प्रशासन कर रहा जुगाड़, फिर भी खरीदी प्रभावित होने के आसार
राजनांदगांव . धान खरीदी से पहले ही किसानों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग द्वारा इस बार पुराने टोकन ऐप को अपग्रेड कर ‘तुंहर टोकन मोबाइल ऐप’ के रूप में लॉन्च किया गया है, लेकिन नया ऐप किसानों के लिए परेशानी का कारण बन गया है। टोकन लेने की प्रक्रिया इतनी जटिल है कि तकनीक से अनजान और कम पढ़े-लिखे किसान ऑनलाइन आवेदन नहीं कर पा रहे।
उधर, समिति प्रबंधक और कंप्यूटर ऑपरेटरों की अनिश्चितकालीन हड़ताल ने प्रशासन की नींद उड़ा दी है। शासन ने प्राधिकृत अधिकारियों, नोडल अफसरों, सचिवों, पटवारियों और राजस्व अधिकारियों को खरीदी केंद्रों में तैनात करने के निर्देश दिए हैं। कंप्यूटर जानकार युवाओं की अस्थायी भर्ती की तैयारी भी चल रही है, लेकिन इसके बावजूद धान खरीदी प्रभावित होने की पूरी संभावना है।
उठाव और सूखत के लिए कौन होगा जिम्मेदार
अधिकारियों की चिंता यह भी है कि हड़ताल के बीच खरीदी तो किसी तरह हो जाएगी, लेकिन उठाव और सूखत के बिल किसके नाम पर फाड़े जाएंगे, यह अब तक स्पष्ट नहीं है। इधर, शासन ने नियम तय किया है कि धान खरीदी केंद्र की 70 प्रतिशत क्षमता मोबाइल ऐप से टोकन के लिए आरक्षित रहेगी, जबकि बाकी 30 प्रतिशत टोकन सोसाइटी स्तर पर मिलेंगे। इनमें लघु व सीमांत किसानों को 80प्रतिशत प्राथमिकता दी जाएगी।
पहले दिन खरीदी की औपचारिकता होगी
15 नवंबर से खरीदी शुरू होने जा रही है, पर तैयारी अब भी अधूरी है। सूत्रों का कहना है कि पहले दिन खरीदी सिर्फ औपचारिकता होगी, क्योंकि कई केंद्रों में साफ-सफाई और तकनीकी व्यवस्थाएं पूरी नहीं हैं। प्रशासन ‘एप और व्यवस्था’ दोनों को संभालने में पसीना-पसीना है, और किसान सवाल पूछ रहे हैं- ‘धान बेचें या ऐप चलाना सीखें?






