राजनांदगांव | दिग्विजय महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. सुचित्रा गुप्ता के निर्देशानुसार हिंदी विभाग द्वारा आयोजित अध्ययन मंडल की बैठक में छत्तीसगढ़ी भाषा-साहित्य और संस्कृति को ध्यान में रखते हुए सत्र 2025-26 के लिए नये पाठ्यक्रम तैयार किये गए है। इस संबंध में विभागाध्यक्ष डॉ. शंकर मुनि राय ने बताया कि इस स्वशासी महाविद्यालय में नये सत्र से स्नातक ऑनर्स की पढ़ाई शुरू होने जा रही है। इसके पाठ्यक्रम में स्थानीय भाषा, साहित्य, शिक्षा और संस्कृति को ध्यान में रखते हुए पाठ्यक्रम तैयार किये गए हैं। राष्ट्रीय शिक्षा नीति की सेमेस्टर प्रणाली के प्रत्येक सेमेस्टर में ऐसे पाठ्य विषय शामिल किये गए हैं, जिनमें छत्तीसगढ़ी भाषा- साहित्य का इतिहास, व्याकरण मुहावरे, लोकोक्तियां, पहेलियां , लोक साहित्य, लोकगाथा, लोककथा, लोकगीत और छत्तीसगढ़ी व्यंजन आदि का अध्ययन-अध्यापन किया जाएगा।
इस संबंध में डॉ राय ने आगे बताया कि स्वशासी महाविद्यालय होने के नाते आवश्यकता अनुसार हमें पाठ्यक्रम संशोधन-संवर्धन तथा संरचना करने की सुविध प्राप्त है। यही कारण है कि हमने अपने पाठ्यक्रम में छत्तीसगढ़ी वीर गाथा, पंडवानी और भरथरी जैसे लोकगीतों को स्थान दिया है। इसके साथ ही छत्तीसगढ़ पीएससी को ध्यान में रखते हुए हमने छत्तीसगढ़ी व्याकरण की समस्त कोटियों को भी अध्ययन-अध्यापन का विषय बनाया है। इनके अध्ययन से हमारे विद्यार्थी विशेष रूप से लाभान्वित होंगे। हिंदी आनर्स और एम ए के पाठ्यक्रम में छत्तीसगढ़ के मूर्धन्य साहित्यकार पंडित सुंदरलाल शर्मा, लोचन प्रसाद पांडे, प्यारेलाल गुप्त, श्यामलाल चतुर्वेदी, नारायण लाल परमार, डॉ. खूबचंद बघेल, संत धरमदास, मुकुटधर पांडे, हरि ठाकुर, द्वारिका प्रसाद तिवारी ‘विप्र’, परदेसी राम वर्मा आदि साहित्यकारों की रचनाएं भी सम्मिलित की गई है। साथ ही छत्तीसगढ़ के पहले ज्ञानपीठ पुरस्कार प्राप्त अंतरराष्ट्रीय साहित्यकार विनोद कुमार शुक्ल की कृतियों को भी इस सत्र से पाठ्य विषय बनाया गया है।
प्राचार्य डॉ. सुचित्रा गुप्ता ने कहा कि हिंदी विभाग ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति की मनसा के अनुरूप स्थानीय बोली, भाषा और संस्कृति के साथ ही भारतीय ज्ञान परंपरा को पाठ्यक्रम में शामिल करके सराहनीय कार्य किया है। अध्ययन मंडल की बैठक में विषय विशेषज्ञ के रूप में डॉ. अंजन कुमार कल्याण महाविद्यालय भिलाई, डॉ. बी. एन. जागृत, डॉ. प्रवीण कुमार साहू, डॉ. गायत्री साहू, डॉ. नीलम तिवारी, डॉ. वीरेंद्र कुमार साहू, कौशिक लाल बिशी और हिंदी विभाग के पूर्व छात्र डॉ लोकेश शर्मा शामिल थे।






