रायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार के दो बड़े फैसलों ने राज्यभर में चर्चा का माहौल बना दिया है। एक ओर सरकार ने आम जनता को राहत देते हुए 200 यूनिट तक बिजली मुफ्त करने की घोषणा की है, वहीं दूसरी ओर अचानक रजिस्ट्री (स्टांप ड्यूटी व गाइडलाइन वैल्यू) के रेट बढ़ा देने से जमीन खरीद-बिक्री का बाजार गर्म हो गया है।
सरकार के बिजली बिल कम करने के फैसले का स्वागत हो रहा है, लेकिन रजिस्ट्री दरों में अप्रत्याशित बढ़ोतरी से जमीन खरीदारों और विक्रेताओं के बीच असमानता और असमंजस की स्थिति स्पष्ट दिखाई दे रही है। कई जगह खरीदार और विक्रेता तय सौदे पर दोबारा बातचीत कर रहे हैं, जिससे लेन-देन अटकने लगे हैं।
स्थानीय लोगों और प्रॉपर्टी डीलरों का कहना है कि “एकदम से रेट बढ़ने से कई प्लॉट और जमीन के सौदे विवाद में पड़ सकते हैं,” क्योंकि पहले हुए एग्रीमेंट नए रेट के हिसाब से महंगे पड़ रहे हैं। इससे खरीदारों पर अतिरिक्त बोझ बढ़ रहा है, वहीं विक्रेता भी नई दरों को लेकर उलझन में हैं।
जमीन बाजार से जुड़े जानकारों का कहना है कि रजिस्ट्री दर बढ़ने से न सिर्फ जमीन के दाम बढ़ेंगे बल्कि इसका असर होम लोन, बैंक वैल्यूएशन और भविष्य की खरीद-बिक्री पर भी पड़ेगा। कई लोग सवाल उठा रहे हैं कि सरकार ने बीच वर्ष में ही दरों में बदलाव क्यों किया, जबकि आमतौर पर यह प्रक्रिया वित्तीय वर्ष की शुरुआत में होती है।
जनता के बीच चर्चा है कि लगातार नीतियों में अचानक बदलाव से बाजार में अनिश्चितता बढ़ती है।
प्रशासन की ओर से अभी तक कोई स्पष्ट स्पष्टीकरण नहीं आया है कि अचानक रेट बढ़ाने का कारण क्या था।
फिलहाल सरकार के इन दोनों फैसलों को लेकर प्रदेश में मिश्रित प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है—
जहाँ बिजली बिल में राहत से आम जनता खुश है, वहीं जमीन बाजार में बढ़ा तनाव खरीदारों और विक्रेताओं को उलझन में डाल रहा है।







