Home छत्तीसगढ़ राजनांदगांव : जिले में सघन सुपोषण अभियान के मिल रहे प्रभावी परिणाम

राजनांदगांव : जिले में सघन सुपोषण अभियान के मिल रहे प्रभावी परिणाम

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० छुईखदान विकासखंड के 272 गंभीर कुपोषित बच्चों के वजन एवं 172 एनीमिक महिलाओं के हिमोग्लोबिन में हुई बढ़ोत्तरी
राजनांदगांव। सुपोषण के प्रभाव से जिले के बच्चों के चेहरे में इन दिनों ताजी मुस्कान खिलने लगी है। बच्चों को आंगनवाड़ी केंद्रों में अतिरिक्त पौष्टिक आहार देने के साथ-साथ आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं द्वारा घर-घर टिफिन में नाश्ता एवं खाना पहुंचाया जा रहा है। ऐसे ही प्रयासों के परिणाम स्वरूप जहां जिले के मानपुर विकासखंड के ज्यादातर बच्चे अब गंभीर कुपोषण से बाहर निकल आए हैं, वहीं छुईखदान विकासखंड के 272 गंभीर कुपोषित बच्चों के वजन एवं 172 एनीमिक महिलाओं के हिमोग्लोबिन में बढ़ोत्तरी हुई है।
जिले में सघन सुपोषण अभियान के प्रभावी परिणाम आ रहे हैं। जिला प्रशासन द्वारा मानपुर, मोहला एवं छुईखदान विकासखंड में कुपोषण दूर करने के लिए विशेष अभियान चलाया गया। जिसे केवल एक अभियान नहीं बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में सुपोषण के लिए जागृति की लहर के रूप में आंका जा रहा है। सघन सुपोषण अभियान के माध्यम से सुदूर वनांचल क्षेत्रों तक कुपोषण को दूर करने के लिए व्यापक पैमाने पर कार्य किए जा रहे हैं। इस मुहिम से सामुदायिक सहभागिता के साथ ही स्वयंसेवी संस्थाओं, यूनीसेफ तथा एम्स को जोड़ने से बेहतर गति मिली है। जिले के इन चिन्हांकित विकासखंडों में कुपोषण को दूर करने के लिए लगातार कार्य किए जा रहे हैं। आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं द्वारा घर-घर जाकर बच्चों को टिफिन में नाश्ता एवं खाना पहुंचाया जा रहा है और केन्द्रों में भी अतिरिक्त पौष्टिक आहार दिया जा रहा है। सघन सुपोषण अभियान के प्रभाव से मानपुर विकासखंड में गंभीर कुपोषित बच्चों में से ज्यादातर अब सामान्य श्रेणी में आ गए हैं। इन क्षेत्रों में बच्चों की 15 दिन में स्वास्थ्य जांच की जा रही है। मानपुर में नवाचार करते हुए बच्चों को रेडी-टू-ईट व्यंजन बनाकर खिलाया जा रहा है।
छुईखदान एवं मोहला विकासखंड में भी इस दिशा में लगातार कार्य किए जा रहे हैं। गंभीर कुपोषित बच्चों एवं गर्भवती एनीमिक महिलाओं को चिन्हांकित कर उनके सुपोषण हेतु हरसंभव प्रयास किए जा रहे हैं। इन प्रयासों के परिणाम स्वरूप छुईखदान विकासखंड के 272 गंभीर कुपोषित बच्चों के वजन में बढ़ोत्तरी हुई है। इसी तरह गंभीर से मध्यम में आए बच्चों की संख्या 126 है एवं मध्यम से सामान्य में आए बच्चों की संख्या 22 है। इस संबंध में महिला एवं बाल विकास विभाग की जिला कार्यक्रम अधिकारी रेणु प्रकाश ने बताया, बच्चों एवं एनीमिक महिलाओं को प्रतिदिन नाश्ता एवं भोजन दिया जा रहा है जिसकी लगातार मॉनिटरिंग की जा रही है। स्वयं सेवी संस्थाओं तथा सामूहिक सहभागिता से इस अभियान को गति मिली है। पौष्टिक भोजन में बच्चों एवं माताओं को चिक्की, अंडा, फल एवं पौष्टिक आहार दिया जा रहा है। जिले में 433 एनीमिक गर्भवती महिलाएं हैं। इनमें से 300 एनीमिक शिशुवती माताओं तथा 172 एनीमिक गर्भवती महिलाओं के हिमोग्लोबिन में बढ़ोत्तरी हुई है। ग्रामीण क्षेत्रों में आंगनवाड़ी कार्यकर्ता एवं ग्राम पंचायत के माध्यम से सुपोषण के लिए जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है।

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