राजनांदगांव । भाजपा के कद्दावर नेता और सांसद संतोष पांडे को लेकर इन दिनों राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज है। बताया जा रहा है कि सांसद बनने के बाद से ही वे कुछ स्थानीय नेताओं की आंखों में खटक रहे हैं। राजनीतिक मतभेद इस हद तक बढ़ गए हैं कि कई बार उन्हें कार्यक्रमों से दूर रखने की कोशिशें की जाती हैं।
हाल ही में उपराष्ट्रपति के राजनांदगांव आगमन के दौरान आयोजित सरकारी कार्यक्रम में यह विवाद एक बार फिर सुर्खियों में आ गया। कार्यक्रम के सरकारी कार्ड में तो सांसद का नाम नहीं था, लेकिन चर्चा तब और बढ़ गई जब शहरभर में लगे होर्डिंग्स से भी उनका फोटो गायब पाया गया। इसे लेकर अब शहर और जिले में तरह-तरह की चर्चाएं होने लगी हैं।
राजनीतिक गलियारों में यह भी कहा जा रहा है कि कुछ लोग सांसद संतोष पांडे के बढ़ते प्रभाव से असहज महसूस कर रहे हैं। कई कार्यकर्ता यह तक कह रहे हैं कि “हम तो टिकट कटवाने में लगे थे, लेकिन उन्हें दोबारा टिकट कैसे मिल गया।” सूत्रों के अनुसार, पार्टी संगठन में उनकी पकड़ और जनता के बीच उनकी लोकप्रियता के कारण ही उन्हें दोबारा टिकट मिला और वे जीत भी गए।
अब लगातार दो-तीन कार्यक्रमों में उनका नाम या तस्वीर गायब रहने से भाजपा की अंदरूनी खींचतान खुलकर सामने आने लगी है। आमजन और कार्यकर्ताओं के बीच यह सवाल उठ रहा है कि आखिर पार्टी के भीतर ऐसा माहौल क्यों बन रहा है, जहां अपने ही नेता की अनदेखी की जा रही है।
राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि यह घटनाक्रम भाजपा की आंतरिक राजनीति में गहराते मतभेदों की ओर संकेत करता है, जिसका असर आने वाले समय में पार्टी के संगठनात्मक माहौल पर भी पड़ सकता है।







