बिलासपुर: बिलासपुर व रायपुर स्मार्ट सिटी लिमिटेड के गठन की वैधानिकता को चुनौती देते हुए छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई है। जनहित याचिका की प्रारंभिक सुनवाई हुई। इस दौरान हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस पीआर रामचंद्र मेनन व जस्टिस पीपी साहू की डिवीजन बेंच ने याचिकाकर्ता से कुछ सवाल भी दागे। कोर्ट ने याचिका की अधिकारिता को लेकर सवाल उठाए हैं। जनहित याचिका की सुनवाई के लिए डिवीजन बेंच ने एक सप्ताह बाद की तिथि तय कर दी है।
वकील विनय दुबे ने हाई कोर्ट में जनहित याचिका दायर कर कहा है कि प्रदेश के दो प्रमुख नगर निगमों बिलासपुर व रायपुर स्मार्ट सिटी लिमिटेड का गठन अधिकारियों ने किया है। याचिकाकर्ता वकील ने कहा है कि स्मार्ट सिटी लिमिटेड के गठन के बाद अधिकारियों ने प्रशासनिक और आर्थिक अधिकारों को लिमिटेड के हिस्से में डाल दिया है। इसके चलते नगर निगम को प्राप्त अधिकारों का हनन हो रहा है। साथ ही अनावश्यक हस्तक्षेप किया जा रहा है। स्मार्ट सिटी लिमिटेड के अंतर्गत उन कार्यों को भी किया जा रहा है जो केंद्र सरकार की गाइड लाइन के विपरीत है। केंद्र सरकार द्वारा स्मार्ट सिटी के विकास के लिए जारी किए गए फंड का अधिकारी दुस्र्पयोग कर रहे हैं। इससे लोगों को बुनियादी सुविधा भी नहीं मिल पा रही है।
विकास कार्यों की फाइल भी नहीं खुल रही
स्मार्ट सिटी लिमिटेड के अंतर्गत किए जा रहे कार्यों की फाइल अफसर जनप्रतिनिधियों को नहीं दिखा रहे हैं। जनप्रतिनिधि जब कामकाज का हिसाब मांगते हैं तो अफसर केंद्र सरकार के नियमों का हवाला देते हुए फाइल देने से साफतौर पर इन्कार कर दे रहे हैं याचिका के अनुसार बिलासपुर और रायपुर नगर निगम में स्मार्ट सिटी लिमिटेड के तहत अफसरों ने प्रशासनिक और आर्थिक अधिकारों को अपने हाथ में ले लिया है। याचिका के अनुसार इस तरह का कार्य नगर पालिक अधिनियम 1956 में दिए गए प्रावधानों के विपरीत है।
बिलासपुर निगम में ऐसी व्यवस्था
बिलासपुर नगर निगम के अंतर्गत गठित स्मार्ट सिटी लिमिटेड में बिलासपुर लोकसभा क्षेत्र के सांसद अस्र्ण साव को नहीं रखा गया है। स्मार्ट सिटी परियोजना केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजना में से एक है। केंद्र के फंड से विकसित होने वाले शहर के लिए कार्ययोजना बनाने वाली समिति में सांसद को शामिल नहीं किया जाना अचरज की बात है।






