राजनांदगांव. शहर की सड़कों की मरमत और पुनर्निर्माण के नाम पर बड़ा खेल रहा है। बारिश के पहले शहर की विभिन्न सड़कों की मरमत के नाम पर 7 करोड़ रुपए खर्च किया गया। ये सड़कें बारिश में पूरी तरह उखड़ गई। अब फिर से शहर की जर्जर सड़कों की मरमत के नाम पर शासन से 10.3 करोड़ रुपए की मंजूरी मिल गई। उन्हीं जर्जर सड़कों फिर से गुणवत्ताहीन कार्य कर इस राशि का भी बंदरबाट कर लिया जाएगा और फिर पूछने वाला कोई नहीं, क्योंकि इसमें निगम के अधिकारी, जनप्रतिनिधि और ठेकेदार तीनों को फायदा होगा।
बारिश के पहले ही शहर की विभिन्न सड़ाकों की मरमत और पुनर्निर्माण के नाम पर सात करोड़ रुपए खर्च किया गया। बारिश में सड़कें धुल गईं। नव निर्मित सड़कों की तीन साल तक मेटेनेंस की जवाबदारी संबंधित ठेकेदार की होती है, लेकिन किसी भी सड़क को बारिश के बाद पुन: नहीं सुधारा गया। ये सड़कें गारंटी पीरियेड में है, तो क्यों ठेकेदारों से इन सड़कों की मरमत नहीं कराई जा रही है।
जिन सड़कों बारिश के पहले मरमत कराई गई, उसमें भी खेल किया गया। कौन-कौन सी सड़कें, कहां से कहां तक किस ठेकेदार द्वारा बनाई गई। निगम प्रशासन व जनप्रतिनिधियों ने सार्वजनिक नहीं किया। सड़कों की लंबाई में खेल हो गया। यही कारण कि निगम प्रशासन वर्क आर्डर की कॉपी देने से भी कतरा रहा है, क्योंकि इससे उनकी चोरी पकड़ी जाएगी। इस पर विपक्ष भी चुप्पी साधे बैठा है, क्योंकि बीजेपी की सरकार आने के बाद निगम में भाजपा समर्थित ठेकेदारों का बोलबाल चल रहा है। अप्रत्यक्ष रूप से सभी क्षेत्र में जनप्रतिनिधि ही ठेकेदारी कर रहे हैं







