकुमार, प्रकाश, नारद ,शंकर, सुखदास ,लतेल, चिंताराम, खेदु राम, शिव राम, सोनसाय, पंचराम, छोटेलाल, सराधु, मदन, रामचंद्र ,शंकर, घनाराम,  भानसिंग, भारत, राधे लाल ,धनसिंह ,मोहन, सत्यदेव, उमेंद्र ,केशव, देवलु, रामप्रसाद, अर्जुन, बृजलाल ,महरु, चिंताराम, खोरबाहरा  सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण जन मौजूद रहे।

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