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CG : सिरपुर मार्ग में दिखा बाघ, वन्यजीव प्रेमियों में खुशी की लहर

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रायपुर सिरपुर छपोराडीह मार्ग में गुरुवार को एक बाघ के विचरण करने का वीडियो वायरल हुआ था जिसकी पुष्टि वन विभाग ने भी कर दी है। अपनी कार से जा रहे शिक्षक काशीराम पटेल ने उसे अपने कैमरे में कैद किया था। वन विभाग के मुताबिक एक दशक पहले भी यहाँ बाघ देखा जा चूका है। वन विभाग ने ग्रामीणों को अलर्ट जारी कर दिया है। क्षेत्र में अभी तक हाथियों के वजह से लोग परेशान रहा करते थे लेकिन अब बाघ देखे जाने के बाद वे दहशत में हैं क्योकि भोजन और पानी के लिए वन्य जीव गॉंव के आसपास पहुंच जाते हैं और पालतू पशुओ को अपना शिकार बना लेते हैं, कभी कभी इंसानो पर भी हमला कर देते हैं। वन्यजीव प्रेमियों के लिए यह खुशखबरी है कि छत्तीसगढ़ के जंगलो में बाघ की मौजूदगी दर्ज हो चुकी है लेकिन उन्हें इस बात की चिंता है की कहीं इस बाघ का हश्र भी गोमर्डा के बाघ की तरह न हो जाये इसके लिए वन विभाग को अभी से अलर्ट हो जाना चाहिए और उसकी सुरक्षा में अमला लगा देना चाहिए। यह बाघ अब बारनवापारा अभ्यारण्य के आसपास महासमुंद के इलाके में दाखिल हो चुका है जहाँ स्थानीय आम नागरिको की आवाजाही आम बात है। देखा जाये तो इस बाघ की सुरक्षा वन विभाग के लिए एक चेलेंज है। पिछले दिनों गोमर्डा अभयारण्य में बाघ की मौत पर नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने सरकार का ध्यानाकर्षण कराया था। इसके साथ ही उन्होंने विधायकों की कमेटी बनाकर जांच की मांग भी की थी। नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरण दास महंत ने गोमार्डा अभयारण्य के अंदर युवा बाघ को करंट से मारे जाने पर वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री का ध्यान आकर्षित कराया था। उन्होंने कहा कि बाघों के संरक्षण पर वन विभाग करोड़ों रुपए खर्च करता है, बावजूद इसके बाघों की संख्या घटती जा रही है. प्रतिदिन बाघ करंट से मारे ही जा रहे है. इससे राज्य की छवि धूमिल हुई है, लेकिन राज्य की तरफ से अभी भी इस पर कोई कार्यवाही नहीं हुई है। वन मंत्री ने कहा कि यह सत्य है कि सारंगढ़ अभयारण्य में लगातार नजर रखे जाने के बावजूद यह घटना हुई। बाघ की मृत्यु के 10 दिन के अंदर ही आरोपियों को पकड़कर उन पर कार्यवाही भी की गई है. भविष्य में आगे ऐसा न हो इसके लिए योजना भी बनाई गई है। गौरतलब है की गोमर्डा अभ्यारण्य के आसपास खेतों में जंगली सूअर को रोकने के लिए तार बिजली के बिछाए गए थे, जिसमें बाघ फंस गया और उसकी मौत भी हो गई थी जिसे ग्रामीणों ने वहीँ दफना दिया था।

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