राजनांदगांव- प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के अंतर्गत खरीफ 2020 के लिए अधिसूचित फसलों का बीमा कराने के लिए 15 जुलाई अंतिम तिथि निर्धारित है। कृषि विभाग द्वारा इस संबंध में अधिसूचना जारी कर दी गई है। फसल को प्रतिकूल मौसम सूखा, बाढ़, कीट व्याधि, ओलावृष्टि आदि प्राकृतिक आपदाओं से होने वाले नुकसान से किसानों को राहत दिलाने के लिए योजना शुरू की गई है। राजनांदगांव जिले के लिए मुख्य फसल धान सिंचित एवं धान असिंचित तथा अन्य फसल सोयाबीन, अरहर अधिसूचित है।
बीमा के लिए गांव को इकाई निर्धारित किया गया है। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजनांतर्गत ऋणी एवं अऋणी किसान जो भू-धारक व बटाईदार हो सम्मिलित हो सकते हैं। ऋणी कृषक ऐच्छिक आधार पर फसल बीमा करा सकते है, जिसके लिये किसान को निर्धारित प्रपत्र मंे हस्ताक्षरित घोषणा पत्र बीमा की अंतिम तिथि के 7 दिवस पूर्व संबंधित बैंक में अनिवार्य रूप से जमा करना होगा। किसान के द्वारा निर्धारित प्रपत्र में घोषणा पत्र जमा नहीं करने पर संबंधित बैंक द्वारा संबंधित मौसम के लिये स्वीकृत या नवीनीकृत की गई अल्प कालीन कृषि ऋण का अनिवार्य रूप से बीमा किया जाना है। अधिसूचित फसल उगाने वाले सभी गैर ऋणी किसान जो योजना में सम्मिलित होने के इच्छुक हो वे बुआई पुष्टि प्रमाण पत्र क्षेत्रीय पटवारी, ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी द्वारा सत्यापित कराकर एवं अन्य दस्तावेज प्रस्तुत कर योजना मंे सम्मिलित हो सकते हैं।बीमा के लिए प्रीमियम राशि दर –
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजनांतर्गत धान सिंचित 44 हजार 500 रूपए एवं धान असिंचित 36 हजार 500 रूपए का प्रति हेक्टर ऋणमान है, जिसका 2 प्रतिशत अर्थात् किसान द्वारा देय प्रीमियम राशि 890 रूपए धान सिंचित एवं 730 रूपए धान असिंचित के लिए प्रति हेक्टेयर की दर से देय होगा। इसी प्रकार किसान द्वारा सोयाबीन फसल के लिए 700 रूपए, अरहर फसल के लिए 505 रूपए प्रति हेक्टेयर की दर से देय होगा।बीमा कराने के लिये आवश्यक दस्तावेज – ऋणी किसानों का बीमा संबंधित बैंक, सहकारी समिति द्वारा अनिवार्य रूप से किया जाएगा। उन्हें केवल घोषणा एवं बुवाई प्रमाण पत्र प्रस्तुत करना होगा। अऋणी किसानों को बैंक, सहकारी समिति एवं लोक सेवा केन्द्र में बीमा प्रस्ताव फार्म, नवीनतम आधारकार्ड, बैंक पासबुक, भू-स्वामित्व साक्ष्य (बी-1 पांचसाला), किरायदार, साझेदार किसान का दस्तावेज, बुवाई प्रमाण पत्र एवं घोषणा पत्र प्रदाय कर बीमा करा सकते हैं।बीमा कहां कराएं –
किसानों द्वारा फसल बीमा कराने के लिए अपने संबंधित समिति, संबंधित बैंक, बीमा प्रदाय कंपनी (यूनाईटेड इंडिया इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड), लोक सेवा केन्द्र के माध्यम से अपनी फसलों का बीमा करा सकते हैं।किसान के लिए महत्वपूर्ण बिंदु – एक की अधिसूचित क्षेत्र एवं अधिसूचित फसल के लिये अलग-अलग विŸाीय संस्थाओं से कृषि ऋण स्वीकृत होने की स्थिति मंे कृषक को एक ही स्थान से बीमा कराया जाना है। इसकी सूचना किसान को संबंधित बैंक को देनी होगी। ऋणी एवं अऋणी कृषकों के द्वारा समान रकबा, खसरा का दोहरा बीमा कराने की स्थिति मंे किसान के सभी दस्तावेज को निरस्त करने का अधिकार बीमा कंपनी के पास होगा। कृषक द्वारा अधिसूचित फसल के नाम में बदलाव करने के लिये संबंधित बैंक मंे लिखित रूप से बोनी प्रमाण पत्र बीमा आवेदन की अंतिम तिथि से दो दिवस पूर्व जमा कर फसल परिवर्तन कर सकते है।प्रत्येक गांव में 18 जून से 15 जुलाई 2020 तक ग्राम सभा एवं शिविरों का आयोजन –
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में जिले के शत प्रतिशत किसानों को बीमा आवरण में लाने के लिए 18 से 15 जुलाई 2020 तक सभी ग्रामों में विशेष अभियान चलाया जा रहा है।दावा गणना – शासन या अन्य विभागों, संस्थाओं द्वारा अनावारी, सूखा, बाढ़, अकाल क्षेत्र घोषित किये गये जाने पर बीमा दावा देय नहीं होगा। जबकि बीमा दावा गणना आयुक्त भू-अभिलेख छŸाीसगढ़ रायपुर द्वारा अधिसूचित क्षेत्र में रैण्डम नंबर के आधार पर आयोजित फसल कटाई प्रयोग मुख्य एवं अन्य अधिसूचित फसल के लिए 2 पटवारी एवं 2 ग्रामीण कृषि विकास अधिकारी से प्राप्त वास्तविक उपज के आंकड़ों से की जाएगी। फसल उत्पादन के आंकलन के लिए अधिसूचित बीमा इकाई ग्राम में फसल कटाई प्रयोग आयोजित करने के उपरांत प्रयोग से प्राप्त वास्तविक उपज, थ्रेस-होल्ड उपज से कम प्राप्त होने पर बीमित किसानों को बीमित राशि के आधार पर दावा भुगतान किया जाएगा। वास्तविक उपज, थ्रेसहोल्ड उपज से अधिक होने पर दावा भुगतान की पात्रता नहीं होगी।
उप संचालक कृषि ने किसानों से आग्रह किया है कि अधिक से अधिक संख्या में किसान अपनी फसलों का प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के अंतर्गत बीमा कराएं। ऐसे किसान जो बैंक से डिफाल्टर की श्रेणी में हैं, वो भी अऋणी किसान के रूप में अपने फसलों का बीमा करा सकते हैं। फसलों का बीमा करवाने के लिए समय कम होने के कारण अंतिम तिथि का इंतजार न करते हुए किसान स्वयं नजदीकी सहकारी समितियों या बैंकों में सम्पर्क कर आवश्यक कार्रवाई कर सकते हैं।
