बिलासपुर। सेवानिवृत्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश 76 वर्षीय सुरेंद्र तिवारी ने मृत्यु के बाद अपना शरीर चिकित्सा विज्ञान की पढ़ाई के लिए दान करने का निर्णय लिया है। उन्होंने सिम्स एनॉटॉमी डिपार्टमेंट में शरीर दान के लिए फार्म भरा है।
अज्ञेय नगर निवासी तिवारी ने सिम्स प्रबंधन को सौंपे अपने घोषणा पत्र में कहा है कि उनकी मृत्यु के बाद उनके शरीर का उपयोग मेडिकल छात्र अध्ययन और शोध के लिए कर सकेंगे। एक जागरूक नागरिक होने के नाते समाज और विज्ञान के प्रति यह उनकी अंतिम आहुति होगी। इस पहल में उनके पुत्र राहुल तिवारी ने भी अपनी सहमति दी है। घोषणा पत्र के अनुसार मृत्यु के बाद सिम्स के अधिकारियों को सूचना देने की जिम्मेदारी उनके पुत्र की होगी। देहदान के इस संकल्प के दौरान गवाह के रूप में प्रतीप पाठक और अन्य उपस्थित रहे।
सिम्स प्रबंधन ने जताया आभार सिम्स के एनाटॉमी एनॉटॉमी डिपार्टमेंट के एचओडी ने तिवारी के इस निर्णय की सराहना करते हुए इसे समाज के लिए एक बड़ी प्रेरणा बताया। उन्होंने कहा कि ऐसे महान निर्णयों से ही चिकित्सा जगत में नए डॉक्टरों को सीखने और शोध करने का अवसर मिलता है।



