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राजनांदगांव : कृषक अरहर, चना, मसूर एवं सरसों फसल के विक्रय हेतु करा सकते हैं पंजीयन

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राजनांदगांव : कृषक अरहर, चना, मसूर एवं सरसों फसल के विक्रय हेतु करा सकते हैं पंजीयन
राजनांदगांव : कृषक अरहर, चना, मसूर एवं सरसों फसल के विक्रय हेतु करा सकते हैं पंजीयन

– प्राइस सपोर्ट स्कीम (पीएसएस) अंतर्गत एकीकृत किसान पोर्टल एवं ई-समृद्धि पोर्टल पर किया जा रहा किसानों का पंजीयन
राजनांदगांव । प्रधानमंत्री अन्नदाता आय संरक्षण अभियान (पीएम-आशा) योजना अंतर्गत प्राइस सपोर्ट स्कीम (पीएसएस) में किसानों का पंजीयन एकीकृत किसान पोर्टल एवं ई-समृद्धि पोर्टल पर किया जा रहा है। योजना अंतर्गत खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 में अरहर, मूंग, उड़द, मूंगफली एवं सोयाबीन तथा रबी विपणन वर्ष 2026-27 में चना, मसूर एवं सरसों फसल की बुवाई करने वाले कृषकों का पंजीयन का कार्य किया जा रहा है। इसके लिए जिले में प्राथमिक कृषि सहकारी समिति के 15 उपार्जन केन्द्रों तथा एक एफपीओ स्वर्ण उपज महिला किसान उत्पादक प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड सुकुलदैहान को अधिसूचित किया गया है। जिनमें घुमका, पदुमतरा, सोमनी, छुरिया, कुमरदा, गैंदाटोला, गहिराभेड़ी, डोंगरगांव, तुमड़ीबोड, कोकपुर, खुर्सीपार, डोंगरगढ़ अछोली, मुसरा, मोहारा एवं लाल बहादुर नगर शामिल हैं।
राज्य सरकार द्वारा नाफेड के माध्यम से दलहन एवं तिलहन फसलों की खरीदी की जा रही है। जिसके लिए समर्थन मूल्य सोयाबीन 5328 रूपए प्रति क्विंटल, अरहर 8000 रूपए प्रति क्विंटल तथा चना 5875 रूपए प्रति क्विंटल, मसूर 7000 रूपए प्रति क्विंटल एवं सरसों 6200 रूपए प्रति क्विंटल निर्धारित किया गया है। कृषक अपने क्षेत्र के ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारियों के माध्यम से संबंधित सेवा सहकारी समिति में आवेदन पत्र के साथ ऋण पुस्तिका, बी-1, पी-2, आधार कार्ड एवं बैंक पासबुक की छायाप्रति जमा कर पंजीयन करा सकते हैं। योजना अंतर्गत शासन द्वारा निर्धारित न्यूनतम समर्थन मूल्य पर जिले के लिए चिन्हांकित केंद्रीय एजेंसी भारतीय राष्ट्रीय कृषि सहकारी विपणन संघ मर्यादित (नेफेड) द्वारा पंजीकृत कृषकों की फसलों का उपार्जन किया जाएगा।
उपसंचालक कृषि टीकम सिंह ठाकुर ने बताया कि प्राइस सपोर्ट स्कीम (पीएसएस) में किसानों का पंजीयन एकीकृत किसान पोर्टल एवं नाफेड द्वारा संचालित ई-समृद्धि पोर्टल के माध्यम से दलहन एवं तिलहन फसलों की ऑनलाईन पंजीयन कर खरीदी की जा रही है। इससे किसानों को समर्थन मूल्य की राशि सीधे उनके बैंक खातों में प्राप्त होगी। यह योजना दलहन-तिलहन क्षेत्र के विस्तार और किसानों की आय वृद्धि में महत्वपूर्ण भूमिका सिद्ध होगी।

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