रायगढ़। जिले में दिसंबर 2025 को एक हाथी शावक की बड़झरिया तालाब में डूबने से मौत हो गई थी। रविवार को ग्रामीणों ने क्षेत्र के शुद्धिकरण, वन और वन्यप्राणियों की सुरक्षा और किसी भी प्रकार की जनहानि न हो, इस उद्देश्य से पूजा-पाठ कर मृत्युभोज का आयोजन किया। मामला रायगढ़ वन परिक्षेत्र के बंगुरसिया सर्किल का है। शावक की मौत के बावजूद हाथियों का झुंड कई दिनों तक आसपास के जंगल में ही डटा रहा। हाथियों के कारण धान मंडी में रखी धान की बोरियों को लगातार नुकसान पहुंच रहा था।
ऐसे में बंगुरसिया और नवागांव के ग्रामीणों ने शुद्धिकरण, वन और वन्यप्राणियों की सुरक्षा और जनहानि की आशंका को दूर करने के लिए शनिवार को दशकर्म का आयोजन किया। आपसी चंदा कर कार्यक्रम की व्यवस्था की। रविवार को बड़ी संख्या में ग्रामीण उसी स्थान पर एकत्रित हुए, जहां हाथी शावक की मौत हुई थी। इसके बाद बैगा और ग्रामीणों ने शिव-गणेश मंदिर में भजन-कीर्तन, पूजा-अर्चना की और मृत्युभोज के रूप में भोजन ग्रहण किया। दरअसल, 19 दिसंबर 2025 की रात करीब 32 हाथियों का झुंड बंगुरसिया स्थित बड़झरिया तालाब में नहाने पहुंचा था। इस दौरान एक शावक पानी में डूब गया। काफी देर तक शावक के बाहर नहीं आने पर अन्य हाथियों ने उसे निकालने का प्रयास किया। लेकिन जब वह नहीं उठा तो पूरा झुंड चिंघाड़ने लगा। हाथियों की आवाज सुनकर वन अमला और ग्रामीण मौके पर पहुंचे और किसी तरह हाथियों को वहां से दूर किया गया। इसके बाद शावक के मृत होने की पुष्टि हुई।






