राजनांदगांव , शहर से लगे ग्राम धर्मापुर में दो साल से चल रहे मिशनरी आश्रम का विरोध शुरु हो गया है। मंगलवार को विहिप-बजरंग दल के पदाधिकारी धर्मापुर पहुंचे। जहां आश्रम में धर्मांतरण का आरोप लगाया। तत्काल आश्रम को बंद कर पास्टर पर कार्रवाई की मांग की।
हिंदू संगठनों के विरोध के बाद सीएसपी वैशाली जैन पुलिस बल के साथ पहुंचीं। जिन्होंने स्थिति को संभाला। इसके बाद मिशनरी आश्रम के भीतर मौजूद 5 नाबालिग बच्चियों को आश्रम से निकालकर बाल कल्याण समिति के अफसरों को सौंपा गया है। वहीं 5 ऐसी किशोरी भी आश्रम में पाई गई हैं, जिनकी उम्र 15 से 17 साल के बीच है। सभी कांकेर जिले के आमाबेड़ा के रहने वाले हैं।
हिंदू संगठनों का आरोप है कि आदिवासी परिवार के इन बच्चों को आश्रम में लाकर पास्टर द्वारा इनका धर्मांतरण कराया जा रहा है। इन्हें मिशनरी शिक्षा दी जा रही है। आश्रम के भीतर कुछ महिलाएं भी मौजूद थीं। विरोध बढ़ने के बाद आश्रम के पास्टर डेविड चाको को पुलिस ने पूछताछ के लिए थाने लाया है। जिनसे आश्रम संचालन के संबंध में परमिशन और जरुरी दस्तावेज खंगाले जा रहे हैं।
आमाबेड़ा में हुई थी हिंसा, सभी बालिका उसी क्षेत्र की मामले का गंभीर पहलू यह है कि मिशनरी आश्रम के भीतर को 10 बालिकाएं मिली हैं, वे कांकेर जिले के उसी आमाबेड़ा गांव से हैं जहां पिछले दिनों धर्मांतरण को लेकर हिंसा हुई। जिसके बाद प्रदेश भर में बड़ा विवाद छिड़ा। इन बच्चों को यहां क्यों रखा गया है इसकी जानकारी किसी को नहीं है। महिला एवं बाल विकास विभाग के अफसर नाबालिग बच्चों से उनके माता-पिता,यहां लाने अनुमति जैसी जानकारी जुटा रहे हैं।
गंभीरता से जांच और कड़ी कार्रवाई की मांग की गई कथित धर्मांतरण के मामले को लेकर हिंदू संगठनों ने जमकर विरोध किया। उन्होंने आश्रम तत्काल सील करने की मांग की। इसके अलावा एसपी अंकिता शर्मा से मिलकर भी हिंदू संगठन के पदाधिकारियों ने मामले की गंभीरता से जांच और कार्रवाई की मांग की है। मामले को लेकर सीएसपी वैशाली जैन ने बताया कि संचालक से पूछताछ की जा रही है। दस्तावेज भी मांगे गए हैं। वहीं नाबालिग बच्चियों से काउंसलर के माध्यम से पूछताछ की जा रही है।
बच्चों को बताया अनाथ स्कूलों में कराया भर्ती अब तक की पूछताछ में आश्रम में मिले बच्चों को पास्टर डेविड ने अनाथ बताया है। जिन्हें आश्रम में रखकर वह पढ़ाई करा रहा है। इसके लिए गांव के करीब मौजूद स्कूलों में उन्हें दाखिल भी किया गया है। सभी नाबालिग बालिकाएं आदिवासी समाज की है। दावा है कि उनके परिजनों ने उन्हें आश्रम ले जाने की अनुमति दी है। हालांकि पुलिस,बाल कल्याण समिति के अफसर इसकी जांच कर रहे हैं।
चाको खुद को बता रहे पेंटागोस चर्च के प्रतिनिधि जिस डेविड चाको से पुलिस पूछताछ कर रही है, उसने कुछ समय पहले भी शहर के नेहरु नगर में ऐसी गितिवधि को अंजाम दिया था। विरोध के बाद डेविड ने मकान खाली कर धर्मापुर में जमीन खरीदी। जहां आवासीय अनुमति लेकर तीन मंजिला भवन का निर्माण कर दिया। डेविड चाको खुद को बिलासपुर के पेंटागोस चर्च का प्रतिनिधि बताते हैं। एक ऑडियो में उन्होंने आश्रम संचालन की जानकारी प्रशासन को नहीं होने की भी बात कही है।






