डोंगरगांव, ग्राम लुलीकसा में दो दिवसीय कबीर सत्संग समारोह प्रारंभ हुआ। इस अवसर पर शिक्षा नगरी कोटा से आए कबीर वाणी के राष्ट्रीय प्रचारक संत प्रभाकर साहेब ने प्रवचन देते हुए कहा कि आज शिक्षा का स्तर तो बढ़ा हैं लेकिन नैतिकता का स्तर घट रहा है। जिस चिकित्सक के भरोसे जीने की आशा लिए जाते हैं वही जीवन को छीन लें इससे भयावह क्या हो सकता है। केवल धन अर्जन की शिक्षा समाज का भला नहीं कर सकती, स्कूली शिक्षा समाज को कहां लेकर जा रही है इस पर चिंतन करना होगा।
शिक्षा वही सार्थक है जो जीवन में संस्कार जगाए मानव में मानवता लाए। कहा कि जिसकी नीति व नीयत साफ होती है नियती भी उसके साथ होती है। मेहनत करने वाले से गलती भी हो जाती है, लेकिन उसी से समाधान भी निकलता है। प्रेम को स्वर्ग का द्वार और रिश्तों का आधार बताते हुए संत ने कहा कि जिस घर में प्रेम पूर्वक बर्ताव होता है, वहां सुख-समृद्धि बनी रहती है। जो लोग शिकायत करते हैं कि कोई उनसे प्रेम नहीं करता। वे इस बात पर ध्यान दें कि (अहंकार) से परे होकर ही प्रेम को पाया जा सकता है।
बिना मेहनत किसी को कुछ नहीं मिल सकता कबीर मठ नादिया के आचार्य मंगल साहेब ने कहा कि स्वर्ग और नर्क कही बाहर नहीं इसी धरती पर है। मेरे-तेरे का झगड़ा जीवन में नर्क पैदा करता। आशा और तृष्णा में पड़कर व्यक्ति दुख के कूप में पड़ता है, आपको बिना मेहनत किए कुछ नहीं मिल सकता, इसलिए कर्म करने बने। धर्माधिकारी सत्येंद्र साहेब ने छेरछेरा पर्व का महत्व बताते हुए कहा कि यह दान पुण्य का दिन है। अनजाने में हुए पाप कर्मों का शुद्धिकरण निस्वार्थ भाव से सेवा करके ही किया जा सकता है।







