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राजनांदगांव : साहित्य, अतीत और वर्तमान को जोड़कर हमारी सांस्कृतिक पहचान को सहेजने में मदद करता है – बृजमोहन अग्रवाल

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राजनांदगांव I प्रांतीय छ्त्तीसगढ़ी साहित्य समिति द्वारा इसके संस्थापक अध्यक्ष स्व० सुशील यदु के सुरता व साहित्य समिति स्थापना के 25 वर्ष पूरे होने पर रजत जयंती समारोह का आयोजन किया गया। रायपुर के वृंदावन हाटेल में आयोजित उक्त रजत जयंती कार्यक्रम में छ्त्तीसगढ़ी साहित्य समिति के जिला अध्यक्ष आत्माराम कोशा “अमात्य” व सचिव लखन लाल साहू “लहर” के नेतृत्व में जिले भर‌ के कवि/ साहित्यकारों की बड़ी संख्या में उपस्थिति रही ।
इस अवसर पर साहित्य समिति – जिला इकाई की ओर से मूख्य अतिथि पूर्व संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री व वर्तमान सांसद बृजमोहन अग्रवाल जी का जिला अध्यक्ष आत्माराम कोशा “अमात्य” द्वारा भाव-भीना स्वागत किया गया।
दो सत्रों में चले इस आयोजन की पगरइती- दुधाधारी मठ के राज महंत राम सुंदर दास ने की वहीं विशेष अतिथि के रूप में छ्त्तीसगढ़ राजभाषा आयोग के सचिव अभिलाषा बेहार, पूर्व राजभाषा आयोग अध्यक्ष डॉ विनय पाठक, कथाकार डॉ परदेशी राम वर्मा डॉ बलदेव राम साहू उपस्थित थे। कवि साहित्यकारों से खचाखच भरे वृंदावन हाल को छ्त्तीसगढ़ी में संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि साहित्य एक शक्तिशाली माध्यम है जो छत्तीसगढ़ के गौरवशाली इतिहास, समृद्ध संस्कृति, और परंपराओं को सजीव रूप में यह प्रस्तुत करने का कार्य करता है। उन्होंने यह भी कहा कि, साहित्य वह सेतु है जो अतीत और वर्तमान को जोड़कर हमारी सांस्कृतिक पहचान को सहेजने में मदद करता है। उन्होंने लोक साहित्य, कविता, कहानियाँ, और नाट्यकला के माध्यम से छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक धरोहर,आदिवासी जीवन, प्राकृतिक सौंदर्य और संघर्षशीलता को समाज के विभिन्न वर्गों तक पहुंचने पर जोर दिया। साथ ही कहा कि, साहित्यकारों को राज्य के सभी 33 जिलों के पर्यटन, संस्कृति,सभ्यता, तीज तिहार, परंपरा की जानकारी को संग्रहित कर जिला स्तर पर पुस्तक का प्रकाशन कराना चाहिए।
छत्तीसगढ़ी में रखें बात
श्री अग्रवाल ने साथ ही यह कहा कि हम छत्तीसगढ़िया है। हम छ्त्तीसगढ़ी होकर हमारी अपनी बातों को छत्तीसगढ़ी में रखना होगा। देश दुनिया में कैसे पहचान बने इसकी विशेषता बतानी होगी, इसके लिए साहित्यकारों को जवाबदारी निभानी होगी।
कार्यक्रम के प्रथम सत्र में सरस्वती वंदना के पश्चात “छत्तीसगढ़ी वाचिक परंपरा- बोली से भाषा तक” विषय पर विचार गोष्ठी हुई। इस अवसर पर सुरता सुशील यदु के रूप में स्मारिका का विमोचन हुआ साथ ही डॉ राजेश कुमार मानस की दो पुस्तक *अंतस के पीरा” और “जिंदगी के रंग”. साहित्यकार शकुंतला तरार की “सात लर के करधन”. सहित दर्जन भर से ज्यादा पुस्तकों का विमोचन मुख्य अतिथि के हाथों किया गया। इस अवसर पर छत्तीसगढ़ी साहित्य समिति के प्रांतीय अध्यक्ष- कान्हा कौशिक, पूर्व अध्यक्ष -जे०आर०‌सोनी ,सुखदेव राय ‘सरस”, चेतन भारती,मीर अली “मीर” डॉ विनोद कुमार वर्मा, डॉ चंद्रशेखर सिंह,रामेश्वर शर्मा, परमानन्द वर्मा, रामानंद त्रिपाठी,अजय “अमृतांशु”, राजकुमार इंदुरे , मनोहर यादव, व राजनांदगांव जिले के कवि / साहित्य धर्मी ओमप्रकाश साहू “अंकुर”, कथाकार मानसिंह “मौलिक”, महेंद्र कुमार बघेल “मधु”,राजकुमार चौधरी “रौना” सचिन निषाद, कुलेश्वर दास साहू, युनूस कुरैशी “अजनबी”, जितेंद्र पटेल , इकबाल खान “तनहा “आदि कवि/ साहित्यकार उपस्थित थे। अंतिम सत्र में कवि सम्मेलन शुरू होने के‌ पूर्व सीताराम “श्याम” ने बूझो- बूझो गोरखनाथ,, का गान प्रस्तुत किया। कार्यक्रम में आगत अतिथियों का आभार प्रदर्शन कवयित्री शकुंतला तरार ने उनकी वैशिष्ठ्यता को उल्लेखित करते हुए किया। उक्ताशय की जानकारी साहित्य समिति के कथाकार मानसिंह मौलिक ने दी।

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